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भाभी चूची दबाने के दर्द से कराह रही थीं और कह रही थीं- साले धीरे धीरे दबाओ ना … दर्द होता है.मैंने लंड उसके मुँह से निकाल लिया और आकर उसकी बुर पर मुँह रखकर उसे चाटने लगा.

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काफी देर तक उसके लंड को चूसने के बाद दीदी ने उसके लंड को निकाला तो उसका लंड दीदी की लार से एकदम चिकना होकर चमकने लगा था.

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उन्होंने मेरी टांगों से अपने जिस्म को टिका दिया था इस तरह से वे मुझसे टिक सी गई थीं. मैं फिर अगले दिन पढ़ाई का बहाना बना कर मामी की चुदाई करने पहुँच गया. मिहिर ने मेरी बीवी की गर्दन को चूमा और उसके नितम्बों को अपने हाथ में पकड़ कर दबाते हुए उसको बेड की तरफ ले गया.

बेडरूम में, किचन में, बाथरूम में, मतलब आंटी की चुदाई घर के हर कोने में की, हर जगह बहुत सारे आसनों में उनको चोदा. अब मेरी भी खुमारी फिर से बढ़ने लगी और मैं अपनी योनि से तरल रिसता हुआ महसूस होने लगी. जबरदस्ती ही सही, पर मुझे लगने लगा कि उसने मुझे अपने वश में कर लिया था.

कोई दस मिनट तक गांड मारने के बाद उसने अपने लंड का पानी दीदी की गांड में ही छोड़ दिया. मेरी समझ में आ गया कि लंड में दम हो, तो वो कितनी ही बार खड़ा हो सकता है. उसके बैठने के बाद मैंने देखा कि उसके चूचे एकदम से टाइट होकर नुकीले हो चुके थे.

उसे बेइन्तहा मज़ा आने लगा था और वो मेरे सर को पकड़ कर चूत की तरफ धकेलने लगी. मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूँ, मुझे जिधर जगह मिली, मैं भागने लगी.

कुछ देर बाद मेरा माल निकल गया और हम दोनों एक दूसरे से चिपक कर लेट गए.

मैंने पंद्रह मिनट तक उसकी चूत को चोदा और फिर वो खुद ही अपनी गांड को उठा कर अपनी चूत की चुदाई करवाने लगी.

प्रमिला आंटी कहने लगी- कितने साल बाद आज मुझे इतना प्यार मिला … इसलिए थोड़ा भावुक हो गयी।मैंने भी उनके गालों को दोनों हाथों से पकड़ा और कहा- अब मैं आपको कभी निराश नहीं करूंगा।तो दोस्तो, यह थी मेरी पहली सच्ची मोहब्बत के साथ पहली चुदाई।हम दोनों दो साल तक ऐसे ही मौके मौके पर चुदाई करते रहे। अब अंकल का ट्रांसफर हमारे शहर में हो गया है. लेकिन जो उसकी सबसे बेहतरीन चीज है, वह है … उसकी जबरदस्त 34 इंच की चूचियां और पतली कमर की है. मैंने पूछा- पहले कभी चुदी हो?उसने कहा कि नहीं … चाहा तो बहुत से लड़कों ने था, लेकिन इज़्ज़त की वजह से और घर में पता न चल जाए, इस वजह कभी नहीं चुदी.

मनोज मामा ने मम्मी से कहा- अच्छा हुआ मंजू कि तुम आ गई भाभी मायके गयी हुई हैं तो तुम चाचा चाची का ध्यान रख लोगी।फिर मम्मी घर के काम में लग गई और रात हो गई हम सो गये।सुबह हुई तो मनोज हमारे घर आ गया था और वो और मम्मी कुछ बातें कर रहें थे।मनोज ने नाना जी से कहा- चाचा जी, मैं शहर जा रहा हूँ कुछ काम से … शाम को वापिस आऊँगा. आज मैं आपको बताऊंगा कि कैसे मैंने अपनी चुदाई की चाहत को पूरा किया, मेरी मम्मी के स्कूल की लड़की को मर्जी से उसे चोदा और उसकी चुदाई का मजा लिया. मैंने कहा- साली रंडी बनने का इतना शौक था, तो अब रंडी ही बना कर छोडूंगा … मादरचोदी … जा किसी से भी जा कर कह देना … जब तक लंड का पानी नहीं निकल जाता, तब तक लंड नहीं निकलेगा … भोसड़ी की … आज तेरी फाड़ कर ही तुझे छोडूँगा साली रंडी.

ये कहते हुए निर्मला ने राजशेखर की पैंट उतार दी और उसके लिंग को पकड़ हिलाते हुए बोली- देखो कितना तगड़ा मोटा और लंबा है इसका लंड, तुम्हारी चुत में घुसाते ही तुम पानी छोड़ने लगोगी.

वो मुझ पर चिल्लाते हुए बोली- क्या कर रहे हो? तुम्हें हो क्या गया है? अब ठीक से गाड़ी चलाना भी भूल गये क्या?मैंने अपनी लार को अपने अंदर गटका और दोबारा से गाड़ी स्टार्ट की. मैंने अपनी मामी की चुदाई की स्पीड बढ़ा दी और तेज गति के साथ मामी की चूत को चोदने लगा. पर मेरी कोशिश रहती थी कि सोने से पहले उससे अच्छे से बात कर लूं, पर अब धीरे धीरे उसमें भी कमी आती गई.

मैं हंसने लगा और बोला- जाओ कह दो भौजी … मैंने भी तुमको पेशाब करते हुए और चुत में उंगली करते समय का वीडियो बना लिया है. अब दीदी तड़पते हुए उसको चूत में लंड डालने के लिए जैसे भीख सी मांग रही थी. दोस्तो, ये थी मेरी गर्लफ्रेंड की सील तोड़ चुदाई … आपको मेरी ये गंदी कहानी कैसी लगी … कृपया मुझे जरूर बताएं, यह मेरी पहली सेक्स स्टोरी है.

जब वो मुझे जगा रही थी तो झुकी होने के कारण उसके चूचों के क्लिवेज ब्लाउज के अंदर से साफ दिखाई दे रहे थे.

फिर मेरी तरफ़ देख कर बोली- ओह भाईजान आप!तो मैंने कहा- हां … और चलो मुझे दिखाओ कहां लगी है?वो बोली- अभी अम्मी हैं. लेकिन अब कल्लू जब चाहे, मेरे सामने ही मम्मी की चुदाई कर देता है और मम्मी का कमरा भी खुला रहता है.

ऑफिस बीएफ मुझे बहुत मजा आ रहा था और मोनिषा आंटी भी मुँह चुदाई के मजे ले रही थीं. फिर मैंने उसको घोड़ी बनाकर पीछे से उसकी चुत में लंड डाल दिया और ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा.

ऑफिस बीएफ अब ऐसा क्या हुआ, वो सब मैं आपको बताने जा रहा हूँ, ये शुरुआत की बात है, मगर इसके बाद भी ऐसा बहुत कुछ हुआ था, जिसने मेरी ज़िंदगी ही बदल दी. मैं सीधा तो था … लेकिन जब मैं पढ़ता था, तो मेरी नज़रें उनके मम्मों पर गड़ सी जातीं.

उर्वशी बिस्तर पर लेट गई और मिहिर के बारे में सोचने लगी कि तभी मिहिर का मैसेज आ गया.

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मैंने बिना कुछ बोले उनकी पीठ पर साबुन लगा कर मलते हुए शरीर को छूने का मजा लेना शुरू कर दिया. अब मैंने अपनी छवि को कलंकित होने से बचाने के लिए एक भावनात्मक चाल चली. अब हम दोनों बिस्तर पर दीवार से टिक के एक दूसरे की बांहों में समाये हुए बैठे थे.

बेस्ट चुदाई कहानी के पिछले भागमामी की प्यासी चूत की सफाई और चुदाई-1में आपने पढ़ा कि मेरी मामी ने रात को फोन पर बातें करते हुए मुझे उत्तेजित कर दिया. भाभी ने दर्द भरे लहजे में कहा- एक बार अपनी बहन की चुचियां देख लेना, उसका कोई और मजा ले रहा है. कॉफ़ी पीने के बाद मैं उसे किस करने लगा और उसके मम्मों को भी मसलने लगा.

अब उन्होंने मुझे औंधा करके मेरा अंडरवियर अपने दोनों हाथों से नीचे खिसका दिया.

उनको चुदाई का वो मजा दिया, जो उन्होंने अपनी जिंदगी में कभी नहीं लिया था. करीब 20 मिनट बाद पूजा ने बोल ही दिया कि तुम दोनों के बीच क्या चल रहा?मैं कुछ बोलता, उससे पहले संध्या ने बोल दिया कि वही … जो आप दोनों के बीच चल रहा है. वो अपनी चूत खोल कर उंगली से रगड़ते हुए बोली- जलते क्यों हो यार … लो तुम भी मेरे मज़े ले लो.

उत्तेजना के मारे मैंने भी बहू की गांड पर हल्का सा दबाव बना ही दिया. कुछ ही पलों में कमरा निर्मला की दर्द भरी और कामुक कराहों से गूंजने लगा. उसने मेरी गांड मुझे उंगली डाल दी … इससे मैं एकदम से उत्तेजित हो गया और मेरे लंड का पानी निकल गया.

उसने पहले मेरे गालों को चूमा, फिर गला, फिर मेरे चिकने सीने को चूमने लगी. मैंने कहा- थोड़ा ठहर जा!तो बोला- फट गई? मेरे से अच्छे अच्छे घबराते हैं।मैंने कहा- थोड़ा ठहर जा … तू भी तो मजा ले, इतनी जल्दी हड़बड़ी क्यों मचाए है?उसने एक दो धक्के और दिए और झड़ गया.

दिन भर घर में पेंटर होते थे, तो दोपहर को आराम करने ले लिए मैं सुनील के घर चली जाती. कम्प्यूटर और मोबाइल मेरी जान है … प्रत्येक सॉफ्टवेयर की ऐसी-तैसी करना मेरी आदत बन गयी है. आंटी के कहने पर वो पीछे हट गई और आंटी ने हमें अंदर आने के लिए कह दिया.

मेरे लंड में पहले से ही कामरस निकल आया था इसलिए मुठ मारने अलग ही आनंद आ रहा था.

उसके बेहतरीन नर्म चुचे, मेरे सीने पर धंसने लगे और मेरा लौड़ा उसकी चूत के दबाव से दुखने लगा. पर तुरंत झड़ने के बाद जल्दी लंड खड़ा होता नहीं है, इसलिए मुझे वहां से बाहर जाना पड़ा. कभी कभी दिल करता कि मम्मी के बुब्बू तो दीदी से भी बड़े हैं, उन्हें चूस कर दबा कर कितना मज़ा आएगा.

उसने भी पूरी ताकत से अपनी टांगों को ऊपर से मेरे सर पर दबा दिया, जिससे मेरा मुँह उसकी रसीली चुत में फंस गया. काफी देर से मेरी बहू ऊषा मेरे लंड को पकड़ कर सहला रही थी इसलिए मेरी उत्तेजना पूरे उफान पर थी.

मेरी नजर नीचे झुकी हुई थी और मैंने देखा कि साहब के पजामे के अंदर कुछ उठा हुआ सा दिख रहा था. अभी कॉलेज शुरू होने में थोड़ा वक्त था लेकिन कोचिंग की क्लास शुरू हो गई थीं. मैंने पूरी ताकत से सुरेश को पकड़ लिया और हाथों टांगों से उसे जकड़ कर झटके देने लगी.

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उसने दीदी की चूत पर लंड को रखा और एक झटके में ही पूरा लंड उसकी चूत में फंसा दिया.

वो बाइक में मुझसे बिल्कुल सट कर बैठी थी, उसके हाथ मेरी बांहों में लिपटे हुए थे. एक रात उसने मुझे अपने कमरे में बुलाया तो …दोस्तो, मैं आपका अपना सागर छत्तीसगढ़ से!आप सबने मेरी कहानीदोस्त की बहन मुझे लव करती हैपढ़ी और मुझे अपने बहुमूल्य सुझाव दिए. एकता ने लिखा कि उसका मन है कि वह बारिश में खुले में निर्वस्त्र झूम झूम कर नहाए और फिर कहीं से कोई अजनबी आ जाए और उसके साथ बारिश में भीगते हुए संभोग करे.

मैं भाभी के रूम में गया और तुंरत ही उनकी साड़ी उठाकर पेंटी को नीचे करके उनको बेड पर पटक दिया और उनकी चुत को दनादन पेलने लगा. आंटी बोली- जब तक तुम्हारा खाने का इंतजाम नहीं होता तब तक तीन-चार दिन तक तुम हमारे यहां भी खाना खा सकते हो. इंडियन संभोगसुबह मैं तैयार हुआ और उसको किस करके दुबारा मिलने का वादा करके बाहर जाने लगा.

मिहिर को एक मिनट भी नहीं हुआ था कि उर्वशी ने अपनी बेसब्री दिखाते हुए मिहिर के मुंह को अपने हाथों से उठाते हुए उसके होंठों को जोर से चूस डाला. इसलिए आप कहानी को पढ़ते समय इस बात का ध्यान रखें कि यह गंदी कहानी मेरी नहीं है बल्कि मेरे दोस्त की है और उसी की जुबानी मैं इस घटना को बयां कर रहा हूं.

वो सिसकारियां ले रही थीं।अब मैं धीरे धीरे नीचे सरकते हुए उनकी चूत पे आ गया, भाभी की चूत एकदम चिकनी थी. मास्टर साहब का मस्त हथियार देख कर मेरी गांड में कीड़ा कुलबुलाने लगा. ढीली होने की वजह से निर्मला का शरीर भारी पड़ गया था, जिसकी वजह से राजशेखर पूरा जोर नहीं लगा पा रहा था.

सामने चाची के चूचों की दरार मुझे दिख रही थी और दूसरी तरफ चाची के कंधे पर लंड के छूने से मेरा बुरा हाल हो रहा था. मैंने भी उसके होंठों को खूब प्यार से चूमा और खुद को उससे अलग कर दिया. फिर उस चुदक्कड़ सेक्सी पंजाबन ने मेरे कच्छे को उतार दिया और मेरे तने हुए लौड़े को अपने हाथ में लेकर उसके टोपे को आगे पीछे करने लगी.

शाम को 6 बजे नींद खुली तो मैंने देखा कि मैं भाभी के बेड पर नंगा ही सोया हुआ था और भाभी भी कमरे में नहीं थी।उठ कर मैंने कपड़े पहने और फ्रेश होकर हॉल में गया और सोफे पर बैठ गया.

मैंने पूछा- क्यों … क्या हुआ माँ? सब ठीक तो है ना?माँ बोलीं- मुझे पता नहीं, तू जाकर पता कर लेना. मैं कराहती सिसकती अपने चूतड़ों को उछाल उछाल कर झड़ती रही और फिर धीरे धीरे शांत हो गयी.

उन्होंने एक पिंक कलर का लखनवी चिकन पहना था जिसमें उनके मोटे मखमली रबड़ी के समान 38 साइज के चूचे अपने होने का पूरा अहसास करा रहे थे. वो बिना देर किए मोनिषा आंटी को अपनी बांहों में उठा कर उनके बेडरूम में ले गया. एक्सीडेंट के बाद उसकी गाड़ी चलाने की कभी हिम्मत नहीं हुई, इसलिए मैं अक्सर सुनील को ही साथ लेकर बाजार जाती.

एक बार ऐसे ही बात करते करते भाभी ने मुझसे पूछ लिया कि आपकी कोई गर्लफ्रेंड है?मैंने कहा- नहीं है भाभी. श्वेता को इस बात से कोई परहेज नहीं था कि मैं किसी और को क्यों चोदता हूँ. मम्मी ने अपनी टांगें ऊपर हवा में उठा रखी थीं और लाला मम्मी की कमर से कमर मार रहा था.

ऑफिस बीएफ बाहर भाभी खड़ी थीं, वो तुरंत रूम में आ गईं और अन्दर से दरवाजा बंद कर दिया. अनिल से मामाजी ने कहा- जल्दी औंधा हो जा, नखरे नहीं।मामा जी के कहने से अनिल औंधा लेट गया.

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मैं करीबन 5 साल से एक वयस्क साइट की सदस्य हूँ और ये मैंने जाना कि कौमार्य अब कोई मायने नहीं रखता. लेकिन जैसे ही मैं अपनी कार लेकर आगे निकला, वैसे ही उसने मुझे आवाज़ लगाई. मेरी परफॉर्मेंस भी सुधर चुकी थी और मैं अब बैंक में कन्फर्म कर्मचारी बन चुका था.

एक महीना बाद उसने मुझे प्रपोज किया और मैंने भी हां कर दी, क्योंकि मैं हेमंत के लंड को चूत में लेना चाहती थी. मैं बोला- अगर मैं जबरदस्ती करने लगा तो?वो बोली- अच्छा जी, सीनाजोरी करोगे अपनी मामी के साथ?मैंने कहा- जी बिल्कुल, आपने पूरा हक दिया हुआ है मुझे. पंजाबी सेक्सी वीडियो एक्स एक्स एक्सयदि हम एक दूसरे की जरूरत पूरी करेंगे, तो शायद इससे हम दोनों भाई बहन का प्यार ही बढ़ेगा.

मामी ने पलट कर मुझे देखा लेकिन फिर मुझे केवल तौलिया में देख कर दोबारा से नजर घुमा ली.

उसके इन मदमस्त चूचियों को देख कर मेरे लंड से सब्र ही नहीं हो रहा था. मैंने नाश्ते के लिए उन्हें मना कर दिया तो उन्होंने कहा- डॉक्टर साहब रात को मैंने आपकी बात मानी … आप नाश्ता नहीं कर रहे हैं … ये ठीक नहीं है प्लीज़ ना न करें.

इस बार की चुदाई में सोनम की चुत तीन बार रस छोड़ चुकी थी … पर मेरा लंड अपना पानी निकालने का नाम तक नहीं ले रहा था. भाभी ने कहा- मैं भी बहुत खुश हूँ कि तुम जैसा साथी मुझे मिला, जिसने मुझे इतनी खुशी दी है. तो मैं तो निश्चिन्त था, कोई बेसब्री नहीं ज़ाहिर कर रहा था।उसकी चूत में पानी आ रहा था जो मुझे पार्लर में लगे आइनों में साफ़ दिख रहा था। उसकी चड्डी सामने से पूरी गीली हो गई थी और बंद कमरे में उसकी सुगंध भी आ रही थी.

मैंने बोला- रात हो गयी है और सुबह तुम्हें मेरे पति के आने से पहले जल्दी निकलना होगा और मुझे सब ठीक करना होगा.

फिर मैं उठा प्रमिला आंटी के बगल में लेट गया और उनके बूब्ज़ दबाने लगा।मैंने प्रमिला आंटी को कहा- आप खुश हैं अब?वो मेरे गालों पर हाथ फेरते हुए बोली- बहुत … बहुत ज्यादा खुश हूं। तुम्हें पता नहीं है कि तुमने मुझे कितनी खुशी दी है।हम दोनों ने एक दूसरे को बांहों में भर लिया। प्रमिला आंटी थोड़ी भावुक हो गयी थी और मेरी आँखों में देख कर रोने लग गयी. मैंने ओके कहते हुए चुदाई की पोजीशन बनाई और अपना लंड मैडम की चूत पर रख कर एक जोर का धक्का मार दिया. खैर इसी तरह करीब एक महीने तक हर शनिवार और रविवार वो हमारे घर आ जाता, कभी दिन या कभी रात में.

அத்தை மருமகன்पर नहाते हुए गर्दन, छाती को सहलाती, तो सुनील का स्पर्श याद आता और मेरी चूत गीली हो जाती. कुछ बूंदें उसके पेट से होते हुए कमर तक … और फिर कमर से होते हुए उसकी कमर से बंधी साड़ी में गायब हो जा रही थीं.

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अब मैंने सोचा कि अपने दिल की भड़ास निकाल लूं … पर ये मुझपे ही भारी पड़ गया. मैंने मज़ाक मज़ाक में उसको बोल दिया कि तुम मेरी गर्लफ़्रेंड बन जाओ … और मुझे प्रपोज़ कर दो. मैंने उससे आंख के इशारे से पूछा- क्या देख रहा है?उसने हाथ में चूची को पकड़ कर खाने के लिए मुँह बनाया और मैं हंस पड़ी.

मैं लगभग दस मिनट तक उसकी चुचियों को अपने हाथों व होंठों से दबाता रहा. फिर मैंने भाभी की ब्रा का हुक खोल दिया और उनके दोनों मम्मों को आजाद कर दिया. अब मेरे मुंह से एक शब्द भी नहीं निकल रहा था क्योंकि मेरी गांड बुरी तरह से फट चुकी थी कि अब तो मेरी नौकरी गयी ही समझो।उसके बाद मैं अपने घर चला आया और अगले दिन भी मैं स्कूल नहीं गया क्योंकि मेरी हालत बहुत खराब हो गयी थी डर के मारे।दूसरे दिन सुबह मेरे फोन की बेल बजी तो मैंने फोन उठा कर देखा कि हमारे प्रबन्धक जी का फोन था.

एक दिन मैं अपने लेपटॉप की करेप्ट हो चुकी हार्ड डिस्क से हिडन हुईं अश्लील फोटो को निकालने की कोशिश कर रहा था. मैंने गर्दन उठाकर देखा तो मेरा अंडरवियर साफ दिख रहा था और लोअर को मेरी जांघों पर लाकर छोड़ दिया गया था. ”मुझे कभी छोड़ कर नहीं जाओगे ना?”कभी नहीं मेरी रानी … जिंदगी भर तुम्हें ऐसे ही चोदता रहूंगा … जरा टांगें ऊपर करना.

फिर एकदम से मेरा कंट्रोल छूट गया और मैंने भाभी के मुंह को अपने माल से भर दिया. मम्मी के खड़े होते ही उसने मम्मी की दोनों टांगों के बीच अपने हाथ डालकर उन्हें एक फिट उठाकर दीवार के सहारे टिका दिया और उनको अपने हाथों से हवा में लटका कर अपना लंड फिर से मम्मी की चूत में घुसेड़ दिया.

तभी उसने एक जोर का धक्का मारा, मैं अभी तक ‘आह … ओह्ह …’ कर ही रही थी.

मैं उसके ऊपर ऐसे ही लेटा रहा और उसे किस करने लगा, ताकि वो नीचे का दर्द भूल जाए. देसी पोर्न सेक्सीछोटे शहरों और गांवों में आज भी ये प्रचलन है … मगर बड़े शहरों में ये अब छोटी बात है … और आजकल की फिल्मों में भी यही सब दिखाया जाता है. কানাডা বিএফउसकी गर्मी को देखते हुए मैंने उसकी चुचियों को कपड़ों के ऊपर से ही चूसना जारी रखा और उसकी गांड को दबाते हुए से अपने लंड का अहसास कराने लगा. फिर कुछ दिन बीत जाने के बाद मैं अपनी दीदी को लेने उसकी सुसराल गया और उसका भाई उसको भी ले आया.

फिर उसने भी मेरे जींस उतार दी और साथ ही मेरा अंडरवियर भी उतार दिया.

वो मेरी साड़ी मुझसे छीनने में सफल हो गया और मेरी बांहों को जकड़ कर मेरे गालों, गले और स्तनों के इर्द-गिर्द चूमने लगा. मैं उठ कर पोजीशन में आ गया और बुआ मेरे लंड को मुँह में लेकर चूसने लगीं. फिर वो खड़ी हुई और बोली- तुम बहुत सेक्सी हो … तुम्हारे पैक्स मुझे गीला कर रहे हैं … तुम प्लीज़ जल्दी से नहा लो.

उनको चुदाई का वो मजा दिया, जो उन्होंने अपनी जिंदगी में कभी नहीं लिया था. उसके बाद भी कई बार मौका पाकर मैंने उस सेक्सी औरत की प्यासी चूत को चोदा. मेरी मादक सिसकी और कामुक पुकार उसके कानों में पड़ते ही, वो किसी मशीन की भांति कमर चलाते हुए लिंग मेरी योनि में रगड़ने लगा.

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मिहिर अपना नियंत्रण खो बैठा और उसने ब्लाउज खोलने की जहमत नहीं उठाई बल्कि एक ही झटके में उर्वशी का ब्लाउज़ फाड़ दिया. तब भाभी एक पल के लिए चुप हो गईं, फिर बोलीं- मैं तो खुद भी यही चाहती थी … पर आपसे बोल नहीं पा रही थी. वो मेरे बालों की और मेरे होंठों की तारीफ करते करते मेरी चूचियों को देखते हुए रुक गया.

उसके बाद जब मैं खाना बना रही थी तो उसका मैसेज आया कि कुछ मीठा खाने के लिए लाता हूं तो मैंने बोल दिया कि ले आना.

रजनी, श्वेता की मौसी की बेटी मेरे साथ अठखेलियां कर रही थी, जिससे मैं गर्म हो गया था.

आज लिख रहा हूँ लेडीज किटी पार्टी में बढ़ती अश्लीलता पर!और यह अश्लीलता या नंगपना इस वजह से बढ़ती जा रही है कि मॉडर्न सेक्स में खुलेपन की पक्षधर लड़कियाँ ही अब गृहणी भी बन रही हैं. अब मैं सुरेश के बारे में बताती हूँ, सुरेश और मैं एक साथ ही स्कूल में पढ़े थे, वो मेरे ही गांव का था. સની લીયોની એક્સ વિડીયોउसकी इस बात को सुनकर मुझे कुछ अजीब सा लगा … पर मैं खुद ऐसे ही एक दौर से गुजर चुका था, इसलिए मैंने उसे ही अपना प्यार मान लिया.

मैंने उसे मुठ्ठी में भर कर 3 से 4 बार आगे पीछे हिलाया, तो चमड़ी पीछे होकर सुपारा खुल गया. विभोर और मैं जल्दी जल्दी सेक्स करने लगे और हम लोग का पानी निकल गया. ये कहते हुए उसने साइड की टेबल पर से लिक्विड चॉकलेट की बोतल उठाई और मेरे लंड पर टपकाते हुए लगा दी.

जहां राजशेखर को बदलाव की इच्छा थी, वहीं निर्मला संतुष्टि की अपेक्षा रखती थी. मगर यहां पर एक बात यह भी थी कि भाभी को नहीं पता था कि मैं उठ गया हूं.

तभी मैंने पूरा दम लगा कर धक्का देर दिया और मेरा लंड जड़ तक उसकी बुर में समा गया.

मामी की आवाज से पता लग रहा था कि वो लेटी हुई थी और अंगड़ाई ले रही थी. यह कहानी वैसे तो वास्तविक है लेकिन इस कहानी में मनोरंजन के लिए मैंने थोड़ा सा मसाला भी डाल दिया है ताकि आपको कहानी पढ़ने में मजा आये. उसके अलावा और किसी के कोई प्रॉब्लम्स नहीं पूछने रह गए थे, तो बाकी लड़कियां भी क्लास से बाहर चली गईं.

ससुर बहू की चुदाई दिखाइए वो मुझे जोश दिलाए जा रही थीं- उम्म्ह … अहह … हय … याह … पेलो राजा, मेरे सैयां, चोदो मेरे बलम, फाड़ दो मेरी चूत को राजा … आहहहह बेटा. फिर सुबह कुछ ऐसा हुआ कि हमने पूजा और उसकी बहन संध्या को उनके गांव छोड़ने जाना पड़ा.

घर में बताया तो घरवालों ने जाने के लिए हाँ कर दी। कुछ पैसे घरवालों ने दिए, कुछ मैंने जोड़ रखे थे और कुछ दोस्तों से उधार ले लिए ताकि पैसों की कोई कमी ना रहे. उसकी पैंट नीचे गिर गयी और उसका लंड उसके कच्छे में तना हुआ अलग ही दिखाई दे रहा था. मुझे वो भाभी शुरू से ही बहुत अच्छी लगती थीं, मैं हमेशा उनको घूरता रहता था और कुछ ना कुछ करके उनको छूने की कोशिश करता रहता था.

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वो धीरे धीरे मेरा साथ देने भी लगीं मगर कभी कभी मुझे रोकने का प्रयास भी करती रहीं. मेरे चूचों को जोर से अपने हाथों में दबाते हुए उनको मुंह में लेकर पीने लगे. टीचर ने कहा- क्या मैं तुम्हें मस्त भरा हुआ माल लग रही हूं?मेरी कुछ समझ में नहीं आया.

पर तुरंत झड़ने के बाद जल्दी लंड खड़ा होता नहीं है, इसलिए मुझे वहां से बाहर जाना पड़ा. चलते हुए वो इतनी सेक्सी लग रही थी कि मन कर रहा था कि इसकी गांड को पकड़ कर दबा ही दूं.

अब मम्मी ने मुँह खोलकर उसके लंड को मुँह में ले लिया और उसके लंड को चूसने लगीं.

मैंने लंड का सुपारा चाची की चूत की फांकों में लगाया और एक ही झटके में अपना 8 इंच का लंड अन्दर डाल दिया. उधर बैठ कर उससे बहुत अधिक बात तो नहीं हो पा रही थी … क्योंकि और भी लोग बैठे थे. सुशी- हेल्लो!मैं- हाँ बोलो सुशी जी?सुशी- आ रहे हो क्या?मैं बोला- हाँ आ रहा हूँ … लेकिन आना किस तरफ से है?सुशी बोली- सामने वाले दरवाजे से … मैं दरवाजे के पास खड़ी हूँ।मैं बोला- ठीक है।मैं डरे सहमे 11 बजे के बाद उसके घर के पास पहुँचा और इधर उधर को देखने लगा कि कोई है तो नहीं.

वो आपको चोदने के सपने देखता है और मैं भी चाहता हूं कि मेरे सामने आपको कोई चोदे. मैंने पूछा- कैसे?उसने मेरा हाथ पकड़ा और अपनी फुद्दी पर रखा और मुझे बताया कि कैसे. एक हमारे यहां की एक आंटी, जो कि थोड़ी पढ़ी लिखी कम थीं, उनके साथ मेरे संबंध थे.

राजशेखर मजे से भर गया और कामुकता के साथ उसके चूतड़ों को, तो कभी स्तनों को मसलने लगा.

ऑफिस बीएफ: मेरा लौड़ा नंगा हो गया और मैंने अपने तपते लंड पर सोनू का हाथ रखवा दिया. ये कहते हुए मुझे बहुत दुख हो रहा है क्योंकि मैं इससे बहुत प्यार करता हूँ, पर किस्मत के आगे क्या कर सकते हैं.

उसके लॉन्ग कट वाले अन्डवियर में उसके लंड ने झटके दे देकर उसको आगे से गीला कर रखा था. कुछ ही देर में सब नंगी हसीनाएं मंगल के नंगे जिस्म पर टूट पड़ी, उसे जगह-जगह चूमने लगी, किस करने लगी, काटने लगी और प्रीति जो कपड़े खोलने में शर्मा रही थी अब बेशर्म बनती हुई अपनी चूत को मंगल की जाँघों पर रगड़ने लगी. मैं सीधा होकर लेटा था और विद्या मेरे ऊपर आकर मेरे सीने पर सिर रख कर लेट गई थी.

वो बोली- फिर इतनी रात को किसकी याद में खोए हुए हो?मैंने कहा- सच कह दूं.

कोई 25 मिनट मोनिषा आंटी की खूब चुदाई करने के बाद मोनिषा आंटी की चूत ने दो बार रस छोड़ा, मैंने भी अपने लंड का रस मोनिषा आंटी की चूत में ही छोड़ दिया. मैं सेक्स करने को तैयार भी थी फिर भी मुझसे जब तक हो रहा था मैं विरोध करती रही. मैंने कहा- माँ जैसी हो … माँ तो नहीं हो ना …बस मैं अपने काम में लग गया.