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ब्लड के और दिन में आपने उसकी सलवार भी देखी ही थी।आपी ने मेरी गुद्दी पर एक चपत रसीद की और कहा- मेनसिस तो उससे 3 साल पहले से हो रहे हैं. सेक्सी जापान कीआपी ने मेरी ठोड़ी को अपने हाथ से ऊपर उठाया और मुहब्बत भरे अंदाज़ में कहा- सगीर.

मगर घर से बार-बार फोन आने के कारण मुझे उसे मना करना पड़ा।मैंने कमरे का बिल पे किया और उसे उसके स्टॉप तक छोड़ने आया।उसने मुझसे कहा- यह मेरी सबसे अच्छी चुदाई थी. नंगी सेक्सी पिक्चर दिखाएं वीडियो मेंतो उसने मना किया और पैसे वापस लौटा दिए और बोली- मैं इसके लिए यहाँ नहीं आई थी। वरना ये देने वालों की यहाँ पर क्या कमी है।मैंने उससे फिर आने का वादा किया।दो दिन बाद उसने फिर कॉल किया और मेरे होटल पर आई।मेरी उन्नीस दिन की ट्रिप में हमने कुल 5 बार मजे किए।जब आख़िरी बार मिले.

क्योंकि भाभी की नाईटी के बटन खुले हुए थे और ब्रा भी ऊपर हो रखी थी। मेरा हाथ भाभी के अधनंगे नर्म मुलायम उरोजों को छू रहा था।भाभी के रेशमी उरोजों के स्पर्श ने मुझे पागल सा कर दिया। मुझे डर तो लग रहा था मगर फ़िर भी मैं भाभी के उरोजों पर हाथ को धीरे-धीरे फ़िराने लगा। काफ़ी देर तक मैं ऐसे ही भाभी के उरोजों को सहलाता रहा.चलने वाला सेक्सी बीएफ: मुझे देर हो रही है।मैंने जल्दी से भाभी को नीचे घुटने के बल बैठा दिया और लण्ड को नेहा को चूसने को कहा.

जिससे भी मुझे बड़ा सुख मिल रहा था और मेरे लिंग ने पानी छोड़-छोड़ कर भाभी के पूरे योनि क्षेत्र को गीला कर दिया था। क्योंकि मेरा शरीर भाभी के नर्म मुलायम व गर्म शरीर का स्पर्श पा रहा था और मेरा लिंग भाभी की आग की तरह धधकती योनि पर रगड़ खा रहा था।मेरा लिंग भाभी की योनि पर तो था.मुँह और दूधिया छातियों को भिगो गया। कुछ वीर्य मेरे मुँह में भी चला गया।नमकीन सा स्वाद अज़ीब था.

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तब मैं सब कुछ बताऊँगी।मैंने बोला- डरो नहीं मैं तुम्हारा सच्चा दोस्त हूँ।उसने बोला- हाँ मेरा एक ब्वॉयफ्रेंड है.माधुरी ने एक बार मेरी तरफ देखा और फिर से कॉफी बनाने में लग गई।तभी पीछे से मैंने उसको हग कर लिया और अपने गर्म होंठ उसकी गर्दन पर रगड़ने लगा।माधुरी- आह राहुल.

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आज इनको ढीला कर दो।मैं भी पूरे जोश से मम्मों को दबाते हुए चूसने लगा।भाभी की रसीली रंगीली चूत पानी-पानी हो गई थी, आनन्द का रस बहता जा रहा था, भाभी की उत्तेजना चरम पर पहुँचने लगी।भाभी बोलने लगीं- आज आपने मुझे जीवन के सर्वोच्च आनन्द से परिचय कराया.

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तब मैंने आपको प्रॉमिस किया था कि पहला बच्चा आपका ही होगा।यह कह कर उसने मुझे गले लगा लिया।मैं बहुत खुश हुआ. क्या सॉफ्ट थे एकदम रुई के गोले।मैंने एक चूचे को मुँह में भर लिया और एक को हाथ से दबाने लगा। चूचे दबाते-दबाते मेरा हाथ अपने आप नीचे होता गया. तो उसके लाजवाब जिस्म को देख कर अपने हाथ से अपना माल निकाल देता था।तो दोस्तो, मैंने उठने का बहाना किया और ऐसा नाटक किया कि जैसे मैंने उसको देखा ही नहीं है और मैं कम्बल हटा कर बिस्तर से नीचे खड़ा हो गया।मैंने सिर्फ़ बॉक्सर पहने था और उसकी मस्त चूचियाँ देख कर मेरा लण्ड पहले से ही खड़ा हो गया था। मैंने उसको देख कर चौंकने का नाटक किया और बोला- अरे तुम यहाँ?पर वो कुछ नहीं बोली.

एकदम मत करो।मैंने लण्ड पीछे को खींचा और फिर अन्दर किया और वहीं आहिस्ता-आहिस्ता धक्के लगाने लगा।आपी को दर्द हो रहा था. ’ की आवाज़ से पेशाब कर रही थी और साथ ही मैं भी अपनी जीभ से उसकी चूत से निकल रहे पेशाब को चाट रहा था।हम दोनों को बहुत ज्यादा मज़ा आ रहा था।जैसे ही वो पेशाब करके उठने लगी. और वे मेरे सिर को वापस नीचे दबाने लगीं।मैंने अपने सिर को अकड़ा कर नीचे होने से रोका और कहा- चलो ना आपी.

मेरा आधा लौड़ा भाभी की चूत में घुस गया।भाभी जोर-जोर से चिल्लाने लगीं- आह्ह. बस खुल के रंडी की तरह चुदवाओ।’‘मुझे क्या पता रंडियां कैसे चुदवाती हैं?’‘मौसी रंडियां चुदवाते वक़्त कोई शरम नहीं करतीं और ना ही अपनी ज़ुबान पर काबू रखती हैं. वहाँ का हिस्सा लाल हो जाता था।शायद उत्तेजना में या फिर मेरी बात मान कर वो पहली बार मेरा लण्ड अपने हाथों में ले कर सहलाने लगी।ओह माय गॉड.

लेकिन जब चाची मुस्कुरा कर बोलीं- क्या मज़बूरी है?तब मेरा पूरा डर निकल गया, मैंने कहा- चाची कोई गर्लफ्रेंड नहीं है मेरी. सुन मेरा नाम सुमेर है और मेरे कहने पर ही ये तुझे यहाँ लाए हैं। तेरी पिछली बार की चुदाई इसने मुझे बताई थी.

अगर आपको अच्छा लगे तो कल रात को मैं अपनी कम्पनी की मीटिंग पर जा रहा हूँ और दो दिन के लिए मुझे चंडीगढ़ में ही रुकना होगा। अब तुम्हारी जॉब लग चुकी है.

एक-दूसरे को जहाँ-तहाँ चूमने लगे।किस करने के बाद मैंने उसको लिटा दिया और उसकी दोनों चूचियों के बीच में लण्ड डालने लगा।जब चूचियों को चीरता हुआ लण्ड उसके मुँह तक पहुँचता.

जैसे आपी चूस रही थीं।कुछ देर तक इसी तरह आपी मेरा लंड चूसती रहीं और फिर जब भी आपी लंड को अपने मुँह के अन्दर धकेलतीं. मगर वो जबरदस्ती उसे अपनी चूत में डालकर ऊपर-नीचे होने लगी।दर्द से उसकी चीखें और आँखों से आंसू निकलने लगे. मैं चुपचाप सिर झुकाए खड़ा था कि दोबारा अम्मी की आवाज़ आई- अब जा ना बेटा.

उसकी 34 इन्च की चूचियां 28 इंच की बलखाती कमर और 36 इंच की उठी हुई गाण्ड थी। उसकी इस कमनीय काया को देखकर किसी का भी लंड ‘छू. वो मुझे देखती ही रह गई।बोली- तुम ऐसा क्यों सोच रहे हो?मैंने बोला- उसमें सोचना क्या. तो कभी थोड़ा ऊपर उठ जाते थे।मैं समझ गया कि आज मेरा बचना नामुमकिन है।उसी वक्त एक हल्का आंधी का झोंका आया.

लेकिन थोड़ा ही दर्द होगा।मैं धक्का लगाते हुए उसे चुम्बन करता गया और उसका दर्द कम होता गया, उसे मज़ा आने लगा और हम दोनों चुदाई का आनन्द लूटने लगे।थोड़े से धक्कों में ही वो झड़ गई।मैंने कहा- मैं भी झड़ने वाला हूँ.

मैंने तेज-तेज 6-7 झटके ही मारे थे कि आपी की आवाज़ जैसे मुझे हवस में वापस ले आईं और मैं एकदम ठहर सा गया. यह सुनकर तो जैसे मैं अचरज में पड़ गया।भाभी ने कहा- मैं जानती हूँ कि तेरी मुझ पर नज़र है और तू क्या चाहता है।वो भी वही चाहती थीं. हमारी आहें सारे खंडहर में सुनाई दे रही थीं।अब उसने मेरे चूचे अपने मुंह में ले लिये.

’ की आवाजें कर रही थी।इतने में पीछे से भागते हुए रोहन की आवाज आई- मम्मी मम्मी. तो मेरी भाभी और भी सेक्सी लगने लगीं।वो जब भी अपने बेटे को अपना दूध पिलातीं. मैंने आपी के दोनों निप्पल अपनी चुटकियों में पकड़ कर मसले और आपी की गर्दन से होंठ हटा कर कहा- मेरी सोहनी बहना जी.

साफ़ ज़ाहिर था कि काम-क्रीड़ा के चरम पर वो राजू से पहले पहुँचना चाहती थी। राजू अभी भी रश्मि की ओर ही देख रहा था और उसकी आँखों में एक ढिठाई थी।यह बात रश्मि को नाग़वार ग़ुज़री.

इस सब में हम दोनों को बहुत मज़ा आया था।यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !आखिर हम दोनों एक-दूसरे से अलग-अलग हुए और फिर एक साथ नहाए।नहाने के बाद हम दोनों फिर बिस्तर पर आए और अर्श मेरी बाँहों में थी।अर्श से मैंने पूछा- तुझे कैसे महसूस हुआ और कितना मज़ा आया?तो अर्श ने बताया- मुझे लण्ड का रस पीना अच्छा लगता है. एक तो तुम इतनी जल्दी मुँह बना लेते हो?मैंने आपी की बात का कोई जवाब नहीं दिया और उनकी आँखों में ही देखता रहा।आपी ने मेरी शर्ट का सबसे ऊपर वाला बटन खुला देखा तो उसको बंद करते हुए बोलीं- यार सगीर.

चलने वाला सेक्सी बीएफ तो मैंने अपने पूरे लण्ड पर थूक लगाया और फिर थोड़ी देर घिसा। मेरे लण्ड का पानी निकलने का नाम नहीं ले रहा था। मैंने उनकी जाँघों के बीच हाथ घुसाने की कोशिश की. तो वो अपने हाथों से बिस्तर को कस कर पकड़ने लगी।और जब मैंने धीरे-धीरे उसकी पैन्टी के ऊपर उंगली घुमाई.

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तो मैंने उसे वापस चूत का दाना चूसने का इशारा किया और उदास सा चेहरा लिए हार मान कर आपी से कहा- अच्छा छोड़ें इसको.

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तो मैंने अपने लैपटॉप को अपनी बर्थ पर रख दिया और उसे चार्ज में लगा दिया। वो सभी लोग मुझसे भी साथ में खाने के लिए जिद करने लगे।मैंने उनका दिल रखने को थोड़ा खा लिया।थोड़ी देर में सभी खा चुके थे, खाने के बाद बच्चे फिर से मूवी देखने को जिद करने लगे।भाभी को नींद आ रही थी. बताना जरूर।भाभी के बाद मैंने न जाने कितनी और भाभी और लड़कियों को चोदा। सच में चूत चोदने में जो मजा आता है वो किसी चीज में नहीं आता है।मेरा ईमेल है।[emailprotected]. मैं आपकी मलाई बेकार नहीं होने देना चाहती। अगर दिखाने के लिए बाहर निकलोगे तो मेरे बच्चेदानी में बीज कैसे रख पाओगे.

मानो राजू उसके साथ ज़बरदस्ती कर रहा हो। लेकिन राजू पर उसके चिल्लाने. तो मैंने इस बार कुछ ज़्यादा ही ज़ोर लगा दिया।वो दर्द से तड़फते हुए जोर-जोर से चीखने लगीं- मम्मी. क्योंकि एक ही रात में मैं उसको ज्यादा दर्द नहीं दे सकता था।इस बार मैं तीन चौथाई लण्ड ही घुसा पाया था.

मामी ने भी ‘हैलो’ कहा। हम दोनों ने हैण्डशेक किए और मैं घर में अन्दर आ गया।घर में उस वक्त कोई नहीं था.

जो रास्ते भर मैं सोचता या देखता आया।घर में घुस कर दरवाजा बंद करके माधुरी सीधी टॉयलेट चली गई और मैं वहीं सोफे में बैठ कर टीवी देखने लगा। तभी माधुरी आई और मेरे बगल में बैठ गई।उसने पूछा- कॉफी?मैं- हाँ. तो मैं उनको स्माइल दे देता, वो भी कभी-कभी हँस देती थीं।ताऊजी की वजह से भाभी थोड़ा पीछे बैठी थीं और ज्यादा बात नहीं कर रही थीं।थोड़ी देर बाद ताऊजी सोने चले गए और मैं भैया. वैसे उम्र क्या है तुम्हारी?मैं- एक्सपीरियेन्स तो नहीं है लेकिन खुद पर ट्रस्ट है। मेरी उम्र 24 है और आपकी?जबाव में उसने अपनी पिक भेज दी और मुझसे उम्र का अंदाजा लगाने को कहा।मैं- वाउ.

तो वो सुख मैं तुमसे लूँगी।उनके यह कहते ही मैंने उनके अन्दर अपना वीर्य निकाल दिया।वो ‘उईईई. बहुत सेक्सी बातें करती है।पहले तो मैंने बोला- यार कौन फोन में पैसे बर्बाद करे।मेरे दोस्त ने बोला- जैसी तेरी मरजी।फिर भी उसने मेरे को नंबर दे दिया और मैंने मोबाइल में स्टोर कर लिया।उस लड़की का नाम अंजलि था।उस रात को अकेले बैठा था. तो मैं और ज़ोर से सहलाने लगा।थोड़ी देर बाद चाची की मुँह से आवाज़ आने लगी.

वो सब करते हुए एक बार फिर हम दोनों ने सम्भोग की पराकाष्ठा को पा लिया और बेसुध से एक-दूसरे की बाँहों सो गए।फिर 4 बजे मेरी आँख खुली. उतना ही वो कम दर्द महसूस करेगी।मेरा लण्ड पूरी तरह से और भी गीला हो चुका था चूत के रस से.

अब आपी क्या करने वाली थीं मुझे देखना था।आपके ईमेल के इन्तजार मेंहूँ।वाकिया जारी है।[emailprotected]. और मैं ऐसे ही लेटा रहा। मुझे डर लग रहा था कि कहीं भाभी मेरी शिकायत मम्मी पापा से ना कर दें। यही सोचते-सोचते पता नहीं कब मुझे नींद आ गई।दिन के करीब बारह बजे भाभी ने मुझे जगाया और कहा- अब क्या सारा दिन ही सोते रहोगे? रात को तो ना तुम खुद सोते हो और ना ही मुझे सोने देते हो।तभी मुझे रात की घटना याद आने लगी. तो उन्होंने अपने हाथों से मेरे दोनों हाथ ऊपर करके मुझे पकड़ लिया और मुझे बहुत जोर से चुम्मा किया।अब वे अपनी जुबान मेरे मुँह के अन्दर ले गए ताकि मेरा मुँह पूरा ब्लाक हो जाए।इसी बीच उनका पूरा लण्ड धीरे से मेरी गांड के अन्दर आ चुका था। मुझे पता भी नहीं चला.

अपने मुँह में लेकर चूस रहा था।उसकी सीत्कार तेज और तेज होती जा रही थी, मैं उसे जोर-जोर से चोद रहा था, पूरे कमरे में ‘पच्च-पच्च’ की आवाज़ आ रही थी।दो-तीन मिनट में ही वो अपनी टांगें मेरी कमर से लपेट कर बदन को अकड़ाने लगी।बोली- बहुत ही अच्छा लग रहा है.

और रात का इंतज़ार करने लगा।उस रात के लिए अपने रूम मेट को एक दोस्त के कमरे पर भेज दिया।भाभी के साथ चुदाई की सोच कर मैंने एक बार उनके नाम पर मुट्ठ भी मार ली।रात 11 बजे बड़े भाई आ गए और 12 बजे तक उनके घर में अँधेरा हो गया मतलब सब लोग सो चुके थे।छोटी भाभी अकेली थी. रुक क्यों गया।मैंने आपी के इशारे पर कोई रद-ए-अमल नहीं ज़ाहिर किया और उनकी आँखों में आँखें डाले हुए ही नाक के जरिए एक और सांस ली और अपने टूटते नशे को सहारा दिया।आपी ने एक बार फिर मुझे आगे बढ़ने का इशारा किया और कहा- सगीर प्लीज़ अब और ना तड़फाओ. पजामे के उतरने का इन्तजार कर रहा था, मेरी शक्ल से ही बहुत बेताबी ज़ाहिर हो रही थी।जब काफ़ी देर बाद भी आपी ने पजामा नीचे ना किया.

मैं तुम्हारी गाण्ड की गर्म पानी से सिकाई कर देता हूँ।यह सुनकर वो धीरे से हँसी और आगे बढ़ मेरे होंठों को चूम लिया।चाची अब फिर उल्टी लेट गईं और मैंने गर्म पानी से उनकी गाण्ड को रूई के साथ हल्के हाथों से सेकने लगा।करीब दस मिनट के बाद मैंने सिकाई बंद कर दी और पूछा- अब कैसा लग रहा है?वो बोलीं- हाँ. रंग गेहुंआ है। मेरी उम्र 23 साल है।मेरे दोस्तों का कहना है कि मैं दिखने मैं बहुत स्मार्ट हूँ।मैं आपके साथ अपनी लाइफ का पहला अनुभव शेयर करने जा रहा हूँ.

उसे पूरा करने आई हूँ।मैं उसकी बात बिल्कुल नहीं समझ पा रहा था, मैं थोड़ा नाराज़ सा हुआ. कोई देख लेगा तो क्या कहेगा।मैं बोला- भाभी-देवर की तो चलती रहती है।इस वक्त उनके घर पर कोई नहीं था।मोना- तुम्हें मालूम है कि मैं दवा किस चीज़ की लेने जाती हूँ?मैंने कहा- नहीं. मैं खुद को कम्फर्टेबल महसूस नहीं कर रहा था। माधुरी लाल और पीले कलर की डिजायनर साड़ी में थी और उसने एक डीप गले के ब्लाउज़ पहना था जिसमें वो काफी खूबसूरत और सेक्सी दिख रही थी। उसकी चूचियां तनी हुई और माँसल दिख रही थीं.

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15 को मेरे अच्छे दोस्त राज, सुमित, जैक आदि सब आ चुके थे। धीरे-धीरे 18 लोग जमा हो गए और अब मैं नेहा और करण को बुलाने के लिए गया।मैं जैसे ही कमरे में घुसा.

मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ। मैं पहली बार कोई घटना लिख रहा हूँ।मैं अपने गांव से जयपुर अपने रिश्तेदार को पहुँचाने के लिए गया था। हम यहाँ से तकरीबन 11. मैं वहीं आपी के पास रुक गया।आपी ने किचन की चीजें संभालीं और कुछ बर्तन धो कर मुझसे बोलीं- चलो बाहर चल कर बैठते हैं।मेरा हाथ पकड़ कर वे मुझे बाहर टीवी लाउन्ज में ले आईं और हम दोनों सोफे पर बैठ गए।आपी ने मुझसे कहा- सगीर, तुम कॉलेज भी जाया करो. तुम्हारे अंकल का तो छोटा सा है।अब मेर लण्ड दुबारा खड़ा हो गया।आंटी के मम्मे अभी भी दिख रहे थे।आंटी ने मुझसे कहा- तुम्हारा तो फ़िर खड़ा हो गया।मैंने आंटी के मम्मों की तरफ़ इशारा किया।आंटी ने कहा- अच्छा तो यह बात है.

फिर चूत मारूँगा।मगर उसकी चूत में आग लगी हुई थी तो वो बोली- पहले बुर में लंड डाल कर चोदो. तुम एक बार बाहर जाओ मुझे कपड़े बदलने हैं।मैंने मजाक में कह दिया- ऐसे ही बदल लो ना. देवर भाभी की सेक्सी ब्लू हिंदी मेंउससे मुझे एक पल भी ऐसा नहीं लगा कि तूने मुझे सेक्स के इंटेन्शन से किया हो मुझे यूज किया हो.

पर मैंने चादर हटा कर उसको बाँहों में उठा लिया।आज ऊपरी तौर पर मैंने पायल के साथ सब कुछ कर लिया था और वो मेरे साथ सब कुछ अपनी ख़ुशी से कर रही थी।अब देखना यह था कि कि वो मुझसे चुदती कब है।मेरे साथ अन्तर्वासना से जुड़े रहिये. रूको मैं पानी ले कर आता हूँ।मैं उठने लगा तो आपी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे रोक कर बोलीं- सगीर तुमने खुद तो कहा था कि मैं आपको अपने प्यार में पागल कर देना चाहता हूँ.

और जोर से और प्यार से इस निगोड़ी को खूब चूसो।तब तक वे अपने ब्लाउज के पूरे बटन खोल चुकी थीं। मैंने भी अपने दोनों हाथ उनके मोटे-मोटे मम्मों पर जमाए और रसीली फांकों को चूसने लगा।वे अपने हाथ पैर इधर-उधर फेंकने लगीं।मेरे लण्ड देवता भी इस क्रिया के दौरान गीले हो चुके थे और राकेट की शक्ल ले चुके थे।जब मैंने अपनी जुबान चूत के छेद में डाली. ’ आपी ने अम्मी को जवाब देकर किचन की तरफ जाते हो मुझे देखा।मैंने भी आपी को देखा और गुस्से में मुँह बना कर नज़र फेर लीं।इस एक नज़र ने ही मुझे आपी में आज एक खास लेकिन बहुत प्यारी तब्दीली दिखा दी थी. पर मैंने कुछ कहा नहीं और स्वीकृति दे दी।शनिवार और रविवार को बहुत ज्यादा बिजी रहा और रह-रह कर सुनीता पर गुस्सा भी आता रहा.

और मेरा घर बड़ा था। मेरे घर में किराए पर एक बंगाली परिवार रहता था। उनके परिवार में तीन लोग थे। भैया भाभी और उनका एक 5 साल का लड़का।भाभी की उम्र कोई ज्यादा नहीं थी. साथ में वो चारों भी थे।तब एक ने कहा- अरे यार यहाँ कैसे चोदूँ तुझे?ऐसा बोलते हुए एक ने मेरे मम्मों को दबाना चालू कर दिया। मैं उन चारों के बीच में थी. वो भी उसी स्पीड से मेरे लण्ड को हिलाने लगी।दोनों ही चरम पर थे और कुछ ही पल में दोनों ने एक साथ जोर से ‘ओह्ह्ह.

दिल करता है कि बस दबाते ही रहें और उसमें से निकलते दूध को पीते ही रहें।भारती भाभी हँसकर बोलीं- हाँ वो तो है सभी मर्दों को औरतों में वही सबसे ज्यादा पसंद आता है। वैसे क्या तुमने रूपा का दूध पिया?मैं- हाँ.

अब हम दोनों एक-दूसरे के सामने थे, मैंने उनके गाल पर धीरे से चूमा।उन्होंने मुझे धीरे से हटाने की कोशिश की. उन्होंने पहले मेरी शर्ट को फिर पैंट के बेल्ट को सेक्सी अन्दाज़ में निकाला और मुझे बिल्कुल नंगा कर दिया। अब हम दोनों एक-दूसरे के सामने बिल्कुल नंगे थे।दीदी- तुम्हारा तो ज्यादा बड़ा नहीं है।मैं- मेरा बड़ा नहीं है.

उन्होंने अपने हाथ में एक पैकेट पकड़ा हुआ था जो वहाँ ही मेज पर रखा।हमने उन्हें सलाम किया और वो अपने कमरे में चले गए।मैं चाय खत्म करके वहाँ ही बैठा रहा।कुछ देर बाद अब्बू बाहर निकले और सोफे पर बैठते हुए कहा- रूही बेटा, मेरे लिए भी चाय ले आओ।‘जी अब्बू अभी लाई. जब मैं एक प्रतियोगी परीक्षा के लिए नोएडा गया हुआ था। परीक्षा अगले दिन थी. तो फिर शुरू हो गया ना इन्हीं चूत चकारियों में?‘भाई इतने दिन हो गए हैं.

और एक बात बोलो कि क्या तुम अभी भी उस लड़के से प्यार करती हो?तो उसने बोला- हाँ. क्योंकि मैं भी बहुत तड़प रहा था।फ़िर मैंने उसे हर जगह चूमना शुरू किया, उसके होंठ चूस डाले. हाथ रगड़ने लगा।‘चूत पे?’ रश्मि पूछे बिना नहीं रह सकी।शब्बो ने आश्चर्य से उसकी ओर देखा। शायद वो रश्मि से ‘चूत’ जैसा शब्द बोलने की आशा नहीं कर रही थी.

चलने वाला सेक्सी बीएफ ’वो पागलों की तरह बस मेरी भट्टी खोदे जा रहा था। मैं एक बार झड़ भी गई थी. जब ‘लेना’ होगा तो मांग लूँगी।मैं आश्चर्य से पूछा- क्या मांग लूँगी?सहेली- ‘थैंक्स’ मांग लूँगी.

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इतनी दहकती हुई आग थी वो।उसकी और मेरी बहुत बनती थी, वो भी मेरे घर खेलने के लिए आ जाती थी।वो लोग ग्राउंड फ्लोर पर रहते थे और और दूसरे फ्लोर पर हम लोग रहते थे। मेरा छोटा भाई अभी छोटे स्कूल में पढ़ता था, उसका नाम साहिल है, उसके चक्कर में ही हम सबको लूडो वगैरह जैसे गेम्स खेलने पड़ते थे।आयशा भी हमारे साथ ही खेलती थी, हम लोग आपस में खेलते थे. और ऊपर से मौसम भी इतना सुहावना हो रहा था, अब तो मुझे भी कुछ होने लगा था।मैंने भी भैया को अपनी बाँहों में भर लिया. ’ अब्बू ने ये कहा और चाय का खाली कप टेबल पर रखते हुए उठ खड़े हुए।‘रूही बेटा मेरा सूट निकाल दो कोई.

इसीलिए मेरा उसे प्यार करने का मन हुआ।मैंने अपने होंठ उसकी गुलाब के फूल की पंखुड़ी जैसी चूत पर रख दिए और अपनी जीभ से उसे प्यार से चूमने-चाटने लगा।मैं अपनी जीभ उसकी चूत में सरकाने की कोशिश करने लगा. कुछ अच्छे रोमांटिक गिफ्ट लिए।चूंकि गर्मी थी सो अगली मुलाक़ात के लिए मैंने जीन्स और टी-शर्ट पहनना उचित समझा।मैं उसे पिक करने मेट्रो स्टेशन गया।वो एक शानदार सूट पहन कर आई थी, अपने साथ वो कुछ और भी कपड़े लेकर आई थी।मैंने पूछा- ये सब क्या है?उसने मुस्कुराते हुए बताया- कुछ नाईटी. नेपाली में सेक्सी दिखाएंतो वहाँ बेडरूम के छज्जे से सुन्दर दृश्य दिखता था।एक दिन दोपहर को मैंने सोचा टेरेस में घूम कर आऊँ.

पर मैं ऐसा नहीं हूँ और आज के बाद में फिर कभी तुमसे इस बारे में बात नहीं करूँगा।इतने में इंटरवल हो गया.

आज तो जी भरके आपकी चुदाई करूँगा।मैंने हँसते हुए उसे अपने पास खींचा और उसके होंठों पर एक जोरदार चुम्मी दी। फिर मैंने उससे बोला- तू अभी तैयार हो जा. मेरा लंड धीरे-धीरे चुत के लिए कड़क हो गया और मैंने चढ़ कर चुत के अन्दर घुसेड़ दिया।लौड़ा चुत की गहराई में समाते ही मैंने धक्के मारने शुरू कर दिए। इस बार मैं उन्हें काफी देर तक चोदता रहा.

आजकल तो बहुत से तरीके हैं इलाज के शहरों में, तो तुम वो क्यों नहीं आजमा लेती. तो वो उठ गई, बोली- आपके वापस जाने के बाद मुझे माइग्रेन (सर दर्द की बीमारी) उठा था. ’ निकल पड़ी।इसके साथ ही मैंने अपनी एक उंगली उनकी चुत में डाल दी। वो अपनी गांड को ऊपर-नीचे उछालने लगीं और मेरे बालों को पकड़ कर अपनी चुत पर दबाने लगीं।मैंने उनको इसी तरह से बहुत देर तक तड़पाया। इसके बाद मैंने अपनी जीभ से उनकी चुत को चोदना शुरू किया।उनकी चुत में से नमकीन सा रस निकल रहा था.

पर मैंने उसे जबरदस्ती खिला दी।फिर उसने भी एक पीस उठा कर मुझे खिलाया।तभी प्रीति बोली- मेरा गिफ्ट?मैं- गिफ्ट?प्रीति- मेरे लिए क्या गिफ्ट लाए हो.

तो इसका मतलब होता है कि चूत मिलने की सम्भावना ज्यादा है।भावना को शाम को फोन किया और उसने दूसरे दिन सुबह मुझे अपनी बुआ के घर से दूर बुलाया। जब मैं वहाँ गया तो देखा कि उसके साथ और एक लड़की भी थी।भावना ने मुझे बताया कि वो उसकी बुआ की बेटी है. उसकी शादी इस साल होने वाली है। लेकिन हमारा ये प्रोग्राम चलता ही रहता है और आगे भी चलेगा।दोस्तो, बताना कैसी लगी मेरी आपबीती।[emailprotected]. दोस्तो, मैं शशांक अग्रवाल 6’4″ का हट्टा-कट्टा लौंडा हूँ। आज मैं आप लोगों को अपनी पहली चुदाई सुनाने जा रहा हूँ जो कि एक इत्तेफाकन ही हुई थी।बात उन दिनों की है.

इंडियन सेक्सी videosतो मैंने लण्ड को उससे अच्छी तरह से गीला करवा दिया और उसको बिस्तर पर आधा लिटा दिया।अब मैं बिस्तर के कोने पर आ गया और उसकी टाँगों को अपने कंधों पर रख लिया। उसकी चूत का छेद और मेरे लण्ड का टोपा. हम दोनों ही एक दूसरे के साथ को मज़े कर रहे थे, लेकिन एक दिन मैंने जब उसको फोन करना चाहा तो उसका फोन बंद आ रहा था।मैंने अगले दिन किया तब भी बंद आ रहा था, मैंने सोचा कहीं फोन खराब हो गया होगा, इसलिए बंद है।लेकिन उसके बाद तो मैं वो नंबर जब भी लगाता वो हमेशा बंद ही सुनाई देता।3-4 महीने बीत गए उसका नंबर कभी नहीं मिला और ना ही उसका कोई फोन आया.

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तो मैंने भी गिरफ्त ढीली कर दी और आपी को छोड़ दिया।आपी दरवाज़े की तरफ जाने लगीं तो अचानक मुझे याद आया कि आपी को वो दवा दे दूँ।मैंने आपी को आवाज़ दी- आपी एक मिनट रूको. आपी सहमे हुए से अंदाज़ में ही बाहर तक गईं और फिर अन्दर आ कर बोलीं- कोई नहीं है बाहर. मैंने बात खत्म करके आपी के होंठों को चूमने के लिए अपना सिर झुकाया तो उन्होंने अपने हाथ से मेरे चेहरे को रोका और होंठ दूसरी तरफ करते हो नाराज़गी से कहा- अच्छा जाओ.

लेकिन वो उठी नहीं और उसी तरह आधी सोफे पर और आधी मेरी गोद में लेटे रहते हुए उन्होंने अपने जिस्म को ढीला छोड़ दिया. मुझे जन्नत का मजा दे रहे थे।रायपुर की खाली सड़क पर हम दोनों की रासलीला चल रही थी।मैंने अपना एक हाथ पीछे ले जाकर उसके चूचे मसल दिए। वो और गरम हो गई. दिखने में वो माल लगती है, उसका फिगर 36-26-36 का है। उसे कोई भी एक बार देख ले तो उसी दिन मुठ मारेगा.

जिससे मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उनके मुँह में ही पिचकारी छोड़ दी और उनका मुँह पूरा अपने माल से भर दिया।फिर वो बाथरूम चली गईं और साफ़ करके वापस आईं. अब तुम इस कमरे के अलावा और कहीं भी कभी भी आपी से हमारे इन तालुक्कात का जिक्र नहीं करोगे. राजेश के साथ आज तक कभी भी मैं चरम सीमा तक नहीं पहुँची थी।यह कहते हुए उसने मुझे चुम्बन किया।मैंने भी जवाब में चुम्बन किया और चूचे दबाए।हम मस्ती करते हुए सो गए.

तो मैं शाम को दफ्तर से आने के बाद छत पर टहल लेता था।वहीं उसी छत पर सिमरन भी टहला करती थी जैसा कि मैंने आपको बताया कि हम दोनों कि छत एक ही है।मैं उसको अपनी चोर निगाहों से देखा करता था।एक दिन मैं उसी समयानुसार छत पर टहलने चला गया।सिमरन पहले से ही छत पर थी।उस दिन वो अपनी मम्मी के साथ थी. और इस बार मैं अपने साथ नींद की गोलियां लेकर गया।रात को अपनी ससुराल से खाना खाने के बाद मैं पूजा के घर चला गया।वहाँ चाचाजी बोले- पूजा सबके लिए दूध ले आ।मैं भी पेशाब का बहाना बनाकर उसके पीछे-पीछे चल दिया।जब पूजा ने देखा कि मैं आ रहा हूँ तो वो दीवार के साथ साइड में हो गई.

जो कि हमारे घर से 6 किलोमीटर दूर था। स्कूल से 1 किलोमीटर पहले कभी-कभी एक लड़की मिलती थी.

पर आपको कम से कम 5 दिन यहीं रुकना पड़ेगा।मैंने एक नजर भाभी को देखा और बोल दिया- ठीक है. हिंदी ब्लू फिल्म देसी सेक्सीकि शब्बो ने रश्मि के पूछने पर राजू ड्राईवर के साथ उसके जिस्मानी संबंधों को बड़ी तरतीब से बताना चालू कर दिया था और अभी ये किस्सा लण्ड कि चुसाई तक आ चुका था. ब्लू सेक्सी पोर्न फिल्मजो उसकी नंगी पीठ से टच हो रहा था।लण्ड पर बैठे-बैठे उसकी पैन्टी का बॉर्डर भी दिखने लगा था. वो बीच-बीच में मुझे देख कर शर्मा रही थी।मैं फिर रात होने का इंतजार करने लगा, आज मैंने सोच लिया था कि आज इसे पक्का चोदूँगा।फिर रात को दोनों साथ में सोये.

कुछ ही देर में सब उठ जाएंगे।’आपी ने ये कहा और मेरे कंधों पर हाथ रख कर उठने लगीं।मैं सीधा हुआ तो मेरा लण्ड हल्की सी ‘पुचह.

कहीं से भी ना कम ना ज्यादा।मैंने उसके इन आकारों का उसकी मैक्सी से आसानी से अनुमान लगा लिया था। मेरा एक और अनुमान था कि वो कभी भी नहाने के तुरंत बाद अंडरवियर नहीं पहनती थी. मेरी कामना बाकी थी।मैंने कामना को उल्टा लिटाया और उस की गर्दन से लेकर किस करना चालू किया. क्योंकि आज पूरी रात हम लोगों को कुश्ती करनी है।मैंने तुरंत जल्दी से दूध और मेवे खत्म किए और मेरी जान पर टूट पड़ा।मैं उनके होंठों को चूसने लगा। मैं उनके होंठों को काट रहा था.

जब सिमरन थोड़ी नॉर्मल हुई तो मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए। अब सिमरन को भी मज़ा आने लगा और वो भी मेरा साथ देने लगी।मैंने धक्कों की गति तेज कर दी।पूरे कमरे में सिमरन की ‘आहें. मैंने अपनी उंगलियों को सख्त रखते हुए फरहान को इशारा किया कि वो आपी का हाथ अपने लण्ड पर रखवाए और उनके सीने के उभार चूसे. तो गड़बड़ हो जाएगी।यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !तो मैंने देर न करते हुए पेटीकोट को उठा कर अपना लंड उनकी बुर में घुसा दिया, बस चुदाई चालू हो गई।आगे तो सभी को पता है कि क्या होता है। भाभी मुझे चुद चुकी थीं और आगे जब भी मौका मिलता.

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मगर काफी देर होने के बाद भी जब भैया मेरे ऊपर से नहीं उठे तो मैं उन्हें उठाने लगी. तो गाण्ड भी बहुत बड़ी और खुली लग रही थी।मैंने अपना लण्ड फिर से गाण्ड की दरार में लगाया और घिसने लगा। बहुत ही गर्म गाण्ड थी. मुझे गाण्ड की करने दे।उसने कहा- ठीक है।फिर उसने अपने लंड पर तेल लगा कर मेरी गाण्ड पर सैट किया।राज ने मेरे मुँह में लंड एकदम गले तक फंसा दिया।फिर विवेक ने झटका मारा.

भाभी और आरती शादी का एलबम देखने लग गए।मेरी नजरें तो बस भाभी की फोटो को ही देख रही थीं।मैं कई बार भैया से कह देता- भैया आप दोनों बहुत अच्छे लग रहे हो.

और मैं भी।उसके बाद उसने मेरी गाण्ड पर एक चपत मारी तो मेरे मुँह से ‘उई माँ.

अब इसने घुसते ही तुम्हारी चीख निकाल दी।मैंने भाभी को धीरे-धीरे चोदना शुरू किया। कुछ ही देर में सारा दर्द चला गया और वो मजा लेने लगीं और मेरा साथ देने लगीं।हम दोनों को ही एक-दूसरे की लेने की जल्दी थी, उन्हें भी बहुत इन्तजार के बाद मेरा लण्ड मिला था, तो नीचे से जोर-जोर से उछल कर पूरा लण्ड अपने अन्दर लेना चाह रही थीं।वही हाल मेरा भी था, नई चूत मिलने का मजा तो वो ही समझ सकता है. ’ वो उत्तेजना से कांपने लगी।कभी मैं उसके निप्पल पर अपनी जीभ घुमाता तो कभी उसको काट लेता।‘आउच आह राहुल. इंडियन सेक्सी वीडियो सहितपर सबको कैसे बताऊँ।उस वक़्त आईशा भी वहाँ मौजूद नहीं थी। मेरी आँखों में आँसू थे और मुझे पता है कि वो भी कहीं ना कहीं किसी कोने में रो रही होगी।हम सब लोग फ़टाफ़ट तैयार हो गए और रेल्वे स्टेशन के लिए रवाना हो गए.

ये मैं जानता था।जब वो ऊपर होकर मेरे लण्ड को अपने अन्दर लेने की कोशिश करने लगी. जो तक़रीबन अठारह साल की होगी। वह मेरी भांजी थी, उसका नाम दिव्या था। वह बहुत ही गोरी-चिट्टी थी।जब हंसती थी. एक रुपये के पुराने सिक्के के बराबर निप्पल के चारों तरफ हल्का ब्राउन ऐरोला… माशाअल्लाह.

जब पति ही बेकार था।मैं जल्दी से फ्रेश हुआ और अच्छा सा बन कर कुछ ही देर में भाभी के घर पर चला गया।जैसे ही उन्होंने दरवाजा खोला. जैसे की कोई मोमबत्ती पिघलती है। उसके जिस्म को फूल सा हल्का होता हुआ मैं महसूस कर सकता था।मेरे चुम्बन का जवाब वो चुम्बन से दे रही थी।पायल- ओह राहुल.

कई दिनों से कुछ कामों में उलझी हुई थी। अच्छा सुन, मोनू का मुंबई में कल पीएमटी का टेस्ट है। आज वो यहाँ से निकल रहा है, शाम तक तेरे पास पहुँच जाएगा। वो पहली बार मुंबई जा रहा है.

उससे आपको क्या करना है?इतना लिख कर उसने हँसने जैसा लिख दिया।मैं- आप अलाऊ करो तो सब कर लेंगे।वो- ओह्ह. जिसको उन्होंने चूसा और उसके ज़ायक़े को महसूस किया और लंड भी उनके अपने सगे भाई का था।मैंने अपनी उंगली आपी के होंठों पर रखी और अपनी प्री-कम की लकीर को उनके होंठों से लेकर के अपनी उंगली पर ले लिया और उस तार को उंगली पर समेटते हुए अपने लंड की नोक तक आया. दोस्तो, मैं सोनाली आपका फिर से स्वागत करती हूँ। मेरी पिछली पाँच कहानियाँ प्रकाशित हुई थीं.

नंगी सेक्सी आ जाए मैं क़िसी को नहीं बताऊँगा।बहुत मनुहार करने के बाद वो राजी हो गई लेकिन उसने कहा- ठीक है. या फेसबुक से कभी-कभार बातचीत कर लेते हैं।उसने अपने पहले बच्चे का नाम भी मेरे नाम पर रखा।मैं उसके परिवार में उसके गुजरे हुए कल की छवि नहीं प्रदर्शित करना चाहता था।पर इस ज़िन्दगी में कभी न कभी मिलोगी कहीं न कहीं पर.

यारो, आज मैं आपको अपनी जिंदगी की एक रोमांचक और सच्ची घटना का बखान करने जा रहा हूँ। इस घटना के सारे पात्र असली हैं और यह कहानी नहीं बल्कि एक सच्ची घटना है।कहानी शुरू करने से पहले मैं अपने बारे में आपको कुछ बताना चाहता हूँ, मेरा नाम नितिन है. तो मैं भाग कर नीचे गया तो आपी दरवाज़े से मुँह निकाले खड़ी थीं। मैंने पूछा- क्या हुआ आपी?तो आपी ने कहा- मुझे वॉशरूम से हेयर ब्रश पकड़ा दो. देखो आजकल के बहुत तेज रफ़्तार वाले जीवन में ऐसी बातें नॉर्मल हैं यार और हाँ.

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’आपी ने उसके लण्ड को मुँह से निकाल कर एक गहरी नज़र उसके चेहरे पर डाली और फिर बिना कुछ बोले दोबारा लण्ड को मुँह में लेकर अन्दर-बाहर करने लगीं और 5-6 बार अन्दर-बाहर करने के बाद ही लण्ड पूरा जड़ तक आपी के मुँह में जाने लगा।फरहान का जिस्म काँपने लगा था. अब देर न करो।उन्होंने मेरा लण्ड देर तक चूसा। मुझे भी मज़ा आ रहा था और मैं बार-बार उनकी चूत में उंगली कर देता था।मोना- मुझसे अब नहीं रहा जाता. अब तो हाथ हटा लोजिये और आपके प्यार की कुछ बूँदें मेरी ईमेल पर भी डाल दीजिएगा।[emailprotected].

कल इसी मैदान में तेरी चूत में लंड जायेगा।रात को नीति ने विकास को खुशखबरी दी, उसने बताया कि वो जिस गिफ्ट को देने वाली थी, वो तैयार है।विकास ने घबराते हुए कहा- मरवाओगी तुम. वो आकर मेरे कमरे की सफाई कर जाती थीं।इन्हीं पलों में हमारे बीच बाकी सारे रिश्तों ने जगह खोकर दोस्ती ने अपनी जगह बना ली और अब हमेशा जब भी वो आतीं.

जिससे मेरा आधा लंड उसकी गांड में घुस गया और लंड के मोटे हिस्से तक जाकर रुक गया।अब तो पूजा को और भी जोर का दर्द होने लगा और वो जोर से चिल्लाने लगी। वो अपना सर सामने तकिये पर पटक कर रोने लगी और अपना सर इधर-उधर पटकने लगी।अब मैंने इन्तजार नहीं किया और एक जोर का झटका और मार दिया.

और ये लड़कियों को चोदने के काम आता है।मैंने अपना लण्ड उसकी चूत पर रखा वो बोली- क्या कर रहे हो. इसलिए आंटी ने जिम पहुंचते ही मुझे तिरछी नजर से देखते हुए स्माईल दी और अन्दर चली गईं।मुझे आंटी से बात करनी थी. ’ गूँज रही थीं लम्बी सम्भोग क्रिया के बाद मैंने अपना सारा वीर्य उसकी चूत में ही छोड़ दिया।हम दोनों एक साथ ही झड़े थे।जब मैंने अपना लंड बाहर निकाला तो उसमें खून लगा हुआ था।उसके बाद हम दोनों ने बाथरूम में एक साथ स्नान किया.

तेरी उम्र में तो सब लड़के मुठ मारते हैं। कई तो असली चुदाई भी कर लेते हैं।मोनू की शर्म धीरे-धीरे दूर हो रही थी।मैं अपना मुँह उसके कान के पास ले गई और बिल्कुल धीरे से पूछा- मुझे चोदेगा?मोनू का चेहरा लाल हो गया और कुछ नहीं बोला।मैंने फिर से उसके कान में धीमे स्वर में पूछा- बोल न. आज उनको नई नवेली चूत मिलने वाली थी और वे एक कुँवारी कन्या को सुहागन बनाने वाले थे।मैं भी काफ़ी खुश था. इतना बड़ा लण्ड मेरी छोटी सी चूत में कैसे जाएगा?मैं बोला- देखो कैसे जाता है।मैंने उससे कुछ नहीं कहा और अपने काम में लगा रहा। अपने लण्ड को उसकी चूत पर रखकर मैंने जैसे ही उसे आगे बढ़ाया.

जिससे नेहा अब और भी गर्म हो रही थी।नेहा की प्यारी सी सिसकारी निकलने लगी थीं, कुछ ही पलों में उसकी सिसकारियाँ कमरे का माहौल कामोत्तेजक बना रही थीं ‘उम्म्ह्ह.

चलने वाला सेक्सी बीएफ: लण्ड को हाथ में पकड़ा।तो आपी बोलीं- सगीर पहले फरहान का लण्ड हनी के अन्दर डलवा दो. वो अन्दर आ गई।मेरे बिखरे बाल देख कर बोली- सो गया था क्या?अपने बाल सही करते हुए मैंने कहा- हाँ यार.

तो जिंदगी भर तुम्हें घर में ही रंडी मिल जाएगी और वैसे भी तुम्हारी एक गर्लफ्रेंड है ही. वहाँ गया था। मेरी भाभी कोमल अपने नाम की तरह मन और बदन से भी कोमल है।उनका फिगर 34-28-38 का है और बॉडी एकदम गोलाइयों से भरपूर है उनके हर अंग का कटाव देखने लायक है। कोई भी उन्हें एक बार देख भर ले. कहती है- तेरी मर्जी।मैंने कहा- अन्दर क्या-क्या पहने है?वो बोली- क्या-क्या पहनते हैं?मैंने कहा- बता न.

तो मैं बदनाम हो जाऊँगी।मैंने अपना हाथ थोड़ा सा लूज क्या किया वो घूम गईं.

’ कर रही थीं।’ मैंने आपी को टांग खींचते हुए कहा।आपी ने फ़ौरन ही जवाब दिया- गंदे तो हो ही ना तुम. आपी के मम्मे बहुत सख़्त थे और मेरा पूरा लण्ड चारों तरफ से रगड़ खा रहा था और हर बार रगड़ लगने से जिस्म में मज़े की नई लहर पैदा होती थी।मैं जब अपने लण्ड को आगे की तरफ बढ़ाता था. क्या आग लगी है तुम्हें??आपी ने अब अपनी कैफियत पर क़ाबू पा लिया था और अब उनके चेहरे पर खौफ के आसार भी नहीं थे.