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मैं कुछ नहीं बोला और कुछ देर बाद बोला- भाभी, आखिर क्या चाहिए?तो वो बोली- रंजन, मुझे वो ख़ुशी चाहिए जो तुम्हारे भैया से बहुत कम मिलती है.मैं चिहुंक उठी…‘ये क्या करते हो जीजू… दर्द होता है…! ‘ मैंने नखरे दिखाते हुये कहा.

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दोपहर को दो बजे जब आयशा घर पर वापिस आई तो मैं उससे बात नहीं कर पा रहा था और मैं खाना लगा कर योगी के कमरे में चला गया. आज कल तेरे जिज्जाजी मुझे बस हफ़्ते एक या दो बार ही चोदते हैं वो भी जल्दी जल्दी से, मेरी नाइटी उठा कर अपना लंड मेरी चूत में डाल कर बस 10 मिनट में ही लंड का माल चूत में झाड़ देते हैं. आगे मेरी ज़िंदगी में कैसे-कैसे मोड़ आए यह मैं अगली कहानी में बताऊँगा और आप मुझे मेल करके बताइये आपको यहाँ तक की मेरी कहानी कैसी लगी.

अनिल जब भी अपनी जीभ मेरी चूत में घुसता तो मैं मचल उठती और आगे होने से सुनील का लौड़ा मेरे गले तक उतर जाता. भेनचोद छोड़ ! बाहर निकाल … मैं मार जावाँगी… उईईईईईईई !”दर्द के मारे मेरा पूरा बदन ऐंठने लगा था, ऐसा लग रहा था जैसे कोई गर्म लोहे की सलाख मेरी गाण्ड में डाल दी हो।कहानी अगले भाग में जारी रहेगी।आपकी नीरू बेन (प्रेम गुरु की मैना). इतना मजा आया…फिर भाभी संजू और मैं हम तीनों बिस्तर पर नंगे लेटे रहे।मैंने कहा- भाभी, यह सब क्या किया?भाभी बोली- रॉनी हम रोज-रोज एक जैसी चुदाई कर कर के परेशान हो गए थे तो हमने ऐसा करने की योजना बनाई।संजू बोला- मुझे तुम्हें छिप कर देखने में बहुत मज़ा आ रहा था ! मैं बहुत ज्यादा गर्म हो रहा था !उसके बाद हमने दिन भर सेक्स किया और जब भी हमें मौका मिलता है हम सेक्स करते हैं।.

”हाँ अकेला ही है… ”फिर तो आज हम दोनों की जमेगी… ” राहुल ने अपनी व्हिस्की की बोतल उठा ली और कार में रख ली. मोना कहाँ मानने वाली थी!अभी दस मिनट भी नहीं बीते होंगे, वो फिर से मेरे लण्ड को सहलाने लगी. बातों ही बातों में उसने बताया कि उसका नाम रिया शर्मा है जो मैं पहले ही उसके कंपनी आईडी कार्ड में देख चुका था.

थोड़ी देर में मैंने उनकी चूत में ही अपना पानी छोड़ दिया और मैं भाभी के वक्ष के ऊपर थक कर गिर गया, भाभी ने मेरे होंठ चूम लिए और बोली- थैंक्यू देवर जी!फिर हम दोनों बाथकमरे में गए और एक दूसरे को साफ़ करने लगे. मम्मी सर से पाँव तक पूरी तरह से गोरी नारी थी, उनकी चूचियों के निप्पल गोरे शरीर पर बहुत अच्छे लग रहे थे.

मेरा लंडा मस्त तन कर खड़ा था। मुझसे रहा नहीं गया और मैं उठ कर टॉयलेट में चला गया और वहाँ मुठ मारने लगा।इस बात का पता भाभी को चल गया तो उसने तुरंत दरवाजे पर दस्तक दी.

निष्पाप, निष्काम, पहला आकर्षण…आज भी दिल में महसूस होता है…!!!हमारा अब रोज का यही हो गया.

उसके स्तन देख कर सुनील के तो चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान आ गई … अब वो सोनिया के स्तनों ज़ोर-ज़ोर से दबा रहा था और सोनिया के मुँह से मादक कराह निकल रही थी … सोनिया अपना सर पलंग के दोनों तरफ मार रही थी. दोस्तो, मैं उस दिन की हर घटना को सपना समझ रहा था। लेकिन दो दिन बाद ही रागिनी का फ़ोन आया कि आज बच्चे आज अपने मामा के घर गए है और पति भी टूर पर हैं तीन दिन के लिए, इसलिए ऑफिस से सीधे मेरे घर आ जाओ. छोटा भाई यानि देवर जी जिसे हम बॉबी कहते थे उसका काम अपनी जमीन जायदाद की देखरेख करना था.

भाभी और मैं लगभग एक साथ झड़ गए।फिर थोड़ी देर रुकने के बाद रक्षिता बोली- जान, अब मेरी चूत की प्यास भी बुझा दो!मैं बोला- मैं अपनी जान को चोदे बिना थोड़े ही छोड़ूंगा!फिर मैंने रक्षिता की चूत में अपना बड़ा सा लंड डाला और उसकी तेज़ स्पीड में चुदाई शुरू कर दी।वो आह ओह्ह आह ओह्ह की आवाजें निकालने लगी. उसने अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल दी… और अपनी आँखे बंद कर ली। हमारे आस-पास पानी ही पानी था…और हम प्यासे थे…।साँस फूल गई और हम ऊपर सतह पर आ गये… ऊपर आकर थोड़ी दूरी बना ली ताकि किसी को शक न हो। दूर से ही एक दूसरे को इशारा करते…गोता लगाते…पानी के अंदर किस करते…. मैंने उसके दोनों स्तनों को ज़ोर से पकड़ लिया और धक्के लगाते हुए झड़ गया और उसके ऊपर ही निढ़ाल पड़ गया.

जब मेरा माल निकलने वाला था तब मैं उसके मुंह के पास चला गया…कशिश ने अपने मुंह खोला और मैंने उसमें अपना सारा इकट्ठा माल गिरा दिया…मैं अब कशिश के साथ ही बेड पे गिर गया.

निकली। अब मैंने उससे कहा कि अपने कान की लम्बाई नापो। ये काम तो मुझे ही करना था। इस बार मैंने उसका दूसरा गाल भी छू लिया। क्या मस्त मुलायम चिकना स्पर्श था। साली के गाल इतने मस्त हैं तो चूचियाँ तो कमाल की होंगी। ख़ैर कान का नाप भी 9 से. चारों के तनतनाते हुये कठोर लण्ड हमारे बिस्तर के दोनों ओर खड़े हुये हमे चुदाई का निमंत्रण दे रहे थे. ”झंडे हल्के हाथों से मेरी दोनों जांघें सहलाने लगा। मेरी योनि के बाल उसके हाथ से टकरा रहे थे। इस बार मैंने महसूस किया कि लौड़ा बहकने लग गया था। बार-बार उसके हाथ मेरी जाँघों के बीच की घाटी की गहराई नापने लगते।हाँ, ऐसे ही बेटा, बड़ा ही आराम मिल रहा है….

अगली रात चली तो गई लेकिन अँधेरा होने की वजह से किसी और की बाँहों में जा बैठी!या सोचा समझा धोखा था? जो भी था, रहस्य है, दो के साथ? बहुत आया! क्या बहुत आया?जानने के लिए अगली कड़ी ज़रूर पढ़ना![emailprotected]. रीटा ने भी बहादुर को कस कर बांहो में भींच कर अपनी सैन्डल की हील बहादुर के चूतड़ों में गाड़ दी और अपनी बुंड को हवा में बुलंद कर दी ताकि बहादुर का घीया जड़ तक अंदर ले सके. मेरी खूब फ़ूले हुए कूल्हों पर! फिर मेरी गोरी और खूब सेहतमंद जांघें जिनके बीच हर मर्द की पसंदीदा जगह मेरी नन्ही सी नाज़ुक सी चूत.

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ताकि उसका दर्द थोड़ा कम हो जाए और उसकी चूत को मेरे मोटे और लंबे लंड की आदत हो जाए।थोड़ी देर बाद उसका दर्द कम हुआ.

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चूत !और उसे चाटने लगे !चूत वैसे भी काफी गर्म हो रही थी और वो पानी छोड़ने लगी। मैंने कहा- अब आप ऊपर आ जाओ !वे शरारत से बोले- साफ बोलो कि मुझे क्या करना है?मुझे पता था अब ये मेरे मुँह से बुलवाकर छोड़ेंगे इसलिए मैंने जल्दी से अपनी आँखे बंद कर के कहा- आप मुझे चोद दो !पर वे कौन से कम थे, बोले- मैंने सुना नहीं ! जरा जोर से बोलो !मैं जोर से उन्हें अपने ऊपर खींचते हुए बोली- मुझे चोद दो ! चो…. करीब दो-तीन मिनट की किस्सिंग के बाद वो अलग हुआ और लगभग गिड़गिड़ाते हुए बोला ‘मैडम, एक प्रॉब्लम है !’मैंने पूछा ‘क्यूँ क्या हुआ?’‘मैडम मेरे साथ मेरा एक साथी और है इसी कोच में, अगर मैं उसको ज्यादा देर दिखाई नहीं दूँगा तो वो मुझे ढूँढता हुआ यहाँ आ जाएगा. बड़े ही बेमाने दिल से मैं स्कूल से आने के बाद सोने चली गई, मम्मी ने बाहर जाकर जन्मदिन मनाने के लिए भी कहा.

जब नीना खुद ब खुद गरम हो गई तो अमित का मूसल के माफ़िक लण्ड को जबरन पकड़ कर उसने अपनी चूत में घुसा लिया और अनाप-शनाप बकने लगी. चाची का गोरा चिकना गठीला बदन मेरी आँखों के सामने था और वो भी उस हालत में जिसमें मैं सिर्फ सोच सकता था. ? कविता बोली।मैंने फिर परची डाली और रेशमा को कहा- एक एक कर के तीनों को उठाओ।रेशमा ने उठाई तो पहली परची में पिंकी का नाम था, दूसरी में रेशमा का और तीसरी में कविता का नाम आया।मैंने कहा- देखो, परची में जैसे नाम आएँ हैं, वैसे ही मैं एक एक को चोदूँगा….

‘आह, भैया… ये बात हुई ना…अब लग जा धन्धे पर… लगा धक्के जोरदार…!’‘मस्त हो दीदी… क्या चुदाती हो और क्या ही गाण्ड मराती हो…!’‘चल लगा लौड़ा… चोद दे अब इसे मस्ती से…और हो जा निहाल…’उसकी चिकनी गाण्ड में मेरा लण्ड अन्दर बाहर होने लगा.

हाय क्या मजा आ रहा था!रीना भी गरम हो रही थी!मैंने कहा- रीना, मेरी पैन्ट खोलो ना!रीना- हाँ बाबूजी. ’भच्च’ की आवाज़ हुई और लंड का सुपारा गांड में घुस गया और रागिनी चीख कर छूटने का प्रयास करने लगी. अब तक उन्होंने भी मुझे कपड़ों से अलग कर दिया था और मेरे बदन पर सिर्फ मेरा अंडरवियर ही बचा था!तभी उन्होंने अपने नाज़ुक हाथों से मेरे लण्ड को पकडा और उसे सहलाने लगी.

अंदर आ जाओ!मैं अंदर चला गया तो वो बोली- मम्मी थोड़ी देर के लिए बाहर गई हैं, अभी आती होगी. किया… शायद आज तुम कुछ भूल गए… शायद आज हमारे बीच इतनी दूरियाँ आ गई हैं कि एक दूसरे की जिंदगी में क्या चल रहा है. अच्छा चलो कोई बात नहीं कभी कभी मुट्ठ मारना भी अच्छा रहता है ?पर आप हैं कौन ?नाम जानकर क्या करोगे ?नहीं पहले अपना नाम बताइये !चलो, मैं तुम्हारी एक चाहने वाली हूँ !कोई नाम तो होगा ?मुझे मैना कह सकते हो ?मैना.

वो था दिसम्बर 24 और मैंने उसे हाँ कह दिया… हमारे प्यार की गाड़ी चल निकली।(हालाँकि मैं सिर्फ उसे चोदना चाहता था पर वो यह नहीं जानती थी)फिर उस दिन मैंने उसके गाल पकड़ कर उसके माथे पर चूम लिया. थोडी देर बाद वो सामान्य हो कर बोली- अब बड़ा मजा आ रहा है।फिर मैं अपनी मस्त चाल में उसे चोदता रहा …करीब पच्चीस मिनट की चुदाई में हमने बहुत मजे किये.

वो मुझे नंगी ही कोरिडोर के तरफ खींचने लगा … अगर इस तरह बाहर जाती तो न जाने कितने लोग चोद देते. आजकल सोशल साईट का जमाना है … मेरी प्रोफाइल पिक्चर देख कर सब लोग मेरे फ्रेंड बनना चाहते थे।मैं नाम से सेक्सी श्रेया आहूजा और फिगर तो पंजाबन वाली लम्बे बाल गोरा चिट्टा रंग …पीले रंग की टॉप में गोल गोल मम्मे और वक्ष-रेखा पर तिल! नीचे शॉर्ट-स्कर्ट. उसकी अण्डरवीयर शायद ठीक नहीं थी सो उसने उतार कर पेशाब किया और सिर्फ़ अपनी सफ़ेद निकर को ढीली करके बिस्तर पर लेट गया.

मेरी राजदार थी वो, मैं उसे हमेशा साथ ही रखना चाहती थी, सो मैंने उसे अपने पास अपनी सहायता के लिये रख लिया था.

आज मैं एक कामवाली के वजह से कुंवारा नहीं रहा, मेरा पहला सेक्स हो गया था।इतने में शर्मा आँटी का कॉल आया- केदार, आज शीतल नहीं आई हमारे यहाँ काम करने।मैं- हाँ, वो आज हमारे यहाँ भी काम करने नहीं आई, वो कल आएगी, आज उसकी तबियत ख़राब है।मैं और शीतल हंसने लगे। पर शीतल अचानक थोड़ी बैचेन हो गई।मैं- क्या हुआ?शीतल- हमने जो भी किया वो सब गलत है, मैं एक शादीशुदा औरत हूँ। पर मैं भी…. थोड़ी देर में किसी ने मुझे पीछे से आवाज लगाई, मैंने मुड़ कर देखा तो वो चित्रा थी, वो बोली- मैं कैसी लग रही हूँ?चित्रा सिर्फ ब्रा-पेंटी पहने थे और वो किसी परी से कम नहीं लग रही थी. वो इतनी प्यारी फीलिंग थी कि मुझसे रहा नहीं गया, मैंने थोड़ा सा दरवाजा खोल कर देखा तो पूरा बाथरूम खाली था.

मेरा नाम पुनीत है मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ, उम्र 24 साल है और दिखने में भी अच्छा हूँ। लंबाई 5 फुट 8 इंच है, मेरा लंड 6 इंच लम्बा है और 2. ”मैंने आंखें बंद कर ली और कह डाला,”आई लव यू !”और उसने बहुत ही सहजता से जवाब दिया,”मैं भी !”और इस बार मैंने पहला कदम उठाया.

इतने में दीदी दो बार झड़ गई, मैं भी झड़ने वाला था इसलिए मैंने धक्के मारना तेज़ कर दिया. उसका लंड भी तो निचुड़ जाता है, उसे चूस कर ही छोड़ती है यह चूत…तो ऐसी ही खूबसूरत प्यासी चूत मेरी भी है. मैंने भी अपना सर झटका और तेजी से सीढ़ियां उतरता हुआ अपने घर आ गया।दिन भर इस घटना को याद करके मुझ में उत्तेजना भरती रही….

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‘ले सम्भाल अपने बाप के लौड़े को ये लेएए और लेएए हायएएए मेरी रानी और जोर से कमर हिला आहऽऽऽ, ये ले भौंसड़ी की, आज चौद दूंगा, तेरी ऐसी की तैसी, तेरे जैसी कई रंडियों को मैंने चौदा, साली कुतिया, तेरी चूत फाड़ के तेरे गले में डाल दूंगा, मां की लौड़ी हंम्फ हंम्फ’ करते राजू ने अपने लण्ड से रीटा की चूत में आठ बना कर चोदना शुरू किया, तो रीटा की खुशी के मारे चीखें ही निकल गई.

तभी जाने कहाँ से गौरी आ गई और ताली बजा कर हंसने लगी- तो मम्मी, आपने मैदान मार ही लिया?”राधा एक दम से शरमा गई और छिटक कर अलग हो गई. मेरे नाखून उसे गड़ रहे थे। मेरा लंड पूरा उसकी गहराई तक जा रहा था। रागिनी अब मस्त हो चुकी थी. पर मैं एक सार्वजनिक-स्थल में था… भीड़भाड़ में।शाम चार बजे लहरें(वेव्स) शुरू होते हैं। ऐसा कृत्रिम माहौल बनाया जाता है जैसे समुद्र तट हो….

वीरवार को जब मैं कॉलेज से वापिस आया तो मम्मी बोली- बेटा! तुम्हारे दोस्त योगी का फोन आया था. !भाभी ने कहा- मैं खुद कर लूँगी।मैंने कहा- मैं एक बार कर देता हूँ, फिर खुद कर लेना।तो भाभी ने कहा- ठीक है।मैं भी तेल ले आया और उनकी टाँग पर तेल लगा कर मालिश करने लगा। उन्होंने अपनी आँखें बंद कर ली थीं।मैं उनकी जांघों तक उन्हें मसलने लगा। उनकी आँखें अब बंद हो गई थीं. सेक्सी बीपी मराठी फोटोवो भी अपने चूतड़ पीछे धकेल कर मेरे लंड का स्वागत कर रही थी अपनी छोटी सी चूत में। अब मैंने थोड़ा ऊँगली में लिया और उसकी गांड के छेद में फ़िर से लगाया और ऊँगली अन्दर डाल कर घुमाने लगा.

मुझे नहीं पता था कि इसको झड़ना कहते हैं…फिर उसने मुझे अपनी बाहों में ले लिया और कहने लगी- अच्छा ! बहुत चालाक हो ? मुझे तो नंगा कर दिया और खुद सब कुछ पहने हो ! तुम भी अपने कपड़े उतारो…. !उसने सिसकारती आवाज़ में कहा- आपको रोका किसने है सर … मैं तो कितने दिनों से यही चाह रही थी …उसका इतना कहना था कि मैंने अपने होंठ उसके नर्म मुलायम होंठों पर रख दिये और दोनों हाथों से उसके स्तनों को मसलने लगा.

जैसा कि मैंने आपको पहली कहानीमैं और मेरी प्यारी शिष्या”में बताया था कि कैसे तनवी का और मेरा पहला प्यारा तन्हाई वाला मिलन हुआ और घर वाले अभी और दो दिन के बाद आने वाले थे तो मेरे पास अभी और दो दिन थे तनवी को मन भर कर प्यार करने के लिये।उस दिन जाने के बाद शाम को तनवी का फोन आया. थोड़ी देर में मुकेश मेरे सामने आया और बोला- आँखे खोल!मैंने डर के मारे आँखे खोली तो दंग रह गई, सामने मुकेश का 10 इंच का लौड़ा किसी फन फहराते सांप की तरह लहरा रहा था. अपनी इंजीनियरिंग ख़त्म करने के बाद मुझे हॉस्टल छोड़ना पड़ा लेकिन मुझे कुछ दिन नागपुर में ही रहना था तो मुझे अपने चचेरे भैया के यहाँ रहना पड़ा.

रागिनी के कुछ समझने के पहले मैंने उसकी पतली कमर को पूरी ताकत से जकड़ कर एक धक्का लगा दिया. मेरी मेल आईडी है :[emailprotected]मेरे दोस्त राज को भी आपके मेल का इन्तजार रहेगा…उनकी आईडी तो पता है ना आपको…[emailprotected]. मैंने उसके होंठो को चूसते हुए उसके पूरे चेहरे को चाट-चाट कर गीला कर दिया और दोस्तो, आप तो जानते ही हैं कि कड़कियों के गले पत चूमने और चाटने में उनको कितनी उत्तेजना होती है.

वो बोली- नहीं यार…तो मैंने कहा- शर्माओ मत फिर!हम लोग बात कर रहे थे पर उसकी नज़र मेरे लण्ड पर थी और मेरी नज़र उसकी उभरी हुई चूचियों पर…मन में चल रहा था कि कूद जाओ उस पर… पर मन काबू में किया हुआ था.

फिर मैंने ढेर सारा तेल अपने लंड पर लगाया और उसकी चूत में उंगली से अन्दर तक लगाया और फिर से कोशिश की …. उसके बाद उसने टिकेट निकाल कर चेक किया और मेरी तरफ़ आँख मारते हुए बोला ‘आप खाना खा लीजिये.

वो जल्दी ही समझ गई कि अब्बास अब क्या चाहता है… जो अब्बास ने उससे थोड़ी देर पहले कहा था, वो उनको सच करने जा रहा था. मामी, कैसा लग रहा है?”नयन, यह तो अलग ही अनुभव है! मुझे बहुत ही मजा आ रहा है! तुम भी कमर हिलाओ ना! मजा आ रहा है बहुत!”अब मैंने अपने शॉट धीरे से चालू किये जिससे उनको तकलीफ़ ना हो. निकली। अब मैंने उससे कहा कि अपने कान की लम्बाई नापो। ये काम तो मुझे ही करना था। इस बार मैंने उसका दूसरा गाल भी छू लिया। क्या मस्त मुलायम चिकना स्पर्श था। साली के गाल इतने मस्त हैं तो चूचियाँ तो कमाल की होंगी। ख़ैर कान का नाप भी 9 से.

यही ना?हालाँकि नीना ने मुझे इतना ही बताया कि विनोद को नीना के गर्भवती होने का डर सताता रहता था. वो चिल्लाती, उससे पहले मैंने अपना मुँह उसके मुँह पर रख दिया और उसके होटों को चूसने लगा. गले से क्या लगाया, सबने अपनी छाती से मेरे चूचों को दबाया…मैं समझ गई कि ये सभी ठरकी हैं, अगर किसी को भी लाइन दूँगी तो झट से मुझे चोद देगा।मैं खुश हो गई कि कहाँ एक लौड़ा मांग रही थी और कहाँ चार-चार लौड़े आ गये…पापा उनके साथ अन्दर बैठे थे और मैं चाय लेकर गई… जैसे ही मैं चाय रखने के लिए झुकी तो साथ ही बैठे राठौड़ अंकल ने मेरी पीठ पर हाथ फेरते हुए कहा- कोमल बेटी.

भोजपुरी बीएफ सेक्सी भोजपुरी कहानी श्री विनोद शर्मा, ग्वालियर पर आधारित है, अपनी ये खूबसूरत आप बीती अपने ही शब्दों में उन्होंने भेजी थी, कहानी के रूप में आपके समक्ष प्रस्तुत है…मेरी नई नौकरी थी और मेरा पहला पद स्थापन था. किया… शायद आज तुम कुछ भूल गए… शायद आज हमारे बीच इतनी दूरियाँ आ गई हैं कि एक दूसरे की जिंदगी में क्या चल रहा है.

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बात उस समय की है जब मैं बारहवीं की परीक्षा पास करके अपने गाँव वापस आया।शहर में रहकर मैं बहुत बिगड़ गया था और चूत का आशिक बन गया था क्योंकि मैंने सुना था कि सांप और चूत जहाँ दिखे वहीं मार देनी चाहिए. तुम पहले मर्द हो जिसने मेरे पीछे वाले में अपना ये मोटा वाला पूरा अन्दर डाला।’‘मेरी रानी रागिनी, मैं खुश ही नहीं खुशकिस्मत हूँ जो तुम्हारी लाजवाब चूत और मस्त गांड में मेरे लंड को जगह मिली।’उसके बाद करीब एक घंटा हम दोनों वैसे ही नंगे पड़े रहे. अगले दिन मैं कॉलेज़ से लौटा, माँ ने कहा- चलो जल्दी से कपड़े बदल ले, मैं खाना लगाती हूँ!और वो रसोई में चली गई.

तभी कंपनी का मैंनेजर अब्दुल आया और कोई फ़ाइल दीदी के बॉस को दी और फिर मुझे देख कर चला गया. धीरे-धीरे हम दोनों की अच्छी दोस्ती हो गई। हम इधर-उधर की बातें भी करने लगे पढाई के साथ साथ। कभी कभी मैं उसके गालों को खींच देता जब वो कोई गलती करती पढ़ाई में. लड़का लड़की की सेक्सी वीडियो चुदाईअब बस जालंधर पहुँच चुकी थी और सब बस से उतर रहे थे, मुझे भी उतरना था और उस लड़के को भी।बस से उतरते ही लड़का पता नहीं कहाँ चला गया, मेरा चुदने का मन कर रहा था, मगर वो लड़का तो अब कॉलेज चला गया होगा, यह सोच कर मैं उदास हो गई।अब मुझे अस्पताल जाना था, मैं बस स्टैंड से बाहर आ गई और ऑटो में बैठने ही वाली थी कि वही लड़का बाईक लेकर मेरे पास आकर खड़ा हो गया.

खैर उस हसीना के ब्लाऊज में झांकते हुए मेरे दिन कट रहे थे कि इतने में 15 अगस्त आ गया, स्कूल में रंगारंग कार्यक्रम था, स्कूल की बिल्डिंग के बाहर मैदान में पंडाल और स्टेज लगा था, स्कूल की बिल्डिंग सूनी थी, मैंने राऊँड लगाने की सोची कि शायद हसीना दिख जाये.

मैं तभी चूत की तरफ मुड़ गया!आकांक्षा की चूत बिल्कुल टमाटर की तरह लाल और अंगूर की तरह छोटी थी. इस बारे में और अपने बारे में ज्यादा बात ना करते हुए मैं अपनी कहानी को आगे बढ़ाता हूँ.

तभी मुझे तान्या के पापा श्यामलाल की आवाज़ आई, शायद नौकरों ने तान्या के बेहोश होने की खबर श्यामलाल को कर दी थी, इसलिए मैंने वहाँ से निकलना ही ठीक समझा और तान्या से अगले दिन का कह कर वहाँ से निकल गया. फ़िर मैंने कहा- तो फ़िर मैं तुम्हें क्यूँ दूँ अपनी चूत ! तुम्हारे बॉस को ना दूँ…?फ़िर उसने कहा- ठीक है उसे भी देना, मगर मैंने कितना कुछ किया तुम्हारे लिए. ” चोट तो नहीं लगी…? पागल है क्या तू… ज्यादा सुपरमैन बनने का शौक चढ़ा है… जा छत से भी कूद ले.

मक्खन लगा होने से अब ऊँगली आराम से अन्दर बाहर हो रही थी। मैंने फ़िर दो ऊँगली अन्दर डाली.

‘बहुत जोर मार रहा है ना, ला मैं इसका रस निकाल दूँ!’कह कर भाभी लपक कर मेरे ऊपर गाण्ड को मेरी तरफ़ करके चढ़ गई और मेरे लण्ड को जोर जोर से मुठ मारने लगी, फिर उसे अपने मुख में ले लिया. आशा करता हूँ सभी चूतों और लौड़ों को मेरी यह कहानी भी पहले वाली कहानियों की तरह ही पसंद आएगी. उसकी प्यारी सी चूत मेरे हाथों में आते ही रस से भर गई और मैं खुद को उसकी जांघों के बीच घुसने से नहीं रोक पाया.

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उस दिन पापा ने मुझसे कहा कि वो दिन में मम्मी के साथ शोपिंग पर जायेंगे और अभिषेक भी देर से आएगा इसलिए घर पर 2-3 घंटे मुझे अकेले रहना पड़ेगा. बिखरे उलझे बाल, आँखों का फैला काज़ल और मेकअप, गीली चूत, रिसती गाण्ड, चुसे हुऐ चुच्चे और सूजे होंट तो देखते ही बनते थे. इतने में मैंने फिर से पाना लण्ड जाकर ज्योति में मुँह में रख दिया और वो उसको बड़े मजे से चूसने लगी.

और वाशरूम जाकर मुँह धोया और वापिस आ गए…जब हम वापिस आए तो मेरी गर्लफ्रेंड मिली और बोली- कहाँ रह गए थे तुम. नेहा ने अपने चूतड़ों के इस तरह आगे-पीछे हिलाना शुरू कर दिया मानो वो मेरी अंगुली नहीं मेरा लंड हो…मैंने सर उठाकर उसके मासूम चेहरे और उत्तेजना से बंद हुई आँखों को देखा…. मैं जैसे झरने को आया, उसकी चूत में दना-दन 5-6 ज़ोर के धक्के दिए और उसके ऊपर ही लुढ़क गया, जिससे वो भी एक और बार झड़ गई.

कहानी का पिछला भाग :मेरी बीवी की पहली चुदाईदोस्तो, मैं आज अपनी चुदैल बीवी नीना की वह दास्तान बताने जा रहा हूँ, जिसके बाद हम दोनों की जिंदगी में बहार आ गई. मैंने अपने दोनों हाथ उसके चूतड़ के नीचे डाल दिए। उसके चूतड़ किसी कुंवारी लड़की जैसे सख्त थे. मेरा लण्ड पूरी तरह से तैयार था पर वो अभी पूरी तरह से गर्म नहीं थी…मैंने उसकी पेंटी निकाली, उसने भी अपनी झाँट नहीं बनाई थी.

थोड़ी देर तक तो मैं अपने कमरे में ही रहा, फिर उठ कर बाहर हॉल में आया तो देखा मेरी बहन अपने कमरे में सोने जा रही थी, मैंने उसे आवाज़ लगाई- नेहा, मैंने यहाँ तीन किताबें रखी थीं, एक तो मुझे मिल गई लेकिन बाकी दो और कहाँ हैं?”मेरे पास हैं, पढ़कर लौटा दूंगी मेरे भैया!” और उसने बड़ी ही सेक्सी सी मुस्कान दी. जहाँ लड़कों की बास्केटबाल टीम अभ्यास कर रही थी… मुझे अनिरुद्ध ने आवाज़ लगाई …अनिरुद्ध लड़कों की टीम का कप्तान था.

दोस्तो, हैरी का नमस्कार!कैसे हैं आप सब लोग! आप के प्यार और दुलार का बहुत बहुत धन्यवाद! बहुत से प्यार भर मेल मिलते हैं मुझे आप सबके! बहुत आभारी भी मैं आप सब लोगों का!तो दोस्तो, यह कहानी ही नहीं बल्कि हकीकत है.

मेरा तन्नाया हुआ लंड उसकी रानों से टकराने लगा…जैसे ही उसको इस बात का एहसास हुआ उसने मेरे लंड को पकड़ा और योनिद्वार पे… जहां मेरी तर्जनी आगे-पीछे हो रही थी. इंग्लिश गुजराती सेक्सी वीडियोथोड़ी देर में उसने मेरा पैर पकड़ कर अपने पास खींच लिया और अपने सीने पर दबा दबा कर रगड़ने लगी. हिंदी सेक्सी फिल्म बढ़िया वालामैंने कहा- ऐसा नहीं हो सकता!तो आंटी ने कहा- क्यों?मैंने पूछा- अंकल नहीं करते क्या आपके साथ?तो आंटी ने कहा- करते हैं पर तुम बताओ कि करोगे या नहीं?तो मैंने कहा- ठीक है!फिर मैंने कहा- आज नहीं, फिर कभी!उन्होंने कहा- आज क्यों नहीं?तो मैंने कहा- बस ऐसे ही!फिर आंटी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और मेरे होंठो पर अपने होंठ रख दिए और उन्हें चूसने लगी. एक दिन हम वापस आ रहे थे, रात के लगभग 8 बज चुके थे, अचानक बारिश आने लगी थी तो हम दोनों काफी भीग गए थे लेकिन बारिश बहुत तेज़ हो चुकी थी.

मैंने तो बस उसकाया था ताकि इनके अन्दर का शैतान बाहर आ जाये… पता तो पहले से था।सर और पीयू दोनों नंगे मेज पर चोदम-चुदाई खेल रहे थे… निशा बगल में खड़ी थी चुदने के लिए…सर : श्रेया, तू दूर क्यूँ खड़ी है.

यह सोच कर मैं जीजू से बोली- जीजू, मेरे ऊपर रहम करो! आप मेरी गांड को तो बख्श दो और मेरी फ़ुद्दी ही चोद लो!कहानी का अगला भाग यहाँ है:जीजू के साथ मस्त साली-2. मैंने खड़े हो कर अपना बरमोडा खोल कर उसे नीचे किया अन्दर मैंने अंडरवियर नहीं पहना था. अब मैं अपनी कहानी पर आता हूँ!पहले मेरे मन में एसा कोई विचार नहीं था अपनी बहन को चोदने का! लेकिन वो दिन पर दिन निखरती जा रही थी.

वो कहानी बाद में!फिर तो मैं बहुत दिनों तक आंटी की गाण्ड और चूत मारता रहा!तो दोस्तो, कैसी लगी मेरी मोना आंटी आप लोगों को?मुझे मेल जरूर करिएगा. जितना सहलाती उतना ही विपिन का मोटा लण्ड मेरी चूत में घुसता सा लगता और मेरे मुख से एक सिसकारी सी निकल जाती. वो चौंकी और झटके से खुद को पीछे करते हुए बोली- यह क्या कर रहे हो तुम? पागल तो नहीं हो गये सुनील … तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझको छूने की?जवाब में सुनील बोला- सोनिया तुम्हारी चिंता क्या है … यह जो भी मैं कर रहा हूँ उसको जिस्म की ज़रूरत बोला जाता है … पता नहीं तुम इन सबसे इतना ज्यादा क्यों घबराती हो.

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उन्ह … या…”मैं जानता था उसका दर्द अब कम होने लगा है और उसे भी मजा आने लगा है। मैंने हौले से एक धक्का लगाया तो उसने भी अपनी चूत को अन्दर से सिकोड़ा। मेरा लंड तो निहाल ही हो गया जैसे। अब तो हालत यह थी कि कनिका नीचे से धक्के लगा रही थी। अब तो मेरा लंड उसकी चूत में बिना किसी रुकावट अन्दर बाहर हो रहा था। उसके कामरज और सील टूटने से निकले खून से सना मेरा लंड तो लाल और गुलाबी सा हो गया था।उईई. वो फिर रुक गया और धीरे-धीरे लण्ड अन्दर बाहर करने लगा…थोड़ी देर के बाद जब मुझे दर्द कम होने लगा तो मैंने अपनी टाँगें उसकी कमर के साथ लपेट ली और अपनी गाण्ड को हिलाने लगी…वो समझ गया… मैं उसका पूरा लण्ड लेने के लिए तैयार थी…तभी उसने एक जोर का झटका दिया और पूरा लण्ड मेरी चूत के अन्दर घुसेड़ दिया… अह्ह्ह्ह. मैंने कहा- ज्योति तो सो रही है और वो सात बजे से पहले नहीं उठेगी!तो आयशा मान गई और मैं योगी के पापा के कमरे में गया और वहाँ से दो कंडोम उठा कर ले आया ताकि आयशा को चोदने के बाद मुझे अपना लण्ड जल्दी में बाहर ना निकलना पड़े.

श्रेया ! कालोनी में टेनिस मैच होने जा रहा है ! क्या तुम खेल रही हो ??मैंने कहा- नहीं सर ! असल में सर … !यह फॉर्म भरो …मैं झुककर फॉर्म भरने लगी.

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धीरे-धीरे मैं मनीषा के वक्ष की तरफ बढ़ने लगा और उसका एक चूचा अपने हाथ और दूसरा अपने मुँह में ले लिया. बीच में अपने दोनों होठो से उसने मेरे गालों पर कई चुम्बन जड़ दिए, कई बार उसने गालों को काट भी खाया. मारवाड़ी देसी पिक्चर सेक्सीफ़िर मैंने अपना लंड उसकी चूत के मुहाने पर रखा और अंदर करने लगा, निधि की चूत कुंवारी होने के कारण काफी टाईट थी.

वो खिड़की से उतर के थोड़ी देर बाद चोरी से मेरे घर अंदर आ गई जिसके लिए मैंने पहले से ही दरवाज़ा खुला रखा था. तो वो बोली- ठीक है!और मैं एक पक्के खिलाड़ी की तरह उसको जकड़ कर उसके होंठ चूसने लगा ताकि उसकी चीख मेरे मुँह में दब के रह जाए और उसकी गाण्ड के छेद में उंगली करते हुए उसको और ज़्यादा गरम किया. तभी मुझे तान्या के पापा श्यामलाल की आवाज़ आई, शायद नौकरों ने तान्या के बेहोश होने की खबर श्यामलाल को कर दी थी, इसलिए मैंने वहाँ से निकलना ही ठीक समझा और तान्या से अगले दिन का कह कर वहाँ से निकल गया.

मैं सेंटर टेबल पर इस तरह झुकी थी कि वो मेरी चुंचियां अच्छी तरह देख सके… ऐसा ही हुआ… उसकी नजरें मेरी चुन्चियों पर गड़ गयी. उधर सुनील फ्लॅट का दरवाजा बंद करते ही … अपनी शर्ट और पैंट उतारता है और अपने बेडरूम में जाता है … जहाँ सोनिया पहले से ही उसका इंतजार कर रही है … पर अभी भी उसे पूरे कपड़ों में देखकर सुनील बहुत नाराज़ होता है और उसको भी अपने कपड़े उतारने के लिए कहता है.

मैं सिर्फ ब्रा और पेंटी में बाहर आई, सामने दर्पण में अपने आपको देखा तो सच कहूँ किसी सेक्सी लड़की की याद आ गई.

जल्दी से कुछ कर ! नहीं तो मैं मर जाऊँगी !”क्या करूँ बुआ ? खुल कर बोलो ना !”क्या बोलू बेशर्म. उसके होंठों का रस पीकर मेरे जिंदगी की प्यास चली गई। मैं उसे पूरे दस मिनट तक चूमता रहा था। फिर मैंने उसे बिस्तर पर लिटा दिया और आखिरकार जिस पल के लिए मैं तरस रहा था, जिस पल को सपनों में देख कर पचास बार अपना लंड हिलाया था वो पल आ गया।मैंने उसके स्तनों को कस के दबाया और चूसने लगा।शीतल- उफ्फ्फ ! हाए ! ओह ओह ओह…क्या बात है केदार ! तुम बड़े प्यासे लग रहे हो. दो इंच की चूत पूरी तरह चुदरी हुई और अब चुद कर फटने को तैयार थी और चौदू लौड़ा नन्ही चूत को चौद कर भौंसडी बनाने को तैयार था.

वीडियो सेक्सी फिल्में भेजो उनके लंबे नाखून मेरी पीठ में गड़ रहे थे।‘फाड़ दे… मेरी फाड़ दे आआह्ह!’उन्होंने मुझे कस के पकड़ा और वो झड़ने लगी… करीब दो मिनट वो झड़ती रही. कुछ ही देर में मैं झड़ने वाला था, मैंने उससे पूछा- अपना अमृत कहाँ गिराऊँ ?उसने झटपट मुझसे कहा- मेरे मोम्मों पर गिराओ !ऐसा कहकर वो लेट गई और मैंने उसके ऊपर चढ़कर चूचियों के बीच अपना सारा माल डाल दिया….

”ओह दीदी, आप के सामने तो मैं कुछ भी नहीं, पता नहीं जिज्जाजी आपको क्यूँ नहीं चोदते. मैंने राजू का लंड तैयार करते हुए उससे कहा,’चलो राजू तुम अपना अधूरा काम पूरा करो !’मेरी बात सुनते ही राजू हँसते हुए मेरे पीछे आ गया और बोला ‘क्यों नहीं मैडम अभी लो !!’अब सब लोगों ने अपनी अपनी पोज़िशन ले ली. मैं चुम्बन का मज़ा ही ले रहा था कि दीदी बोली- कब तक ऐसे ही तड़पाओगे ? अब तो चोदन शुरू करो !दीदी की चूचियों के रौंगटे खड़े हो गए थे….

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कुछ देर बाद उसने अपना पानी छोड़ दिया और मैंने अपना!फिर वो सीधी हो गई और मैं अब उसकी चूची को मुँह में लेकर चूसने लगा. वो शरमा गई और उसके गाल हल्के-हल्के लाल से हो गए।वो अंदर आ गई और मैंने गेट बंद कर दिया, अंदर आकर उसको पीछे से पकड़ लिया, अपने हाथ उसकी कमर में डाल दिए और उसके बदन की खुशबू लेने लगा। उसके बदन की खुशबू इतनी मस्त थी कि किसी को भी दीवाना बना दे. जिन लोगों को नहीं पता उन्हें मैं बता दूँ कि मिरांडा कॉलेज एक गर्ल्स कॉलेज है और वहाँ की ज्यादातर लड़कियों के लिए स्मोकिंग और ड्रिंकिंग तो आम बात है.

भीगे बाल… भीगे गाल… भीगे से होंठ… मेरा मन कर रहा था कि उन मुस्कुराते होंठों को चूम लिया जाये… चूस लिया जाय… पर हम बहुत लोगों के बीच में थे…मैंने लगभग फ़ुसफ़ुसाते हुए कहा,”आइ वान्ट टू किस यू !”यहाँ नहीं … इतनी भीड़ है… मेरे कज़िन लोग भी देख रहे होंगे !”हमारी तरफ़ कोई नहीं देख रहा है !”क्यों ना हम गोता लगायें?”गुड आइडिया !”हमने साँस भरी… गोता लगाया…. मरर गई… जान मैं…मैंने भी अपनी पूरी ताकत से धक्के लगाने शुरू कर दिए और जोर जोर से हांफ़ने लगा…वो भी चिल्ला रही थी…हम दोनों को सर्दियों में पसीना आने लगा…करीब 20 मिनट के बाद मैं झड़ गया और उसके ऊपर से उठ गया…मैंने कहा- जान मज़ा ही आ गया !वो बोली- अब तो और आएगा.

लगभग दस दिन बाद विक्की ने मुझे अपनी सुसराल चलने के लिए कहा, बोला कि तेरी भाभी को लेने चलना है!मेरे मन में तो जैसे लड्डू फूटने लगे.

अभी हमारी सुहागरात का पहला सप्ताह ही था, मेरी बीवी नीना मुझसे पूरी तरह खुल जाना चाहती थी ताकि वह् पूरी जिंदगी भरपूर चुदाई का मजा लेती रहे. पर कभी भी ऐसा नहीं हुआ कि उसकी तरफ से मुझे लगा हो कि यह दोस्ती से कुछ बढ़कर है… जो भी था केवल एक तरफा था. हेल्लो ! मुझे ठण्ड लग रही है…”मैंने उसे घर के भीतर लिया उसने भी अपनी चप्पल हाथ में ले ली ताकि कोई आवाज़ ना हो.

तीनों के ये बड़े-बड़े लंड … शहरी लड़कों के छोटे और पतले होते हैं पर ये तो विशाल आकार के लण्ड थे।एक ने अपना लंड मेरे मुँह में डाला और एक मेरे मम्मों को चूसने लगा।तभी एक झटका मेरी चूत पर लगा …. अन्दर घुसकर दरवाजा बंद किया तो तौलिया लपेटे अमित मेरे सामने आ गए, शायद नहाने जा रहे थे. हम दोनों की जीभ आपस में खेलने लगी !मैंने उसकी स्कर्ट को ऊपर करते हुए उसकी पैंटी के अन्दर हाथ डाल दिया.

सुनील स्वभाव से बड़ा ही चंचल है और थोड़ा मजाकिया किस्म का बंदा है पर उसको अब तक सोनिया के साथ कुछ भी करने का कोई मौका नहीं मिला है … हालांकि कभी-कभी मौका देखकर उसने सोनिया के अंगों पर हाथ ज़रूर फेरा है पर बहुत अनजान बनते हुए और ऐसे मौके पर सोनिया हमेशा ही घबरा सी जाती थी और कोई ना कोई बहाना करके वहाँ से निकल जाया करती थी.

भोजपुरी बीएफ सेक्सी भोजपुरी: उसकी गाण्ड से खून छलक गया… उसकी गाण्ड का छेद फ़ट चुका था… रानी इतनी थक गई थी कि चिल्ला भी नहीं सकती थी. अब्बास ने कब अपना पायजामा उतारा और कब अपने लण्ड को मोना के गाण्ड के पास फेरने लगा… मोना को कुछ खबर ही नहीं हुई.

उसने यह भी बताया कि देवरानी तो कभी कभार ही झड़ती है वरना उसे ही फ़ारिग होकर उतरना पड़ता है. मैंने तुरन्त भांप लिया कि दीदी की शंकित नजरें हमारा एक्स-रे कर रही थी… पर मुझे उससे क्या… चुद तो मैं चुकी थी… मैं भी तो आधी घर वाली हूँ ना… भले ही वो जलती रहे. उसकी नज़र बार बार मेरे लंड पर जा रही थी और मेरी उसकी दोनों चूचियों और चूत पर !मैंने सोच लिया कि मैं आज उसकी चूत के चिथड़े उड़ा दूंगा !और शायद उसकी भी यही इरादे थे……….

कोई पूछेगा लंच करने को तो कह दूगी आज कल वज़न ठीक रखने के लिए मैं दोपहर में खाना नहीं खाती…वेदांत : जब तुम्हें खाना खाना नहीं है तो क्यों ले के आओगी…मैं क्या अकेले हाल में जा के खाऊंगा…!!मैं: उफ्फ्फ ये लड़का… बस तू मुझसे कोई सवाल मत कर.

आप ठीक तो है न… मेम?तेल लगा दूँ…?वो पूरी रात मैं मेम की फटी हुई बुर पर तेल मालिश करता रहा…मेम, एक बात कहूँ…हाँ राजू बोलो!कहकर अपनी टांगें जोड़ ली और मुझे बिस्तर में बैठा लिया…छोटी मेम आइ लव यू…[emailprotected]. वो मेरा सारा माल पी गई।फिर हमने एक बार और चूत चुदाई का खेल खेला और वापस आ गए!अब मैं जब भी गाँव जाता हूँ तो रीना को अलग अलग तरीकों से चोदता हूँ जिस से उसे भी खूब मजा आता है!आपको मेरी कहानी कैसी लगी, मुझे मेल करें।[emailprotected]. फिर मैंने हल्के-हल्के अंदर डालना चालू किया और बीच-बीच में हल्का धक्का भी मार देता जिससे उसकी चीख निकल जाती.