बीएफ देहाती औरत

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Choot Malish Ki Ek Aur Grahakअपने सभी आदरणीय पाठकों का सादर आभारी हूँ और उनको सादर नमन करता हूँ।आप सबको मेरी कहानी उमा की चूत मालिश पसंद आई. हालाँकि ऐसा एक ही बार हुआ था। वो बात अलग है कि मैं पहले भी अपने एक्स-ब्वॉयफ्रैंड से जम कर चुदवाती रही हूँ. सबको प्रवेश-पत्र जो देने हैं।दीपाली गेट से जब बाहर निकली तो वो तीनों उसके पीछे हो लिए और बस चुपचाप चलने लगे।जब एक सुनसान गली आई तब दीपक ने हिम्मत करके अपने कदम तेज किए और दीपाली के बिल्कुल बराबर चलने लगा और उसकी तरफ देख कर मुस्कुराने लगा।दीपाली कुछ नहीं बोली और बस चलती रही।दीपक- दीपाली आख़िर बात क्या है.

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दादी एक छोटी बहन और सबसे बड़ा भाई है।मेरे पापा का देहांत 2 साल पहले हो गया था।यह घटना 6 साल पहले की है।मैं जून की छुट्टियों में अपने मामा के घर गई थी, मेरे साथ में मेरी छोटी बहन ऋतु भी थी।हम वहाँ दोपहर बाद पहुँचे। वहाँ जाकर हम मामी, नाना और नानी से मिले।मेरे मामा की 2 लड़कियाँ हैं ओर 2 लड़के. अपने प्रोग्राम के अनुसार मैं अगले दिन दोपहर को, जब मेरे पति दोपहर का खाना खा कर वापस ऑफ़िस चले गये, मैं अपनी कार में बैठ कर सुपर बाज़ार की तरफ रवाना हुई. मैंने उसको बताया कि अगले दिन मैं एक सुपर बाज़ार जा रही हूँ और वहाँ उसके द्वारा दिए गये चैलेंज़ को पूरा करने की कोशिश करूँगी.

साली रंडी मम्मी…मैम- तू अपनी रंडी मम्मी को चोदना चाहता है ना…मैं- हाँ मैं अपनी रंडी मम्मी को चोदना चाहता हूँ।मैम- अपनी रंडी मम्मी को गालियाँ दे… मादरचोद और रंडी मम्मी को बहुत सारी गालियाँ दे माँ के लौड़े. तो ये बात है प्रिया की चूत अपने ही भाई के लौड़े के लिए तड़फ रही है और उसने तुझे बलि का बकरा बना दिया।दीपाली- हाँ दीदी. कुछ नहीं होगा, पर सिर्फ मुझेइसको भी चोदना पड़ेगा।मानसी ने मना कर दिया- नहीं… मैं तुमको किसी के साथ नहीं बाँट सकती.

पर एक चीज थी जो उसे सारी लड़कियों से श्रेष्ठ बनाती थी।जहाँ पूनम के मोहल्ले की सारी लड़कियाँ शादी से पहले ही लण्ड खा चुकी थीं और अपनी बुर का भोसड़ा पहले ही बनवा चुकी थी, वहीं पूनम अभी कुंवारी थी।जहाँ बाकी लड़कियाँ बड़ी बेबाक थीं और लड़कों से बेधड़क बात करती थीं।वहीं पूनम बड़ी शर्मीली थी और अगर कोई लड़का उससे बात करना चाहता. जब पता चला कि अम्मी ने उसे मेरे लिए पसंद कर लिया और उसके वालिदान से बात भी कर ली।जब मेरी शादी हुई तो बहुतों के दिल टूटे, पर मैं खुश था कि चलो मेरी पसंद की लड़की से मेरी शादी हो रही है।शादी से पहले सम्भोग तो मैंने किया था, पर अपनी एक जुगाड़ की उसी ‘टाइम-पास’ लड़की के साथ 2-4 बार किया था।मेरी शादी हुई.

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बहुत कामुक लग रही थी।वो सही में किसी अप्सरा से कम नहीं थी।वो थिरकते और मदमाते क़दमों से मेरे पास आई और कहा- हाय श्लोक…मैं बस उसको ही देखने में ही मग्न हो गया था।उसने एक बार और कहा- हाय श्लोक…मेरा फिर ध्यान भंग हुआ और कहा- ओ… हाय.

मेरी मजेदार चुदाई की अगली क़िश्तहैलो दोस्तो, मैं आपकी कोमल एक बार फिर से हाजिर हूँ।देरी के लिए माफ़ी चाहती हूँ थोड़ी पढ़ाई की वजह से व्यस्त हो गई थी।मैं आप सबको धन्यवाद देना चाहती हूँ आपने मेरी पिछली कहानी ‘मुझे मजा आया’ पढ़ी और मुझे बहुत सारे मेल आए. हम दोनों होंठों से होंठों को मिला कर चुम्बन करते हुए एक-दूसरे से लिपटे जा रहे थे।मैं उसके मम्मों को दबा रहा था।कमरे में अंधेरा होने के कारण राज कह रहा था- बिजली के आने तक डान्स करते रहो. मैं कचरे में डाल दूँगी।दीपाली उसका हाथ पकड़ कर बाथरूम में ले गई और उसको अन्दर खड़ा करके पानी चालू कर दिया, उसके हाथ में साबुन दे दिया।दीपाली अच्छे पैसे वाले घर की थी। उसका बाथरूम काफ़ी बड़ा था। आम आदमी के कमरे से भी बड़ा था।दीपाली- बाबा तौलिया ये आपके दाहिनी तरफ़ खूंटी पर टंगा है। मैं दरवाजा बाहर से बन्द कर देती हूँ.

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वो किसी मजबूरी में नहीं बल्कि ख़ुशी से ये सब कर रही है।दीपाली के चेहरे पर ख़ुशी के भाव आ गए और वो विकास से लिपट गई।विकास- ये हुई ना बात अब चल जब तक अनुजा आए हम एक बार और खुलकर चुदाई का मज़ा ले लेते हैं.

’उसने एक्टिवा स्टार्ट की और मैं पीछे बैठ गया।मैं उससे ज्यादा सट कर नहीं बैठा था।दो मिनट में ही हम उसके घर पहुँच गए।उसका घर मोहल्ले के आखिर में था।वो किराए का एक कमरा और रसोई का मकान था।उस छोटे से मकान को भी उसने अच्छे से से सजा कर रखा था।घर में पहुँचकर उसने दरवाजा बंद कर लिया।उसने मुझे पलंग पर बिठाया और मेरे लिए पानी ले आई।पहली बार वो इस तरह किसी से मिल रही थी. मैं- और?मैम- तेरी रंडी… रंडी मम्मी, तेरी रखैल रंडी मम्मी, तेरी चुड़दकड़ रंडी मम्मी…मैं- और मैं कौन हूँ तेरा?मैम- मेरा मादरचोद रोहन बेटा. नहीं तो हम बाहर कैसे जायेंगे?तब तक माया के फ़ोन पर बेल बजी जो कि विनोद की थी। माया ने झट से फ़ोन रिसीव किया और स्पीकर ऑन करके बात करते हुए नाइटी पहनने लगी।उधर से विनोद बोला- क्या माँ.

और मैं भी तो यही चाहता था।एक साल पहले तक अपना हाथ जगन्नाथ से आज ये लौड़ा तीन-तीन चूतों का मालिक था।ये तीन वफादार चूतें तो थी हीं. चलो कमरे में चलते हैं।मैं भी उनके पीछे-पीछे चल दिया।दोस्तो उस दिन को याद करके आज भी मेरा लण्ड खड़ा हो जाता है. राजस्थान सेक्सी जबरदस्तऔर ज़ोर से करो…आहह…” मुझे भी जोश चढ़ गया और मैं दे-दनादन उसको चोदने लगा।अब कमरे मे सिर्फ़ हम दोनों की सिसकारियां और ‘पकचक.

मैं जाता हूँ, आप कब तक पहुँचोगे?मैंने कहा- मुझे शायद रात के 10 बज़ेंगे।रजनीश बोला- ओके दादा…रजनीश ने मेरे घर आने की तैयारी की लेकिन एक अलग सी खुशी उसके चेहरे पर आ रही थी… पता नहीं ये क्या था. ’वो एकदम से अकड़ कर फिर से झड़ गई उसके कामरस से मेरी ऊँगलियाँ भी भीग गई थीं जो मैंने उसकी पैन्टी से साफ़ कीं और फिर उसकी चूत को भी अच्छे से पौंछ कर साफ किया।फिर वो जब शांत लेटी थी तो मैं ऊपर की ओर जाकर फिर से उसके चूचों को चूसने लगा जिससे थोड़ी देर बाद वो भी साथ देने लगी.

जिसे या तो मैं समझ नहीं पाता या उसका उन्मुक्त स्वाभाव ही वैसा था।यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !दिसंबर की सर्दियों के दिन थे. मैं काफ़ी गर्म हो चुकी थी, मेरी आँखें बंद हुई जा रही थी और मुझे लगा कि मैं अपने झड़ने के काफ़ी करीब हूँ. नानू के पास… खाला की तबियत बहुत खराब हो गई है… कल रात को वापिस आयेंगे।यह सुनते ही मेरे हरामी दिमाग में फिल्म चलने लगी।मैं और बानू मेरी प्यारी बहन अकेले घर में पूरा दिन… पूरी रात… उफ्फ़!!!मेरे मुँह से निकला, ‘हाय तेरी मेरी स्टोरी.

मैं वापस गया तो उन्होंने कहा- मुन्ने का दूध गरम करके ला दोगे?तो मैंने कहा- जी अभी ला देता हूँ।मैं फटाफट रसोई में गया और एक बर्तन में दो गिलास दूध भरा और उसमें 5-6 चम्मच चीनी डाल दी।जब वो गर्म हो गया तो उसे हल्का सा ठंडा करके रख दिया।अब बारी थी मेरे मिशन की. मैं उसे लेकर अपनी ससुराल नोएडा उसे छोड़ने के लिए चला गया।वहाँ अपनी सौतेली माँ को देख कर वो उससे लिपट गई और रोने लगी।मैं अन्दर आकर मेरी बड़ी साली रिंकी से बातें करने लगा।वो दोनों माँ-बेटी आपस में क्या बातें कर रही थीं वो तो नहीं जान पाया, पर उसने अपने हाथ से नाप बताते हुए मेरी ओर इशारा किया तो मैं समझ गया कि यह मेरे औजार के बारे में बता रही है।मैं उसे छोड़ कर जाने लगा तो मेरी सास ने कहा- दामाद जी. मैं तो बस तेरी भलाई ही चाहती हूँ।अनुजा ने दीपाली को इस तरह ये बात कही कि दीपाली बहुत शरमिंदा हो गई और उसने अनुजा से माफी माँगी फिर सारी बात अनुजा को बता दी।अनुजा- हे राम तू लड़की है या क्या है.

मैं भी माया को चोदने की इच्छा रखते हुए बेसब्री के साथ उस दिन का इंतज़ार करने लगा।इसी इन्तजार में धीरे-धीरे हफ्ता हो गया।इस बीच मेरी और माया की लगभग रोज ही बात होती थी और हम फ़ोन-सेक्स भी करते थे।फिर एक दिन उसने मुझसे बोला- घर कल आना।तो मैंने मना कर दिया और अपनी बात याद दिलाई कि जब घर पर कोई नहीं होगा.

सो मैं इसके लिए मान गया कि एक बार मामी के साथ चुदाई करने में क्या जाता है।मामी ने चाची को हुकुम सुनाया- जमीला. लेकिन उस हरजाई ने पीछे से भी मेरी चूत में ही लंड डाला और झटके देने लगा।मुझे तो मानो नशा सा चढ़ गया मैं कुछ बोल ही नहीं पा रही थी.

चल, अब बता कल क्या-क्या किया और स्टोरी कैसी लगी?दीपाली इधर-उधर नज़रें घुमाने लगी।अनुजा- अरे इधर-उधर क्या देख रही है. और मैंने उसके मम्मों को चूस कर लाल-लाल टमाटर की तरह बना दिया।उसकी सीत्कारों से कमरा गूँज उठा था। फिर हम 69 की अवस्था में आ गए।मैं उसकी चूत को चाट रहा था और वो मेरे लंड को चूस रही थी… मेरे लंड को चूस कर उसने फिर से फौलाद का बना दिया था।मुझसे रहा नहीं जा रहा था… और वो भी अपनी चूत चटवाने से इतनी उत्तेजित हो गई थी कि एक बार उसकी चूत ने अपना पानी तक छोड़ दिया था।उसने कहा- अब और मत तड़पाओ मेरी जान. मेरा चिकना और सपाट पेट देख कर मेरी नाभि में ऊँगली घुमाने लगा…मेरी सिसकारियाँ निकलने लगीं।मैं ज़ोर से सिसक रही थी।उसका भी यही हाल था… उसने अपनी जीभ मेरे चिकने पेट पर फिराई.

बस उसे तो असीम आनन्द की प्राप्ति हो रही थी।वो ज़ोर-ज़ोर से चूत को मसलने लगी और बड़बड़ाने लगी।दीपाली- आह. नंगे मम्मे जैसे ही आज़ाद हुए, उनके आकार में बढोत्तरी हुई और मेरे सीने पर उन्होंने दस्तक दी।शायद नीचे मेरा लंड और थोड़ा लम्बा होकर थोड़ा और सख्त हो गया।अब मेरे हाथ उसके चूतड़ सहला रहे थे। वो कामुक हो चुकी थी, उसके और ज्यादा कठोर होते मम्मे इस बात की गवाही दे रहे थे।मैंने ज्यों ही पैन्टी के अन्दर हाथ डाल कर उसके गुप्तांग पर उंगली फिराई।कहानी जारी रहेगी।मुझे अपने विचारों से अवगत करने के लिए लिखें।. फिर मेरे गालों के दोनों ओर चूम कर अपने होंठों से पुनः मेरे होंठों का करीब एक मिनट तक रसपान करती रही।वो यूँ ही चूमते हुए धीरे-धीरे नीचे को बढ़ने लगी।इस काम-क्रीड़ा को आज पुनः स्मरण करके मैं खुद बहुत अधिक उत्तेजित हो गया हूँ और आज आपसे माफ़ी चाहता हूँ की मुझे मेरे प्यार की वादियों में कुछ पल बिताने की मोहलत दे दीजिए.

बीएफ देहाती औरत उसने मना कर दिया।उसके यहाँ कोई रिवाज था कि 6 महीने तक चूड़ा पहनते हैं।मैंने कहा- अब कौन सा रिवाज निभा रही हो. जब तुमने मुझे अपनी बाँहों में लिया था।मैंने कहा- मुझे पता है जान…तो उसने कहा- तुम्हें कैसे पता चला?मैंने कहा- जान.

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अन्दर तक खुज़लाहट मिटा देता है…चाची ने भी हँस कर मामी को गले लगाया और सलवार उतार कर मेरे ऊपर आ चढ़ बैठी और मामी से बोली- चल अब तू पहरेदारी कर।मामी पहरेदारी पर खड़ी हो गई और चाची ने मुझे अपने ऊपर ले लिया।मैं चाची को चोदने लगा।अब मेरे पास दो औरतें थीं. मैं मानसी के पास सट कर बैठ गया और उसके बालों में ऊँगलियाँ डाल कर उसको कस कर पकड़ लिया।कामातुर होकर मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख कर उसको बेहिसाब चूमने लगा।ऐसा करने से एक अलग ही नशा छा जाता है और सामने वाले को ये भी पता चल जाता है कि आज उसकी चूत. मेरा मन करता था कि साली को पकड़ कर चोद दूँ। लेकिन वो किसी और से प्यार करती थी और फैक्ट्री में उससे ही चुदती भी थी।मेरा मन करता था मैं उस वक्त चोद दूँ.

उसकी गाण्ड को चुभने लगा।मेघा मेरी तरफ देख कर मुस्कराने लगी लेकिन फिर से पोर्न देखने लगी।मैं समझ गया कि वो गरम हो रही है लेकिन मेरे पहल करने का इंतज़ार कर रही है।लेकिन… दोस्तो, आगे क्या हुआ मेरे और मेघा के बीच और किन-किन लड़कियों की मैंने चुदाई की. और ज़ोर से…करीब 15 मिनट तक वो मुझे ऐसे ही कुतिया बना कर चोदता रहा और फिर एक ज़ोर का धक्का मारके मेरी गाण्ड में ही झड़ गया।मुझे लगा कि जैसे मेरी गाण्ड में किसी ने गरम लावा डाल दिया हो।वो थक कर मेरी गाण्ड के ऊपर ही लद गया। मैं भी 30 मिनट की जबरदस्त चुदाई से थक गया था।फिर उसने अपना लण्ड निकाला और मेरी बाजू में लेट गया. सेक्सी मराठी फुल सेक्सअब मैंने उसे खड़ा किया और उसकी स्कर्ट उतार दी और जब पैंटी उतारने लगा तो नेहा बोली- पहले तुम अपने कपड़े उतारो।मैंने तुरत अपने कपड़े उतार दिए।मेरा 8 इंच का लंड बिल्कुल तन्नाया हुआ खड़ा था।वो बोली- आह.

मेरी चोरी जो पकड़ी गई थी।रूचि ने आगे बताना चालू किया।एक दिन जब हम आशीष के घर पहुँचे तो बारिश की वजह से हमारे कपड़े भीग गए थे.

मस्त है।’‘चाटो… और चूसो… उम्म्म्म…’वो फिर से लंड चूत में डाल कर चोदने लगा।मैं सिसकारियाँ लेती हुई फिर झड़ गई।फिर इसी तरह मेरी हर शाम अंकित के साथ रंगीन होने लगी।यह मेरी पहली कहानी है लेकिन सच है।आपको कैसे लगी, ज़रूर बताना। फिर मैं बताऊँगी कि कैसे मैंने अपने देवर को पटाया।. इस बीच वो दो-तीन बार झड़ चुकी थी।उनको काफ़ी देर इस तरह से चोदने के बाद मैं झड़ने ही वाला था और जब मेरा पानी छूटने वाला था.

तो मैंने अपनी चारपाई मामी के करीब ही डाल ली और लेट गया।अब मैं सभी लोगों के सोने का इंतजार करने लगा।लगभग 11 बजे मामी ने मेरे हाथ में चिकोटी काटी. आप बेफिकर रहो।दीपाली को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि आख़िर क्या हो रहा है।उसने जब अपनी मम्मी से बात की तब उसको समझ आया और उसने भी ‘हाँ कह दी- आप बेफिकर होकर जाओ दीदी बहुत अच्छी हैं. अब कल चुदाई करेंगे…मैं- ओके मम्मी…अब मैं तुम्हें कल चोदूँगा।मैम- ओके बेटा।मैं- बाय मम्मी।मैम- बाय बेटा।आपके प्यारे कमेंट्स के लिए मुझे ईमेल करें।यह मदमस्त कहानी जारी है।.

कुतिया बहुत नाटक कर रही थी।इतना बोल कर भाई अपने कपड़े निकालने लगा। धीरे-धीरे वो पूरा नंगा हो गया, उसका 6 इन्च का लौड़ा एकदम तना हुआ मेरी आँखों के सामने लहरा रहा था।मैं घबरा गई और जल्दी से पलट गई यानि पेट के बल लेट गई।विजय- अरे वाह.

मैंने उनको बिस्तर पर लिटाया और उनके जिस्म को चूमने लगा। थोड़ी देर बाद जैसे ही मैंने उनकी चूत के दाने को अपनी ज़ुबान से चाटा तो वो एकदम से अपनी गाण्ड मटकाने लगीं।फिर तो मैं उनकी चूत को रस ले-ले कर चूस और चाट रहा था।अब तो मैं एक तरह से अपनी ज़ुबान से उनकी चूत चोद रहा था।सुनीता जी अपनी गाण्ड उचका-उचका कर अपनी चूत चटवा रही थीं।वो बोलीं- अब देर ना करो और अपना लंड मेरी चूत में पेल दो. तुम कौन सा अपने अंकल की तरह बूढ़े हो गए हो…मैंने उनकी तरफ देखा और वे हँस कर चली गईं।अब वे मुझे हर आधे घंटे में एक पैग देने लगीं और अब तो व्हिस्की ज्यादा पानी कम होता था।काम के खत्म होते-होते व्हिस्की ने अपना करतब दिखा दिया।अब मैं कपड़े बदल कर ऊपर आया तो आंटी रेस्टोरेंट बंद करके बोलीं- आज तू हमारे घर चल. दो मिनट तक मुझे निहारता रहा।फिर अचानक से उसने मुझे पास खींच कर मेरे मुँह पर अपना मुँह रख दिया और चूमा-चाटी करने लगा।वो चुम्बन करते-करते मेरे होंठ भी काट रहा था।पाँच मिनट हो चुके थे लेकिन आनन्द अपना मुँह मेरे मुँह से निकाल ही नहीं रहा था।कुछ देर बाद मेरे बदन में भी कुछ-कुछ होने लगा, मैं भी आनन्द को चुम्बन करने लगी.

बिहारी लड़की की सेक्सी फिल्मखास करके अपनी गाण्ड पर लगाई।फिर रेजर से पूरे शरीर के बाल निकाल दिए।अपने चिकने बदन को देखकर मैं खुद ही शर्मा गया. रूपा सिसक उठी और प्यासी नज़रों से मुझे देखने लगी।उसकी चूत गीली थी।चूत की गहराई नापने के लिए मैंने हाथ की एक ऊँगली रूपा की चूत में घुसा दी।मेरी ऊँगली के घुसते ही रूपा मचलने लगी और सिसयाने लगी- आ आ भाभी रे.

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दोस्तो, एक बार फिर से मैं समर हाज़िर हूँ आपके साथ इस कड़ी की चौथा भाग लेकर!मुझे यकीन है कि आप लोगों को मेरी पिछली कहानियाँ पसंद आई होंगी. मैंने उसे अच्छे ढंग से हल किया और फिर वो मेरे पास बैठ गई और बोली- आप इतना शर्माते क्यों हो?मैंने कुछ नहीं बोला. 30 का वक्त हो गया, पर तूफान रुकने का नाम नहीं ले रहा था।उसने अपने घर पर फोन करके बता दिया कि वो अपनी सहेली के यहाँ पर है, जैसे ही तूफान रुकेगा वो आ जाएगी।तो उसके पापा ने कहा- नहीं… तू सुबह ही आना।फिर हम लोग सोने के लिए जाने लगे।मैंने कहा- मैं नीचे कालीन पर सो जाता हूँ तुम बिस्तर पर सो जाओ।तो उसने कहा- नहीं या तो दोनों ऊपर सोयेंगे या नीचे.

मैं अन्दर गया तो उसका घर भी अच्छा था, उसने मुझे सोफे पर बिठाया, मैं बैठ गया तो वो पानी लेकर आई।मैंने पूछा- आप अकेली रहती हैं?तो बोली- हाँ. मैं भी मन ही मन खुश हो रहा था और मैंने उनके आँसुओं को पोंछा और मैं उनके कपड़े उतारने लगा।उसके बाद मैंने उनसे बोला- मैं जो भी करूँ आप मेरा साथ देती रहना. मैं उनके कमरे में गया मैंने दरवाजे पर दस्तक दी, तो किसी ने कुछ जवाब नहीं दिया।एक-दो बार ज़ोर से खटखटाने पर उस लड़की ने दरवाज़ा खोला और बोला- ‘सॉरी’ मैं हेड-फ़ोन्स लगा कर गाने सुन रही थी.

मेरा तन्नाया हुआ लौड़ा देख कर उसकी चूत में भी चींटियाँ तो निश्चित रेंगने लगी होंगी।फिर वो उसे लुंगी से ढकने की कोशिश करने लगी।लेकिन लुंगी मेरी टाँगों से दबी हुई थी इसलिए वो उसे ढक नहीं पाई।अपने विचारों से अवगत कराने के लिए लिखें, साथ ही मेरे फेसबुक पेज से भी जुड़ें।सुहागरात की चुदाई कथा जारी है।https://www. मेरी उम्र 18 साल है। मैं दिखने में भी अच्छा हूँ।मैं अपनी पहली कहानी लिख रहा हूँ और मुझे यह बताने की जरूरत नहीं है कि यह सच्ची है. मुझे शक तो था ही लेकिन अब यक़ीन हो गया कि हसन भाई मुझे मुहब्बत करते हैं।मेरे दिल को थोड़ी खुशी भी हुई लेकिन फिर मैंने एकदम से कहा- ये आप क्या कह रहे हैं? मैंने कभी उन्हें इस नज़र से नहीं देखा और वो मेरे चाचा की तरह हैं.

इसलिए मैंने एक केला लेकर हाथ से उसकी चूत को शांत किया।फिर उसी दिन शाम को फिर एक बार हम रोमान्स करने लगे. फ्री हो क्या अभी…?दीपक- अरे यार एकदम फ्री हूँ और अगर नहीं भी होता तो तुम्हारे लिए सब काम छोड़ कर फ्री हो जाता.

मैं उसकी तरफ ही देखता रहा तो मुझसे बोली- अन्दर आ जाओ या बाहर ही खड़े रहोगे?मैं अन्दर गया और उसे पैकेट पकड़ाते हुए उसका हाथ पकड़ लिया।वो बोलने लगी- आज नहीं.

चलो इसको जाने दो…दीपाली ने एक नज़र मैडी को देखा जैसे उसका शुक्रिया अदा कर रही हो।मैडी- दीपाली मैं इनको ले जाता हूँ. देसी एचडी सेक्सी फिल्मकोई बात नहीं। तुम क्या करते हो?मैं- मैं एक स्टूडेंट हूँ।मैम- ओह्ह गुड मैं भी एक टीचर हूँ।अब मैंने बिल्कुल खुली बात करना ठीक समझा।मैं- क्या आपने अपने किसी स्टूडेंट के साथ चुदाई की है?मैम- तुमको किसी महिला से इस प्रकार के सवाल नहीं करने चाहिए। तब भी मैं तुमको अपने दिल की बात बताना चाहती हूँ कि मैं आजकल एक लड़के से चुदने की सोच रही हूँ।मैं- क्यों. सेक्सी वीडियो किन्नर वालाफिर धीरे-धीरे नीचे होता गया और उसकी नाभि को चूमते हुए मैं उसकी चूत पर पहुँच गया।जैसे ही मैंने उसकी चूत चूसी. इसलिए दोपहर को ही पढ़ा सकता हूँ।उस वक्त जब अंकल नहीं होते थे।मैंने बॉस से झूठ बोल कर छुट्टी ले ली।अगले दिन का मुझे बेसब्री से इंतज़ार था.

उनकी रसभरी चूचियों को दबा देता था… चूतड़ों को सहला देता था, मैं उनके साथ बहुत मज़ा ले रहा था।अब मेरा जन्मदिन आने वाला था.

उसने भी मुझे देखा और अपनी बाँहें एक बार फिर मेरी तरफ बढ़ा दीं।मैंने उसको फिर से सहारा दिया और उसको वापस उसके बिस्तर तक ले आया चाहिए।इसके बाद मैं उसके घर से चला आया।अब जब कुछ दिनों के बाद दूसरी बार मैं उससे मिलने आया, तब शाम के 8 बज चुके थे. सो मेरी जान में जान आई।मैंने उसका मुँह अपने होंठों से बंद कर दिया और हौले-हौले से उसकी चूची दबाने लगा।वो बोली- दर्द हो रहा है. चोदो मेरी चूत को अपनी जीभ से…’मुझे भी पूरा जोश आ गया और भाभी की चूत में जल्दी-जल्दी जीभ अन्दर-बाहर करते हुए उसे चोदने लगा।भाभी अभी भी ज़ोर-ज़ोर से कमर उठा कर मेरे मुँह को चोद रही थीं।मुझे भी इस चुदाई से का मज़ा आने लगा।मैंने अपनी जीभ कड़ी करके सीधी कर ली और सिर आगे-पीछे कर के भाभी की चूत को चोदने लगा।भाभी का मज़ा दोगुना हो गया।वे अपने चूतड़ों को ज़ोर-ज़ोर से उठाती हुए बोलीं-और ज़ोर से लाला.

फिर थोड़ी देर बाद वो बोली- अब तुम लेट जाओ।तो मैं लेट गया, वो मेरे पास आकर मेरे लंड को चूसने लगी और फिर लंड पर तेल लगा कर लेट गई और मुझसे बोली- अब ये लंड मेरी चूत में पेल दो।तो मैं उनको चोदने की तैयारी में उकडूँ बैठ गया और लौड़े का सुपारा उनकी चूत की लकीर पर फेरा और उनके इशारे का इन्तजार करने लगा।वो बोली- मैं चाहे जितना भी चिल्लाऊँ. सिर्फ़ मेरे अनुभवों को आपके साथ साझा कर सकता हूँ।मैं सिर्फ़ आपकी चूत और लंड से पानी निकालने के लिए अपनी कहानी लिखता हूँ।कई मित्रों के ईमेल मुझे मिले. जिससे उसकी मदहोशी और बढ़ती ही चली जा रही थी।उसे इस क्रिया में बहुत आनन्द आ रहा था जो कि उसकी बंद आँखें और मुस्कराता चेहरा साफ़-साफ़ बता रहा था।यहाँ मैं अपने पूर्ण आत्म-विश्वास के साथ पाठकों को ये बताना चाहूँगा… यदि उनकी कोई गर्लफ्रेंड या पत्नी है या लड़कियों का कोई बॉयफ्रेंड या पति है.

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हर तरह के सांचे में ढल जाए मानो…मुझे तो उसने अपनी खूबसूरती का कायल ही कर दिया था।जब मेरी नज़र उसके ब्लाउज से झांकते स्तनों को निहार रही थी. आज मेरी मुराद पूरी हो गईईइ… ऊऊह ऊओह्ह मेरा होने वालाआ हैईई ! और ज़ोर सेईई…मैं उनके पूरे बदन को चूम रहा था, काट रह था. कभी वो लंड निकाल कर चूत में डालता तो कभी गाण्ड में पेल देता।मुझे इसमें बहुत मजा आ रहा था।अब उसने फिर गाण्ड में डाला और जोर-जोर से चोदने लगा और दो मिनट बाद मेरी गाण्ड में ही झड़ गया।मैं बहुत संतुष्ट थी.

वो अब मेरे सामने थी।अब आप लोगों को ये लगता होगा कि अब ये ऐसा कहेगा कि क्या लग रही थी यारो!उसके 34 के मम्मे 28 की कमर 36 के चूतड़.

जो उसके लिए पानी में आग लगाने के बराबर हुई।वह बिन पानी की मछली की तरह तड़प गई।कुछ देर करने के पश्चात उसके निचले हिस्से में मालिश दी.

दीपक ने प्रिया को बाँहों में भर लिया और उसके होंठ चूसने लगा।प्रिया भी उसका साथ देने लगी।दीपाली वहीं खड़ी उन दोनों को देख कर मुस्कुराने लगी।काफ़ी देर बाद दोनों अलग हुए. मैं ठीक वक्त पर आ गया… क्या घर में कोई नहीं है?प्रिया- नहीं है, सब आउट ऑफ इंडिया रहते हैं मैं अकेली ही रहती हूँ जी।मैं- ओह. ब्लू सेक्सी बहन भाईमैं बहुत प्यासी हूँ।फिर मैंने अपना लण्ड भाभी की चूत पर लगाया और एक जोर का झटका दिया और लण्ड भाभी की चूत में आधा अन्दर घुस गया।भाभी की मुँह से बहुत तेज चीख निकल गई।मैंने उनके मुँह पर हाथ रख दिया, फिर एक और झटका मारा, भाभी की आँखों से आँसू निकल आए।मैं थोड़ी देर रुक गया।थोड़ी देर बाद भाभी ने कहा- अब दर्द थोड़ा कम है अब धीरे-धीरे करो.

जब मैं उसे उठाए हुए था… धीरे-धीरे उसके जिस्म से मेरी छेड़छाड़ बढ़ने लगी।एक-दो बार मैंने उसे बाँहों में भी भरा, वो थोड़ा शरमाई भी. सो मैंने अपने आप को कण्ट्रोल किया और उसे बिस्तर पर लिटा कर चुम्बन करने लगा और मम्मों को दबाने लगा।वो एकदम पागल हो रही थी और बुरी तरह से सीत्कार रही थी- अह्ह्ह अमित. वो तो जैसे मेरे बदन से चिपक ही गई और मेरे कपड़े नोंचने लगी।मैंने भी उसेके कपड़े निकाले और कुछ ही देर में हम दोनों अंतवस्त्रों में थे।अब धीरे-धीरे मैंने उसकी ब्रा और पैन्टी भी निकाल दी और पूरे बदन को चूमने लगा.

उस उम्र में लगाव बड़ी जल्दी से होता है।जबकि उसे मुझसे कोई खास लगाव नहीं हुआ था, उसे मेरा चोदने का तरीका पसंद था बस. मेरा मतलब मासिक धर्म जो हर महीने आता है।दीपाली- हाँ दीदी इसका मुझे पता है लेकिन जब मैं 13 साल की थी मुझ पेट में बहुत दर्द हुआ.

बच्चा रह जाएगा।मगर उस समय मुझे कुछ दिमाग में सूझ ही नहीं रहा था और मैंने करते-करते पूरा रस दिव्या की बुर में ही छोड़ दिया।दिव्या ने मुझे कस कर अपनी बाहों में भर लिया।कुछ देर बाद मैंने दिव्या की पप्पी लेनी शुरू कर दीं। हम दोनों एकदम तृप्त हो गए थे।बाकी की बातें आपको बाद में बताऊँगा कि आगे हमने क्या-क्या किया।आपके विचारों का स्वागत है।.

अगर लड़की पहले से चुदी हुई हो और अपनी मर्ज़ी से चुदवाए तब ज़्यादा के साथ चुदने में मज़ा आता है।दीपाली- सच में दीदी… लेकिन 5 कुछ ज़्यादा नहीं हो जाते हैं…अनुजा- हाँ 5 ज़्यादा है. आपका जिस्म कितना गर्म है।मैंने उसके पूरे जिस्म को गर्म कर दिया था और वो मादक सिसकारियाँ भर रही थी।फिर मैंने उसकी पैन्टी में हाथ डाला और उसकी चूत को सहलाने लगा। जब मैंने चूत को छुआ तो देखा कि उसकी चूत पानी से एकदम तर थी और चोदने लायक थी।मैंने सोचा कि अब इसकी चुदाई करनी चाहिए. वैसे भी ऋतु से मेरा मन भर रहा है…उसने कहा- इसका मतलब ऋतु की भी लेते हो…मैंने उसे डांटते हुए कहा- हाँ.

सेक्सी सिस्टर की चुदाई फिर माया के दिमाग में पता नहीं क्या सूझा वो उठ कर गई और फ्रिज से बर्फ के टुकड़े ले आई।यार सच कहूँ तो मेरी समझ में कुछ भी नहीं आ रहा था कि ये सब क्या करने वाली है।फिर उसने मेरे लंड को पकड़ कर उसकी अच्छे से सिकाई की. बल्कि वो भूखी शेरनी की तरह वासना की आग से तड़पती हुई मेरी गर्दन और छाती को चूसने और चाटने में लगी हुई थी।फिर मैंने धीरे से अपने पैरों को सिकोड़ लिया और उसकी छाती पर ही बैठ गया ताकि वो कुछ भी न कर सके।वो जब तक कुछ समझ पाती.

आप बेफिकर रहो।दीपाली को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि आख़िर क्या हो रहा है।उसने जब अपनी मम्मी से बात की तब उसको समझ आया और उसने भी ‘हाँ कह दी- आप बेफिकर होकर जाओ दीदी बहुत अच्छी हैं. तू जा आज मैं अपनी प्यारी बहन को दिल खोल कर चोदूँगा और तुझे भी बड़े आराम से फ़ुर्सत से चोदना चाहता हूँ. ज़रा सहलाओ ना…’मैंने ब्रा के ऊपर से ही उनकी चूचियों को सहलाना शुरू किया।भाभी ने मुझसे हाथ ब्रा के कप में घुसा कर सहलाने को कहा और मेरा हाथ ब्रा के अन्दर कर दिया।मैंने अपना पूरा हाथ अन्दर घुसा कर ज़ोर-ज़ोर से उनकी चूचियों को रगड़ना शुरू कर दिया।मेरी हथेली की रगड़ पाकर भाभी के निप्पल कड़े हो गए।उनके मम्मों के मुलायम माँस के स्पर्श से मुझे बहुत अच्छा लग रहा था.

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आप रिसेप्शन पर चाबी छोड़ देना।वो निकल गया।अब होटल में सिर्फ मैं ही रह गया था, मैं खुश हो गया।फिर मैंने स्वीटी को होटल चलने के लिए कहा, पर उसने मना कर दिया।उसने बोला- वो बहुत दूर है। मैं घर कैसे आऊँगी।मैंने कई बार कई तरह से कह कर देख लिया, पर वो टस से मस नहीं हुई।मैं सोचने लगा क्या करूँ. वो मेरे सीने से चिपकी हुई थी और मैं उसकी रेशमी ज़ुल्फों से खेल रहा था।रिंकी ने एक बार फिर मेरे लण्ड को हाथ से पकड़ लिया।उसके हाथों के स्पर्श से फिर मेरा लण्ड खड़ा होने लगा. एक भी बाल नहीं था। शायद उसने आज ही बाल साफ किए थे।मैंने उसकी चूत में एक ऊँगली की, तो वो सिसकारी भरने लगी- आह आह्ह.

इसलिए और लोगों को जाने दो।इससे आगे की कहानी मैं अगले भाग में आपको बताऊँगा।मुझे आपकी प्रतिक्रियाओं का इन्तजार रहेगा।FB Page: https://www. मैं उसे होंठों पर चुम्बन करने लगा।पहले तो उसने थोड़ा विरोध किया लेकिन बाद मैं वो मेरा साथ देने लगी। मैं उसे गोद में उठा कर कमरे में ले आया और उसे बिस्तर पर लिटा दिया। उसके विरोध न करने से ये तय हो चुका था कि उसका मन भी चुदने का था।हम दोनों एक-दूसरे को चुम्बन करने लगे। मैंने उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया.

फिर मैंने अपनी टी-शर्ट और पजामा भी उतार दिया और उसकी पैन्टी के ऊपर से ही उसकी चूत पर चुम्बन करने लगा।उसकी पैन्टी पूरी गीली हो गई थी।वो बहुत मादक आवाजें निकाल रही थी.

मैं उठा और अपनी पैन्ट उतार दी और अपने 6 इंच के लंड को उसके हाथ में दे दिया।उसने बड़ी हैरत से मेरा लवड़ा देख कर उसको सहलाने लगी।मैंने उसे मुँह में लेने को कहा तो वो मना करने लगी लेकिन मेरे थोड़ा ज़ोर देने पर मान गई।अब हम 69 की अवस्था में हो गए।वो मेरे लौड़े को अपने मुँह से चूसने लगी और मैं उसकी चूत को जीभ से चोदने लगा।इससे वो पूरी तरह से गर्म हो गई. मैं उसके पास गया और उसके होठों को अपने होठों से मिला लिया और लगभग दस मिनट तक हम एक दूसरे को चूमते रहे।फिर उसने मेरे शर्ट को उतारा और मेरे सीने पर सिर रख कर बोली- तुम भी बहुत चाहते हो ना मुझे. अजीब सी लय के साथ उसकी साँसे चलने लगीं।उसके दोनों उरोजों को मसलने से उसका उत्तेजित होना स्वाभाविक था।मैं भी उत्तेजित हो उठा था।मेरी चड्डी सफ़ेद थी.

वो अपनी कमर उठा-उठा कर लंड को अन्दर लेने की कोशिश कर रही थी।मैंने फिर एक ज़ोर के झटके के साथ पूरा लंड उसकी चूत में ठेल दिया।उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं।शायद उसकी सील टूट गई थी. मैं और प्रीतेश एक हो जाते हैं।प्यारे दोस्तो, आप सभी के मैंने ईमेल पढ़े हैं, पर एक भी ईमेल में रिस्पेक्ट वाली बात नहीं थी और मेरा कहना यह है कि यहाँ अन्तर्वासना पर जिसने कहानी लिखी तो इसका मतलब कभी भी यह नहीं होगा कि ये लड़की किसी के भी साथ कुछ कर लेगी।मेरे दोस्त आप ग़लत हैं आप. पर पायल ने ऐसा तो क्या कह दिया कि मानसी को पसीना आने लगा।मानसी फोन पर हड़बड़ाने लगी।मानसी- नहीं नहीं.

दीपाली की चूत से दीपक का वीर्य बह कर बाहर आ रहा था। उसके साथ दीपाली का भी चूत-रस मिक्स होकर आ रहा था।दीपक ना चाहते हुए भी वो चाट रहा था.

बीएफ देहाती औरत: उउफ़्फ़’ की आवाज फैल रही थी।उसने मेरी चूचियों को अपने मुँह में भर कर चूसना चालू कर दिया और नीचे से मेरी चूत में उसके लौड़े के धक्के. मैं बिना समय गंवाए उसके ऊपर चढ़ गया और एक बोबे को मुँह में लेकर पागलों की तरह चूसने लगा।उसने कहा- अभी तो पूरी रात बाकी है आराम से.

खाना बनाना आता है या नहीं?फिर नाश्ता वगैरह करने के बाद वे चले गए।तब मेरी जान में जान आई।उनके जाते ही मैं माँ से बोली- मुझे लड़का पसंद नहीं है और मैं उसके साथ शादी नहीं करूँगी।माँ कुछ नहीं बोली… लेकिन मेरी किस्मत खराब थी।दो दिन बाद उनका मैसेज आया कि उन्हें लड़की पसंद है. क्या आप बता सकते हो कि साइज़ कैसे पहचानते हैं।तो दीदी ने पूछा- गर्लफ्रेंड की काया दिखने में कैसी है?मैं बोला- थोड़ी-थोड़ी आपके जैसी. अब मैं बिल्कुल नंगी उसके सामने पड़ी थी।वो मेरे मम्मे दबाने लगा और फिर चूसने लगा…मेरे चूचियाँ लाल हो गईं.

वो बस दोनों को देख रहा था।फ़ोन रखने के बाद विकास ने अनुजा से पूछा- क्या हुआ?अनुजा- मेरे राजा आपकी किस्मत बहुत अच्छी है.

सर अब मुझ पर लेट कर मेरे मुँह पर अपना मुँह रख कर चुम्बन करने लगे और अपना लन्ड मेरी चूत पर सैट कर दिया और मेरी चूत पर धीरे-धीरे लंड को फिराने लगे।और अचानक… मेरे मुँह से एक जोर की कराह निकल पड़ी- आआ. दर्द पूरी तरह मिट जाएगा।तीन पैग के बाद वो मस्त होने लगी।वो उठ कर रूपा को चूमने लगी और फिर उसकी चूत चाटने लगी।रूपा ने भी नीलम की चूत को खूब चाटा और चूसा।इस बीच नीलम फिर एक बार झड़ गई. आप बिस्तर पर सो जाओ, मैं नीचे सो जाता हूँ।थोड़ी सी नानुकुर के बाद वो ही हुआ जो मैं चाहता था।चाची ने बोला- समीर हम दोनों ही बिस्तर पर सो जाते हैं।फ़िर हम दोनों बिस्तर पर लेट गए। चाची तो थोड़ी ही देर में सो गईं… पर मेरी आंख से नींद कोसों दूर थी।मैंने भी सोने का नाटक करके चाची के बदन को सहलाना शुरू कर दिया।उनकी नाइटी भी अस्त-व्यस्त हो चुकी थी.