90 साल की बीएफ

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बीएफ कंडोम: 90 साल की बीएफ, अनिल उसके दूधों को मुंह में भर कर पीने लगा और मैं उसकी चूत को चाटने लगा.

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एक दिन मैं योग कर ही रहा था कि उसी समय अपने कपड़े सुखाने के लिए आ गई. xxx video हिंदीजब हम वापिस घर जाने लगे तो शिवानी ने कहा- यार, ऐसा प्रोग्राम हर महीने में एक बार बनाया करो.

मैंने कार वापस घुमाई, मुझे पापा की बात याद आने लगी। शायद मेरी इस गलती की वजह से उन्हें कॉन्ट्रेक्ट गंवाना पड़ सकता था। मैं अपने आपको कोसने लगी, एक काम भी ठीक से नहीं कर सकती तुम।मुझे नितिन के बारे में भी बुरा लग रहा था, मैंने उसकी ओर देखा तो वह ग़ुस्से में बैठा था। शायद अभी तक उसने ऑनलाइन कंप्लेट नहीं की थी. सेक्सी ऑंटी बीपीफिर मैंने उससे कहा- वैसे तू अभी किसके साथ बात कर रही थी और मुझे देखकर कॉल कट कर दिया?वो बोली- एक नया मिला है.

मुकुल राय उसकी गान्ड नीचे पलंग पर कर देता है, दरार को फिर से अलग करता हुआ अपनी जीभ उसके सूराख पर लगाता है और पूरी दरार की लंबाई चाट जाता है.90 साल की बीएफ: शबनम निहाल हो गयी … क्या मजा आ रहा था … दूसरे से चुदवाने का आनंद ही कुछ और हैपूरा कमरा कामुकता भरी सीत्कारों से भर गया … दस पंद्रह मिनट के घमासान के बाद राजीव ने शबनम से पूछा- मेरा होने वाला है … कहाँ गिराऊं?शबनम बोली- अंदर ही गिरा दो, हम सबने पिल ले रखी है.

वह बुरी तरह मेरे ऊपर चढ़ बैठा, बोला- दिखाना ही पड़ेगा!इस पकड़ धकड़ में उसके लंड की ठोकरें मेरी गांड पर पड़ रहीं थीं, मुझे मजा दे रहीं थीं.अब मालिश की बारी थी उस हसीन सी फांक की, जो हल्के से मुँह खोले हुए गुलाबी रंग के होंठों को लिए हुए फड़क रही थी.

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उस समय 4-5 बार ज्योति की नज़रें मुझसे मिलीं, पर मैंने नज़रें चुरा लीं.अभी पैसेन्जर ट्रेन चल रही थी कि मेरे मोबाइल पर घंटी बजी, देखा तो गुप्ताइन का फोन था.

अंकल ने बोला- अरे सीमा, तुझे ठंड लग जाएगी, जल्दी जा बाथरूम में और कपड़े बदली कर ले. 90 साल की बीएफ महेश ने कमरे में दाखिल होते ही दरवाज़ा अंदर से बंद कर दिया।नीलम उस वक़्त सिर्फ नाईट ड्रेस पहन कर लेटी हुई थी.

नीता ने एक खीरा रेखा की ओर उछाल दिया और अपना खीरा अनीता की चूत में घुसा दिया.

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जब आंटी काफी गर्म हो गई तो आंटी के पैर ने हल्का सा दबाव मेरे लंड पर बनाना शुरू कर दिया. वो भी दो मिनट तक वहीं खड़ा रह कर अपना लंड चुसवाता रहा और फिर उसने लंड निकाल लिया. उन्होंने कहा कि काम ज्यादा है और फैक्ट्री का मालिक 2 दिन के लिए बाहर गया है, तो फैक्ट्री का सारा काम टाइम पे खत्म करवा के सारा डाटा लोड करना है.

हम लोग एक रेस्टोरेंट में गए, वहां लंच किया और शाम को 4 बजे तक वापस आ गए. ” नीलम फिर से गर्म होते हुए अपने चूतड़ों को उछालते हुए बोली।सही कहा बेटी, यही बात तो मैं तुम्हें समझाना चाहता था” महेश ने अपनी बहू की तरफ देखा और उसकी चूत को बड़ी तेज़ी और ताक़त के साथ चोदने लगा। ससुर बहू की चुदाई का खेल अपने चरम पर था. मैंने एक सिगरेट जलाई और उसकी तरफ धुंआ छोड़ते हुए पूछा कि पिछवाड़े की तरफ से करूं.

भला मैं कब पीछे रहने वाला था, मैं तो खुद कब से इस ताक में था कि ये भाभी कब मेरे हाथों का निचोड़ पाएं. फिर मैंने उसे कुतिया बना दिया और उसके पीछे जाकर अपना लंड एक ही शॉट में पूरा अंदर डाल दिया. मैंने आंटी की गांड को अपने हाथों से पकड़ लिया और जोर से अपने लंड पर पटकने लगा.

जैसे ही मैंने चुम्मा तोड़ा, उसकी आँखें खुल गयी और उनमें लाल डोरे खिंच से गए थे. मित्र के साथ काफी समय घूमने के बाद मित्र जिद करने लगा कि आज रात का खाना हम दोनों उनके साथ चलकर उनके घर खाएं.

उसी वक्त मुझे मनु की बात याद आ गयी, जब उसने कहा था कि तुम्हारे जैसी खुद लंड को अपनी चूत में डालती हैं.

लेकिन क्या करता, चाची ही नहीं मिली थीं, तो उनकी बहनें कहां से मिल जातीं.

मेरे हर धक्के के साथ वो चिल्लाये जा रही थी- हाँ ह हाँ … और ज़ोर से हाँ … साहिल आज मुझे पूरी अपनी बना लो, बुझा दो मेरी प्यास … चोदो और ज़ोर से प्लीज!और ऐसे ही चिल्लाते हुए वो अकड़ने लगी और झड़ गई. अतः सुपारे से ज्यादा नहीं घुसा, जल्दी ही गांड में घुसा हुआ लंड भी निकल गया क्योंकि वह आगे पीछे धक्के न देकर अगल बगल में बार बार मूव कर रहा था और वह मुझे चित करने को जोर लगा रहा था. क्या मैं अच्छी नहीं लग रही हूँ?मैंने कहा- नहीं ऐसी बात नहीं … आप बहुत अच्छी लग रही हो, तब ही तो देख रहा हूँ.

काफी जद्दोजहद के बाद नीता इस शर्त पर तैयार हुई कि इसके बाद वो नहीं उतारेगी. कुछ इस तरह दो लंडों का मजा देने के बाद हमने अपने लौड़ों को बाहर निकाल लिया. मैं भी सांड की तरह फटाक से पोजीशन तैयार करके चुदाई के लिए रेडी हो गया.

फिर मैंने सुना कि पतिदेव ने अपना थूक अपनी हथेली पर लिया और उसको शायद अपने लंड के टोपे पर मलने लगे.

इसलिए आज मैंने सोचा कि मैं भी अपनी वो कहानी लिखूं, जिसने मुझे सिर्फ कुछ समय के लिए ख़ुशी दी थी. एक दिन जब मैं कॉलेज से आया तो वह दोनों अपनी पढ़ाई में लगी हुई थीं। दरवाजा खुला था इसलिए मेरे आने की आहट न हुई। सुमिना का मुंह दूसरी तरफ था. ” महेश ने नाराज़ होने का नाटक सा किया।क्यों पिता जी, क्या हुआ, आप तो नाराज़ हो गये। अच्छा सॉरी… आप तसल्ली से मुझे देख लो, मुझे कोई जल्दी नहीं” नीलम ने अपने ससुर की बात को सुनकर कहा क्योंकि वह उनके सामने नंगी तो हो चुकी थी। इसीलिए उसने सोचा अब उसे नाराज़ करने का क्या फ़ायदा थोड़ी देर में भला उसका क्या बिगड़ जाएगा।सच बेटी, तुम बहुत अच्छी हो, मगर तुम शरमाती ज्यादा हो.

मैंने झट से उन्हें अपनी गोद में उठा लिया और उनकी साड़ी खड़े खड़े ही ऊपर कर दी. जिस्म वहीं बाथरूम में कैद था लेकिन मैं और मेरा मन कहीं अपने ही ख्यालों में उड़ रहा था. तभी उसकी कमर में कुछ हलचल हुई, तो मैं समझ गया कि लौंडिया नार्मल हो गई है.

कोई दो मिनट बाद ही वो अकड़ने लगी और मेरे बालों को पकड़ कर मेरा सर अपनी चूत में दबाने लगी.

क्योंकि टूरिज्म इंडस्ट्री में एस्कॉर्ट को सभी सेवाएं मुफ्त मिलती हैं. लेकिन भाभी ने ऐसा नहीं किया।भाभी को यह भी पता है कि मेरा देवर मुझे गंदी नज़रों से देखता है और मुझे चोदना चाहता है।वो मुझसे बात भी करती थी और बातों बातों में भाभी ने कई बार चुदवाने के लिए हाँ भी कर दी थी कि मैं चोदवा लूंगी बस मौक़ा मिलने दे.

90 साल की बीएफ जीजा ने भोला से बताते हुए कहा- तुम खुद ही देख लो भाई साहब, जब मैं नौकर के साथ नीचे गया तो कितनी जल्दी ये तुम्हारा लंड लेने के लिए भी तैयार हो गई. जब उसका दर्द थोड़ा शांत हो गया, तो मैंने अपने धक्कों को बढ़ाया और पहले थोड़ी थोड़ी देर में एक एक झटके के साथ स्पीड बढ़ाने लगा.

90 साल की बीएफ मैंने अपनी पढ़ाई कम्प्यूटर्स में की थी, इसलिए मुझे कॉलेज में टीचर की नौकरी मिल गयी थी. मैंने दर्द कम होने पर अपने लंड को फिर से गांड में धकेलना शुरू किया.

आपने मेरी इस सेक्स कहानी में पढ़ा कि शिवानी ने सागर और मुझे चुदाई करते और खुद की करवाते हुए देखने की स्कीम फिट कर ली थी.

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उसका एक हाथ मेरे लंड को सहला रहा था, जिसके चलते मेरा लंड भी अब एकदम कड़क हो गया था. फिर मेरी सास मुझे चाय देने आईं, उन्होंने मुझे ऐसे झुक कर चाय दी कि उनका पल्लू गिर गया, मुझे तो मानो जन्नत मिल गयी हो. तो मैं उठ कर उसकी जांघों के बीच आ गया और उसकी दोनों टाँगों को फैला कर बीच में बैठ गया.

लेकिन मेरे अंदर की चुदास फिर से जाग चुकी थी इसलिए मैंने उनके लंड की तरफ अपना मुंह कर लिया और अपनी चूत को उनके मुंह की तरफ कर दिया. एक तो उसकी चूत में मैंने आग लगा दी थी और अब मैं बिना लंड दिये ही उसको गर्म करके छोड़ रहा था. पर शायद उसका छेद बहुत छोटा था इसलिए मेरा लंड फिसल कर किनारे हो गया.

लाल रंग की पोशाक में वो बहुत ही ज्यादा हॉट लग रही थी; लाल गुलाब की तरह एकदम मासूम सी कली थी.

आज दिन में 3 बार फोन करके बोली थी कि राज को परेशान मत करना, उसे आराम करने देना. पंकज ने पूछा- ये क्या कर रही हो?तो सारिका हंस कर बोली- तुम्हारे पास तो मैं हूँ आग बुझाने को … पर राहुल की आग कौन बुझाएगा? इसीलिए आग पर पानी छिड़क कर उसे बढ़ने से रोक रही हूँ. फिर उसने दोबारा से लंड चूत में डाल दिया और मुझे फिर से दर्द हुआ लेकिन अबकी बार थोड़ा कम हुआ.

मैंने पूछा- आप डैड को छोड़ क्यों नहीं देतीं?वो बोलीं- तुम्हारे कारण. अंकल बोला- ये बात तो मैं शुरू से ही जानता था कि आज तुम जरूर कुछ करोगी क्योंकि तुम्हारे पति ने मुझे पहले ही कॉल करके बता दिया था. अब राहुल तो कुछ बोल ही नहीं पा रहा था, वो चुपचाप पंकज के साथ बेड पर बैठ गया.

मैंने पूछा- पहले भी तुमने ऐसे किया था क्या?तो वो कहने लगी- इतने मजे से नहीं किया था. चौथे दिन मुझे उसका फोन आया और उसकी आवाज़ सुनकर मेरे जान में जान आई।लेकिन वो कुछ उदास लग रही थी.

फिर भाभी ने नशीले अंदाज में कहा- ऐसे क्या देख रहे हो … अन्दर आ जाओ. मैं उसकी चूत में दो उंगलियों से उसकी चूत के दाने को भी रगड़ रहा था।फिर मैंने उसको कहा- तुम पीछे की तरफ लेट जाओ।मैंने उसके ऊपर आकर अपना लन्ड उसकी चूत में लगाया और धक्का लगाना चालू किया. मेरी उंगली प्रिया की चूत में थी और वो मेरे लंड को पकड़ कर अपने हाथ से मजा लेकर सहला रही थी.

इस बार मेरा पूरा लंड उसकी चूत में चला गया था और वो एक बार फिर दर्द से बिलबिला उठी थी.

मैंने कहा- अंकल, हमारे मोहल्ले की और भी औरतें तुमसे चुदवाती हैं?वो बोला- हां कई हैं. नमस्ते दोस्तो, मेरी इस कहानी के पिछले भागजुदाई चार दिन की फिर लम्बी चुदाई-1में आपने पढ़ा कि चार दिन की जुदाई के बाद ही पति ने मेरी चूत की जोरदार चुदाई कर डाली। अब मैं आपको उससे आगे की कहानी बताने जा रही हूं. ज़िन्दगी बड़ी अच्छी चल रही थी। मेरे पास लण्ड अब भी था पर मैं मन से और लिबास से औरत थी और अपने दोनों पतियों अंशु और उपिंदर के साथ प्यार से रहती थी।अंशु काम के सिलसिले में बाहर गयी हुई थी। मैं उपिंदर के घर पे थी। रात हो चुकी थी। खाने के बाद बिस्तर प्रोग्राम बस अभी खत्म हुआ था, मेरे गांड में उसका पानी झड़ चुका था और मैं प्यार से उसके लौड़े से वीर्य चाट रही थी।तभी उसका फोन बजा।अंशु है.

मेरी जीभ जब उसके निप्पलों पर लग रही थी तो उसके मुंह से सिसकारियां निकल रही थीं. मैं जैसे ही पीछे बैठने लगी तो वो बोला- लो दीदी आप चलाओ।मैंने कहा- मुझे तो चलानी ही नहीं आती!तो वह बोला- कोई नहीं, मैं सिखा दूँगा.

उनकी चुदासी आवाजें सुनकर हिना आंटी और चाची अपनी ब्रा निकाल कर ऊपर आ गईं. इसलिए तो मैं भी बार बार तुम्हें ही देख रही थी, बाद में जब भी तुम आते, तो तुम्हारे सामने से जानबूझ कर बार बार आती जाती … और हां तुम्हारा फोन भी मैं ही पिक करती. आंटी ने एक पतली सी नाइटी पहन रखी थी, जिसमें वो गजब का माल लग रही थीं.

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मैं उठने ही वाला था कि वो भी कप उठाकर मेरे साथ ही किचन की तरफ बढ़ने लगी.

मेरे घर में अभी तक मेरा खुद का गैस सिलेंडर नहीं था इसलिए आंटी ही मेरा सहारा थी. उसने मेरे बालों को पकड़ लिया और मेरे मुंह को अपनी चूत से वापस हटा दिया. मेरा लंड तुम्हारे मुंह से बाहर आने के बाद कितनी देर से तड़प रहा है.

उसका रंग दूध सा गोरा, मानो संगमरमर हो, आंखें हिरणी जैसी, लम्बे बाल कमर तक, होंठों पर गुलाबी लिपस्टिक, पतली कमर, उस पर लाल लहंगा चुनरी, ब्लाउज़ डीप कट वाला, उस पर सर से पांव तक सोने के गहनों से लदी मेरे सामने मानो एक अप्सरा खड़ी थी. जो लोग मुझसे मेरी चूत को चोदने की भीख मांगते रहते हैं उनसे मैं कहना चाहूंगी कि मैं अपने पति के साथ बहुत खुश हूँ. मराठी सेक्स दिखावनितिन ने थोड़ी देर तक उन दोनों से बातें की और उन्हें एयरपोर्ट छोड़ने के लिए चला गया।अंधेरा पड़ते ही मैं उठी और खाना बनाया, नितिन अपने पति को धोखा देने का दुख था पर उससे भी ज्यादा मजे से चुदने की खुशी थी। मैं खाना खाकर फिर से सो गई.

अंकित और सीमा कुछ ज्यादा ही सेक्सी थे तो कई बार अंकित अपने मोबाइल का ब्लूटूथ ओन करके पोर्न मूवी लगा देता जिस पर सभी एतराज तो करते पर देखते सब थे. उसको मुम्बई जाना जरूरी था और स्मायरा की मम्मी की अचानक तबियत खराब हो गयी थी.

अब मुझे भी कुछ अलग करने की सूझी और मैंने रुचि को अपने ऊपर लिटा कर 69 पोज़ीशन में ले लिया. मैंने एक जोर से धक्का मारा और वीना आंटी की चूत में मेरा आधा लंड चला गया. वैसे ही आंटी, जिन्होंने हमें घर ढूंढने में मदद की थी, उनके पति साल में 10 महीने बाहर रहते थे तो उनको भी मेरा सहारा मिल गया.

तभी मुझे एहसास हुआ कि शायद उसका दूसरी बार भी स्खलन हो गया, क्योंकि उसकी पकड़ मेरे बालों पर कमज़ोर पड़ रही थी. अब तो मेरी जान चारू भी अपने चूतड़ों को हिला कर मुझे गांड मारने के लिए आमंत्रित करने लगी. उसके बाद मैं उनके पेट से होता हुआ उनकी चुत के पास आ गया और उनके जिस्म को चाटने लगा.

मगर अचानक नीलम को अपने चूतड़ों पर अपने ससुर के हाथों का स्पर्श महसूस हुआ.

और फिर उसकी वाइफ ने भी कहा- ये तो खुद गाइनेकोलॉजिस्ट हैं और बहुत पर्फेक्ट हैं अपने काम में … और मैं खुद भी तो साथ में हूं. मैंने वो क्रीम निकाली और अपने एक उंगली पर थोड़ी सी लेकर उसकी गांड के अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया.

अभी आंटी को मेरी जरूरत थी इसलिए मैं भी आंटी के पास ही रुकना चाह रहा था. मैंने यह देख कर कहा- आंटी मैंने कोई गलत बात थोड़े ना कह दी, जो आप उदास हो गयीं. यह सुनकर शलाका सीधे अलीश गले लग गयी और बोली- भईया, मैं आपको बहुत पसंद करती हूँ.

मैंने झट से मेरा मुँह बाजू किया, तो बोली- साले हरामी इतनी जोर कोई चुत में लंड डालता है क्या … निकाल लंड मेरी चुत से … आह मुझे नहीं चुदवाना तेरे मूसल लंड से. मैं उसके होंठ चूसते हुए उसके दूध भी दबा रहा था और वो मेरे होंठों को चूसते हुए मेरे शरीर को सहला रही थी. सारी साइट दिखाने के बाद आखरी फ्लैट के बेडरूम में उसको लेकर गया और उससे पूछा कि लंड दिखाऊं क्या?वो शरमाते हुए ना बोलते हुए निकल गयी.

90 साल की बीएफ मेरे हाथों पर हाथ रखकर उसने कहा- गीता तुम बहुत खूबसूरत हो, क्या मैं तुमसे दोस्ती कर सकता हूं. मेरी गांड की आग शांत हो चुकी थी, पर मेरे लंड की प्यास अभी रह गई थी.

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ये देख कर अनिल से भी कंट्रोल नहीं हुआ और वो ऋतु की लेफ्ट वाली चूची को दबाते हुए मसलने लगा. हमें ऐसा नहीं करना चाहिए था, आखिर हमारे बीच सास और दामाद का रिश्ता है. नित्या- तो फिर क्या प्रॉब्लम है?मैं- प्रॉब्लम ये है कि अगर किसी वजह से हमारी शादी नहीं हो पाई, तो हम दोनों एक दूसरे को बेवफ़ा समझेंगे और मैं नहीं चाहता ऐसा हो.

मैंने उसको अपने सीने से चिपकाते हुए कहा- इसी बात पर हो जाये राजा रानी का मिलन. अब मैं प्रशांत को हर दिन इसी तरह किसी न किसी बहाने से अपनी चूत के दर्शन करवा देती थी ताकि वो मेरी चूत को चोदने के लिए मचल जाये. एक्स एक्स एक्स ब्लूचूंकि भीड़ काफी थी तो मैंने पहले अनीता को ऊपर कर दिया और पीछे से बैग उठाकर अपनी पीठ पर लाद कर मैं भी ट्रेन में घुसने लगा.

तभी मेरे कमरे का दरवाजा खुला और साक्षात अप्सरा समान मेरी भाभी इठलाते हुए रूम में अन्दर आ गईं.

फिर मुझे उठा कर दीवार के सहारे उल्टा चिपका कर मेरी गांड में लंड घुसा दिया. फिर मैंने थोड़ा सीरियस होकर कहा- आपको बुरा लगा क्या मेरी बात का?वो बोली- नहीं, बुरा तो नहीं लगा लेकिन थोड़ा अजीब लगा क्योंकि मेरे साथ किसी ने ऐसा मजाक किया नहीं था इससे पहले.

मैं बोला- आपका बेटा कहां है?‌वो बोली कि वो आज सुबह दादा दादी के पास जाने के लिए अपने पापा के साथ मुम्बई गया है. थोड़ी देर तो अर्पित भी मुझे देखता रह गया और बोला- यार क्या माल लग रही हो तुम आशना … तुम्हारे सर तुमको चोदें, उससे पहेले शायद में ही तुम्हें ना चोद डालूं. वह अपने ससुर की हरक़तों से बुहत ज्यादा गर्म हो चुकी थी।बेटी अपनी दोनों टांगों को खोलो, अब मैं नीचे बैठकर तुम्हारी अनमोल चीज़ को देखूँगा.

मैंने स्वरा से हाथ मिलाया और पूजा (दोस्त की गर्लफ्रेंड) से भी हाय किया.

आज होठों का रसपान करते करते उसने कई बार मेरे होठों को काटा, जब जब वो काटती, मैं ट्रेन की स्पीड बढ़ा देता. मैं उठा और उनके पैर छुए और उन्होंने भी मुझे हंस के देखा और कहा- खुश रहो. मैंने कहा- कैसा है देखने में … यंग है या आदमी है?वो बोली- करीब 48 साल का है … मगर हैंडसम है और चुदाई में बहुत अच्छा है.

देसी जंगलनहीं ऐसा कुछ नहीं है, अगर ऐसा होगा तो तुझे तो पता चल ही जाएगा।”ऐसे बोल कर वो हंसने लगी. फिर मैंने रिंकी से कहा- मेरा होने वाला है … बाहर निकालूं लंड?रिंकी ने कहा- नहीं यार … बहुत टाइम से मैं प्यासी हूँ.

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फिर मैंने वापस लंड निकाल कर जोर से चुत के अन्दर डाला, तो दो तीन धक्कों में ही मोनाली गर्म हो गयी. आगे की सेक्स स्टोरी में मैं आपको बताऊँगी कि मैंने ममता को कैसे अपने गांव में चाचा ससुर के लंड से चुदवाया और मज़ा लिया. थोड़ी देर लंड चुसवाने के बाद मैंने उन्हें अपने नीचे लिटा कर अपना लंड एक झटके में ही उनकी चूत में डाल दिया.

उसने मेरा लंड दबाया, तो मैंने मजाकिया स्टाइल में कहा- क्या कर रहा है कमीने … अभी लंड खड़ा हो जाएगा, तो कौन संभालेगा. फिर हम दोनों एक साथ बाथरूम में चले गए और एक दूसरे को साफ करके नंगे ही सो गए. मैंने उसे जोर से अपनी बांहों में भर लिया और उसे गोद में उठा कर अन्दर कमरे में ले आया.

उन्होंने कहा- बेटा, मैं तो पिछले चार सालों से प्यासी थी … मैं भी कामुक औरत हूँ. मैं उल्टी पेट के बल लेटी हुई थी जिससे उसको मेरी उभरी हुई गांड दिखी और वह पजामे के ऊपर से ही बिल्कुल आराम से मेरी गांड दबाने लगा. तो राहुल ने उससे कह दिया कि एक दो दिन बाद जब वह पूल में जाना शुरू करेगा तो वह रजनी को स्वीमिंग सिखा देगा.

आनन्द अपने चरम पर था, घोड़ा कभी धीरे कभी सरपट दौड़ रहा था, जब मंजिल करीब आने को हुई तो लण्ड फूलकर और मोटा होने लगा. मैं बाथरूम में जाने लगी तो वो मेरे पीछे आकर मेरे कान में कहने लगा कि अपनी ब्रा को उतार लेना अंदर जाकर.

इसलिए हफ्ते भर का माल उनके मोटे लौड़े में इकट्ठा हो गया था जो उनको इंतजार नहीं करने दे रहा था.

वो बोला- अपनी फु्द्दी, अपनी चूत… जो भी कहती हो उसको, उसे दिखा दो अब।उसके कहने पर फिर मैंने अपनी चड्डी उतार दी. एक्स एक्स बेबीमैंने दीदी को ढांढस बंधाया, तो दीदी ने मुझसे ढके हुए शब्दों में जो कहा, वो मैं साफ़ शब्दों में लिख रहा हूँ. xxx विडीवोमगर आज मुझे अपनी उसी सोच का बहुत ही दुख हो रहा है कि मैंने तुमको क्या सोचा था और तुम क्या निकली. मैं वीना आंटी के ऊपर आ गया और पहले उनके मम्मों के बीच में लंड डाला और हिलाया.

इतना अधिक वीर्य निकला कि उसकी एक पिचकारी से ही मेरा मुँह भर गया और बाहर गिरने लगा.

दोस्तो, मैं आपके सामने एक बार फिर से अपनी एक नई हिंदी गे सेक्स स्टोरी लेकर आया हूँ. मैंने कहा- मम्मी जी, आप हुक्म तो करो, आपकी बेटी और आपका दामाद हमेशा दोनों आपकी खिदमत में पेश रहेंगे. दीदी की चीख निकल गयी ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’मैंने शॉट मारने प्रारम्भ कर दिए.

नित्या- मैं कभी किसी से नहीं कहूँगी कि मैं तुमसे प्यार करती हूँ और तुम्हें शादी करने के लिए मजबूर भी नहीं करूंगी. जहां शिवानी की चुदाई बहुत रफ़ थी, वहीं पर मेरी चुदाई सागर प्यार से कर रहा था. तब मुकुल राय का का लंड परीशा की कुँवारी गांड को फाड़ने के लिए तैयार हो जाता है।मुकुल राय- बेटी, पहले तेरी गदराई गांड से तो जी भर के प्यार कर लूँ।वो बस देखने लगता है अपनी बेटी के गान्ड की खूबसूरती … उफफ्फ़ … क्या नज़ारा था.

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मेरे लन्ड में दर्द होने लगा था और ज्यादा जोर लगाने से ऐसा लग रहा था जैसे मेरे लन्ड की पूरी खाल छिल कर अलग हो जाएगी। मैं समझ सकता था कि उसे भी ऐसा ही खिंचाव चूत में लग रहा होगा. मैंने उन्हें बता दिया, तो उन्होंने इशारा किया कि माल मेरे मम्मों पर डालो. सब जोर से हंस पड़ीं क्योंकि नीता ने पैंटी पहनी ही नहीं थी और ये बात वो भूल भी गयी थी.

हम लोग नई दिल्ली एयरपोर्ट से तीन बजे के फ्लाइट से रवाना हुए और करीब करीब सत्ताइस घंटे के यात्रा के बाद मेक्सिको सिटी पहुंचे.

चूंकि मैं कुछ देर पहले ही करण के लंड से चुद कर आई थी तो राहुल का लंड आराम से मेरी चूत में चला गया.

अब मैंने उसके गोल गोल दूधों को पकड़ कर लंड को आगे पीछे करना शुरू कर दिया. एक दिन भाभी मेरे घर आईं और उन्होंने कहा- शिवा, मुझे कल मंदिर जाना है और तुम्हारे भैया घर पर नहीं हैं. ज्योति की सेक्सीन उनके मन में कुछ था और न मेरे मन में। मैं जीजा के साथ बस से चित्रकूट पहुंच गई.

आंटी बोलीं- ओह … ये बात है … वैसे मुझे भी आज बाहर खाने का मन कर रहा है. आधे नंगे, सिर्फ अंडरवियर पहने हुए लड़के देखकर मेरा मन उनके लंड चूसने को उछला जा रहा था. मेरी छाती उसके चूचों पर रखने के कारण उसके चूचे मेरी छाती के नीचे दब गये जिनका स्पर्श मुझे पागल करने लगा.

अगले दिन शाम को मैं भी दिल्ली से इंदौर के लिए निकल गया और रिंकी को कॉल करके बता दिया. उसकी आवाज में एक मदहोशी सी का अहसास हुआ मुझे जैसे कि वो मुझे रोकना चाहती है.

जो लोग मुझसे मेरी चूत को चोदने की भीख मांगते रहते हैं उनसे मैं कहना चाहूंगी कि मैं अपने पति के साथ बहुत खुश हूँ.

एक दिन मैं योग कर ही रहा था कि उसी समय अपने कपड़े सुखाने के लिए आ गई. अब मैं भी अपना माल जल्दी निकालना चाहता था … क्योंकि मेरा शरीर एक चरम सीमा जैसी भावना से पूरे जोश में आ गया था. ” वह टेंस हो कर बोला।डोंट वरी नितिन … यह शॉर्टकट है … मैं पहले भी इस रास्ते पर आई हूं …” मैंने उसे तो बोल दिया पर वह स्कूल के वक्त की बात थी और उसके बाद मैं उस रास्ते पर कभी नहीं गयी थी।मैं दुआ करता हूँ कि तुम सही हो … अगर गलत हुई तो घूम कर वापस जाने का कोई फायदा नहीं होगा … तब तक ट्रेन छूट जाएगी.

ब्लू पिक्चर चुदाई वाली वीडियो मुझे फेसबुक पर मेरे साथ स्कूल में पढ़ने वाली एक लड़की मिली, जिसका नाम श्रेया है. मेरी पिछली कहानी थीभाभी के भैया को बना लिया सैंयामेरा नाम रेखा है और मैं देखने में काफी सेक्सी लगती हूँ.

कुछ चुदास बढ़ी, तो मैं उसकी निक्कर में हाथ डाल कर उसकी चूत को रगड़ने लगा और चूत में उंगली डालने लगा. मैंने अपने हाथों से अपनी फुद्दी छुपा ली और अपनी टाँगें भींच ली।मगर अरविंद सर ने अपनी ताकत से मेरे हाथ हटा दिये, और मेरी टांगें भी पूरी खोल दी. मैं अपनी पहली बार की चुदाई की कहानी आपको इस सीरीज खत्म होने के बाद बता दूंगा.

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मैं अन्दर ही अन्दर खुश था और मेरी खुशी तब दोगुनी हो गयी, जब मम्मी ने आंटी को हमारे घर बुला कर कहा कि अगर उन्हें दिक्कत न हो, तो मेरे लिए यहां आकर खाना बना देंवे. मैं लंड खुजा कर उसको समझाता रहा, वो भी अपने बार बार झुक कर अपने मम्मों को दिखाती रही. फिर एकदम से उसके लंड से पिचकारी छूट कर मुझे मेरी बच्चेदानी के पास महसूस होने लगी.

तभी उन्होंने एक लम्बी सांस ली और मेरे हाथ को अपने हाथों से भींच लिया. रगड़ते रगड़ते वो लण्ड पर बैठ गई और मेरा लण्ड डॉली की गीली संकरी गुफा में समा गया.

” महेश ने 3-4 ज़ोर के धक्के मारते हुए अपना लंड अपनी बहू की चूत से बाहर निकाल लिया।आआह्ह्ह्ह पिता जी, आप तो नाराज़ हो गये मैं तो मज़ाक़ कर रही थी.

कई बार घर आने में देरी भी हो जाती थी तो खाने की भी समस्या हो जाती थी। मेरी पत्नी की बहन जिन्हें मैं भाभी कहता था वो बहुत ही अच्छे स्वभाव की महिला थी, वो मेरा काफी ख्याल रखती थीं. उनकी चुदाई की खास बात ये है कि वो सिर्फ अपने मजे का ख्याल ही नहीं रखते बल्कि मुझे भी पूरी तरह से संतुष्ट करने की कोशिश करते हैं. इस क्रिया से भाभी की तड़प और बढ़ गई और वो मुझे अपनी अधूरी चुदायी के लिए जोर जोर से कसमसाने लगीं.

फिर मैंने भी उसकी जीन्स को उतार दिया और उसे फिर वहीं पर लेटा दिया और उसकी पेंटी भी उतार कर उसे नंगी कर दिया. मैं उनके चूचों को दबाता रहा और दो मिनट के बाद ही उन्होंने विरोध करना बंद कर दिया. जब वो छुड़ाने की कोशिश करते हुए चलने लगी तो मैंने उसको वापस से अपनी तरफ खींच कर उसको अपनी बांहों में भर लिया.

दोस्तो जो मजा उसकी चुदाई में आता है, वो मजा मुझे अब तक किसी और के साथ नहीं आया.

90 साल की बीएफ: अब तक मैंने राहुल का लंड ही अपनी चूत में लिया था और करण का लण्ड राहुल के लंड से काफी बड़ा और मोटा था. मेरा इशारा पाकर उसने भी अपनी पैन्ट उतार दी और उसने भी लंड पैन्ट से बाहर निकाल लिया.

मुझे अपनी गांड की चुदाई में जो मज़ा मिला, वो जिंदगी में कभी भी महसूस नहीं हुआ. उसने मेरे हाथ से सिगरेट ले ली और मेरे लंड पर धुंआ छोड़ते हुए हामी भर दी. राहुल नहीं चाह रहा था पर सारिका की शोखी और नफासत उस पर हावी हो रही थी.

जब वो छुड़ाने की कोशिश करते हुए चलने लगी तो मैंने उसको वापस से अपनी तरफ खींच कर उसको अपनी बांहों में भर लिया.

आंटी के बेटा नहीं देने के कारण वो उनसे ठीक से पेश नहीं आता था और शराबी बन गया था. मगर मैंने उसको दिलासा देते हुए कहा- बस जान, थोड़ी देर तक ही दर्द होगा और उसके बाद तुम्हें जन्नत का मजा आना शुरू हो जायेगा. प्रिया मुझे देख रही थी और मेरे गुस्से को भांप गयी। वो उठकर मेरे पास आ कर खड़ी हो गयी और मेरी बांह पकड़ कर अपना सर मेरे कंधे पर रख लिया.