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बात तब की है जब मेरे ऊपर के फ्लैट में एक बिहार की फैमिली शिफ्ट हुई थी.फिर भी मैंने लोक-लाज और संस्कारों से प्रेरित होकर मद्धम आवाज में उन्हें समझाने की कोशिश की- जेठ जी, ये पाप है और मेरे शौहर घर पर नहीं हैं.

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शेखर की हथेली उस चिकने काम रस से चिपचिपा गयीं थी।इसका एक फ़ायदा ये हुआ कि शेखर की हथेलियों की हल्की सी हरकत से धारा की चूत अपने आप अपने होंठों से चिपक कर फिसलन का अहसास दिला रही थी. मैंने तेज तेज दस बारह शॉट मारे और उसकी चुत के अन्दर ही अपना माल छोड़ दिया.

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भानु ने अपनी मां काजल की चुदाई की कहानी मेरे साथ साझा की और माँ चोद कहानी को अन्तर्वासना के लिए लिखने का आग्रह किया. संगीता ने कहा- आर्यन, तुमने मेरी महीनों से नहीं चुदी हुई चूत की इच्छा पूरी की है … और इसको अच्छे से खोला है. निखिल ने मीरा की चुत के होंठों को फैला कर उसकी चुत चाटनी शुरू कर दी.

सुपारे पर जमी कामरस की सारी बूँदें धारा ने चट कर दीं और फिर पूरे सुपारे को अपने होंठों के बीच लेकर क़ुल्फ़ी की तरह चूसने लगी.

शाम को करीब 7:30 बजे मेरी आंख खुली तो मैं ऐसे ही नंगी उठकर किचन में कुछ खाने के लिए चली गई. उसने पैर और फैला दिए जिससे उसकी गुलाबी चूत के अन्दर तक दर्शन होने लगे. मेरी पिछली मेरी गांड चुदाई स्टोरी थी:चाचा जी के लंगोट का कमालहर बार की तरह शुरूआत करने से पहले मैं आप सभी पाठकों का दिल से शुक्रिया करता हूं कि आप लोगों की ओर से मुझे मेरी पिछली प्रकाशित कहानियों के लिए इतना अधिक प्यार मिला है.

दिल कह रहा था कि एक बार चैट रूम में जाकर देखे कि कहीं धारा ऑनलाइन तो नहीं?मगर दिमाग़ कह रहा था कि उसने तो कहा है कि वो बाहर जा रही है फिर शायद अभी बाहर ही हो!यही सब सोचते सोचते शेखर ने धीरे-धीरे लगभग 3 पैग पी लिए थे।रात भी गहरी होने लगी थी; लगभग साढ़े दस बज चुके थे।शेखर एक बार उठा और बाथरूम में जाकर हल्का हो आया. वह बहुत धीरे-धीरे और प्यार से मेरी चुदाई कर रहा था जो मुझे बहुत पसंद आई. उस समय मेरे कॉलेज के एग्जाम खत्म हुए ही थे कि मेरा मन कहीं घूमने जाने के लिए करने लगा.

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तो मैंने कहा कि आप बहुत जोर से करते हैं।दोस्तो,मैं शुभी आप सब लोगों के बीच अपनी कहानी का अगला भाग लेकर प्रस्तुत हूँ।उम्मीद करती हूं कि आप सभी को अब तक की कहानी पसंद आई होगी।यह कहानी सुनें. उसने आज चड्डी भी नहीं पहनी थी, तो मुझे उसकी बिना बालों वाली चिकनी चूत के दर्शन सुबह सुबह ही हो गए.

देहात वाली सेक्सी बीएफ फिर मैंने अपने हाथों से उसके दोनों मम्मों पकड़े और उनको सहलाते हुए धीरे धीरे दबाने लगा. ख़ुशबू लेडीज़ परफ़्यूम की थी तो शेखर को थोड़ा तो यक़ीन हुआ कि ये कोई लड़की या औरत ही है.

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कुछ देर की चूमा-चाटी के बाद मुझे उठाया और मेरी शर्ट निकालकर फेंक दी! अब नीचे हुयी और मेरी पेंट के उभार को चूमकर फिर छिटक गयी और मेरी स्टडी टेबल पर जा बैठी. अब मुझे तो पता भी नहीं पता लगता कि तेरा लंड चुत के अन्दर गया भी है या नहीं. धक्का लगते ही मैं एकदम से गिरने लगी तो जाकर सीधे समीर की गोद में गिरी.

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एक बार को शेखर ने अपनी कमर को झटका भी दिया ताकि पूरा लंड अंदर जा सके.

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शेखर ने नींबू पानी पिया और थोड़ी देर के लिए अपने फ़्लैट की बालकनी में कुर्सी पर बैठ गया. अब मैंने नैपकिन लेकर उसकी चूत और अपना चेहरा साफ किया और उसके साथ लेट गया.

अंतत: आज मैं अपनी जिंदगी की एक जवान सेक्सी लड़की की सच्ची सेक्स कहानी लिखने में सफल हो गया और इसे आप सभी के साथ साझा कर रहा हूं. अब कल्पना के लिए कोई चेहरा भी होना चाहिए जो कि मेरे विचार में था ही नहीं. मैंने देखा मेरी बेटी शहज़ाद के ऊपर लेटी थी और शहज़ाद उसकी कमर से हाथ लगा कर उसे पकड़े था.

शेखर ने धारा के बदन को थोड़ा सा अलग करते हुए एक हाथ से उसके कंधे पर टिके साड़ी के आँचल को सरका कर नीचे गिरा दिया.

मैंने सोचा कि यह सही समय है शीना पर हाथ साफ करने का!तो मैं चुपके से उसके पास आया. उसे मेरे लिंग के इस क्रूर कार्य का अंदाज़ा नहीं था।मैंने एक बार और झटके से उसकी चूत में लन्ड धकेला. तमन्ना ने मीठी सी सीत्कार ली- इस्स…जा…न!मैं- दर्द तो नहीं हुआ?तमन्ना- नहीं!अब शुरू किये मैंने झटके!थोड़ी देर बाद लंड निकाला और उसकी चूत को चाटने लगा.

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धारा हंसी- हे हेह्ह … इसमें बटन नहीं है जनाब!फिर धारा ने शेखर की उंगलियाँ पकड़ीं, दोनों हाथों की एक-एक उंगली को पकड़ कर धारा ने अपने बगलों के ठीक नीचे ब्लाउज़ के अंदर कर थोड़ा ऊपर की तरफ़ धकेल दिया और खुद अपनी बांहें ऊपर कर लीं जैसे कि हम कोई बनियान उतारते वक्त करते हैं. मैंने आशारा की चुत की फांकों को फैलाकर एक एक को मुँह में भरकर जी भर कर चूसा. उसने झट से मुझे अपने बिस्तर पर खींच लिया और मेरे होंठों से अपने होंठ सटा कर रस चूसने लगी.

अन्तर्वासना के प्रिय पाठको, मैं विराज एक बार फिर से आपकी चूतों को चमचम … और लौड़ों को बांस बनाने के लिए हाजिर हूँ. धारा- अच्छा जी … तो आपको यक़ीन नहीं हो रहा है कि ये मैं ही हूँ! दो मिनट रुक जाइए फिर आपको यक़ीन हो जाएगा. अगर उस पल ‘एक लड़की को देखा, तो ऐसा लगा …’ वाला गाना सुनने को मिल जाता, तो जो होता … समझो मेरी वही दशा हो गई थी.

वो बोली- इस बात का क्या मतलब हुआ?मैंने कहा- इसका मतलब ये हुआ कि कल के दिन किसी को कुछ आपत्ति हुई तो मैं क्या कहूंगा?वो बोली- अच्छा जब की तब देखी जाएगी, आप तो अभी की बात करो कि मैं आपको कैसी लगती हूँ. सैम ने आगे पूछा- अब कब दोगी?मेरी मां ने कुछ नहीं कहा, बस हल्के से मुस्कुरा दीं. लेडीज़ टेलर सेक्स कहानी के पिछले भागधोबी के घर जाकर चूत चुदवा कर आयीमें अब तक आपने पढ़ा था कि टेलर मास्टर ने मेरी चुत चाट कर मुझे झड़ा दिया था और मेरी चुत के नमकीन रस को पी गया था.

करीब दस मिनट बाद सैम का लंड फिर से खड़ा हो गया और उसने मेरी मां को घोड़ी बना दिया. तभी उसने जल्दी जल्दी झटके देने शुरू कर दिए और लगभग 30 सेकंड बाद उसने अपना सारा पानी मेरे मुंह में निकाल दिया.

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मगर मैंने धीरे धीरे से उन्हें चोदना चालू रखा और कुछ देर बाद भाभी भी मेरा साथ देने लगीं.

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अब सुनीता शायद थक चुकी थी लेकिन मेरा लंड अभी तक सर उठाए खड़ा हुआ था और अपनी विजय पताका फहराने के लिए लालायित था. वीर्य की अंतिम बून्द तक मैं फ़लक की चूत को चोदता रहा और अन्त में पूर्ण संतुष्टि के बाद फ़लक ने अपनी टाँगों की कैची को खोला और लंबी सांस ली. लेकिन मम्मी ने जब उससे बात करके कहा, तो वो बोला- ठीक है आज कपड़ा लाकर दे दो, एक हफ्ते बाद दे दूंगा.

मैंने उससे पूछा- ये क्या कर रहा है?वो बोला- तू बता, तू ये सब क्या कर रही थी?मैं- तू कमरे में अन्दर कैसे आया?वो बोला- तेरा दरवाज़ा खुला था. वो आगे बोली- पर अंकल, मुझे एक बात पूछनी थी कि जो मम्मी और पापा की वीडियो है, उसमें मम्मी की चूत पर कितने बाल थे.

जब उसने यार बोल कर मुझसे हंस कर बात की, तो मैं भी उसके साथ फ्लर्ट करने लगा.

फिर दोनों मेरी चूत की एक एक पंखुड़ियों को चूसने लगे, जिससे मेरे अन्दर कामवासना की नई तरंग दौड़ने लगी. मैंने उसकी दोनों टांगों को फैला दिया और टांगों के जोड़ पर हाथ फेरने लगा. जैसे ही पानी छूटा, उनके हाथों से मेरी पीठ पर और होंठों से मेरे होंठों पर दबाव बढ़ गया.

ब्लू सेक्सी ब्लू सेक्सी चलने वाली मैं रोमांचित था … और वह भी तो अपनी आंखें बंद करके इस पल का आनन्द ले रही थी. शेखर- जी शुक्रिया। वैसे मन तो आपने मोह रखा है हमारा, जब से वो आँखों पर पट्टी वाले खेल के बारे में सुना है आपके पति, से तब से मेरा मन बस उसी ख़्याल में लगा हुआ है कि इतना रोमांचक होता होगा वो खेल … बिना देखे एक दूसरे के भीतर समा जाना और अपनी आत्मा को तृप्त कर लेना!धारा- सच कहूँ तो मुझे भी वो खेल बहुत पसंद है, एक अलग ही रोमांच है उसमें.

मैंने मौके का फायदा उठाया और उसको बेड पर लिटा कर उसके होंठ चूसने लगा. अपने अपने घरों में बने रहिये और मास्क का उपयोग करते रहें, जितना हो सके बिना वजह घर से बाहर जाने से बचें।वैसे भी कोरोना काल ने एक चीज़ तो हम इंसानों को सिखा दी है कि यदि हम चाहें तो सीमित वस्तु का उपयोग कर व सादा जीवन जीकर परिवार के साथ समय बिताकर भी जीवन का आनंद सरलता से ले सकते हैं. मैं सोच रहा था कि अभी की अभी यहीं पर पकड़ कर भाभी को रगड़ दूं, बोबे दबा दूँ साली के … और गांड पर चमाट मार मार कर पूरी लाल लाल कर दूँ.

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फिर धीरे धीरे वो मेरे सीने पर, गर्दन पर और कंधों पर चुम्बन देने लगा. अत्यधिक लम्बा काला और खीरे सी मोटाई वाला वो सख्त डंडा सोनम के हलक तक घुस चुका था. शेखर की मनोदशा समझ कर धारा को उस पर तरस आ गया और उसने बिना देर किए बिना हाथों से लंड को पकड़े अपनी जीभ की नोक से लंड की चमड़ी से झांक रहे सुपारे को सहला दिया.

उनकी मैक्सी में से हल्की हल्की हवा आ रही थी जिसमें से उनके जिस्म पर आए हुए पसीने की महक आ रही थी. अब मैं अपने मुँह से उनके लंड को चोद रही थी और वो अपनी जीभ से मेरी बुर चोद रहे थे.

अजय बोला- आपको मेरी वाइफ सुम्मी कैसी लगी नामदेव जी!इस पर नामदेव ने अभी कुछ कहने के लिए मुँह खोला ही था कि विजय उठ कर सुम्मी के पास आ गया.

शौहर ने अब तक जितनी बार मेरी चुदाई की, सिर्फ बच्चे पैदा करने के लिए ही की मतलब उन्होंने हर बार मेरी चुत में ही अपने लंड का रस टपकाया है. मगर मेरी चुत में से पानी की धार लगातार निकलती रही जो मेरी जांघों को बेहद गीली कर चुकी थी. प्रिया ने चमेली से पूछा- तुझे क्या हुआ रंडी … तू क्यों गर्म हो रही है?चमेली बोली- दीदी, आठ दिन पहले मैं मेरे ब्वॉयफ्रेंड के साथ उसके घर गई थी.

दूसरे दिन मेरी फ्रेंड ने मुझे कॉल करके घर बुला लिया और हम उसी के घर में दिन भर रहते और रात को बस सोने होटल में जाते।होटल में समीर मेरे साथ बेड पर ही सोता था और मैं वहां रोज़ दारू पीती थी. तो मैंने पूछा- पहली बार चुदवा रही हो क्या? जो इतना परेशान हो रही हो?पहली बार तो नहीं … लेकिन इस तरह पहली बार चुदवा रही हूँ. ह्म्म्म … आह्ह्ह!” शेखर का हाथ अपने उभारों पर महसूस करते ही धारा ने शेखर की उंगली को अपने होंठों से आज़ाद कर दिया और एक सिसकारी भरी.

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देहात वाली सेक्सी बीएफ: दस मिनट तक हम ऐसे ही करते रहे मैंने उसका टॉप उतारा तो वह शर्माने लगी. तभी भाभी ने मुझे टाइट पकड़ लिया और तेज तेज सिसकारियां लेते हुए झड़ गईं.

खाना बनाने के बाद मैं दूसरे कमरे में जा रही थी कि तभी अचानक से मेरी उस कमरे में नज़र पड़ी, जहां मेरी बेटी और शहज़ाद थे. लेकिन मुझे तो नौकरी करनी थी … तो मैं कोशिश भी नहीं कर सकता था इसलिए बात को भूल गया. शीना ने सफेद रंग की सलवार कमीज पहनी हुई थी जो होली के रंगों से भरी हुई थी.

मैंने एक दो बार चुत में लौड़ा डालने की कोशिश की, लेकिन लंड अन्दर नहीं गया.

जिस सोफे पर मैंने शीना को बिठाना था, वो सोफा बिल्कुल साफ दिख रहा था. जिससे वो मुझे अपने बदन के हर हिस्से पर दबा कर चाटने का इशारा कर रही थी. अब मैं भी क्या करूं … अभी तक किसी की चुत चोदी तो थी नहीं, जो एक्सपर्ट हो गया था.