बीएफ पिक्चर मद्रासी

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मुझे लगा कि उस दिन तो बस पाद निकली थी लेकिन कहीं आज टट्टी ही ना निकल जाए. सेक्सी सेक्सी वीडियो एचडी हिंदीलेकिन इसके लिए लड़की को एक महीने के लिए इधर ही एक कमरे में रहना होगा.

ये मैं आपको शब्दों में नहीं बता सकता कि मैं उनकी गांड का कितना बड़ा फैन था. हिंदी में ब्लू पिक्चर भेजो सेक्सीमैं प्रयास करूंगा कि जो भी भाभी, आंटी या लंडधारी भाई मेरी इन्फैचुएशन सेक्स कहानी पढ़ रहा है, वो सभी भाभियां, आंटियां अपनी चूत में उंगली करके अपने आपको शांत करें और सभी लंडधारी भाई अपना लंड हिलाकर खुद को थोड़ी देर के लिए ठंडा करें.

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जब बर्दाश्त नहीं कर पाया‌ तो‌ मैं अपना लंड मीना की गांड में सटाने‌ लगा.अब चाची ने और चुदाई करने से मना कर दिया पर लंड को शांत करना भी जरूरी था.

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नीचे मेरे हाथ उसकी गांड को सहला रहा था और ऊपर मैंने कोमल होंठों को अपने होंठों में दबा रखा था.आलिम साहब ने मेरी गांड पूरी तरह से फाड़ डाली थी और मेरी गांड से खून बहते हुए बिस्तर पर इकट्ठा हो रहा था.

सोनी- बीवी ने रात को खाने के समय कहा कि वह अब से गुरु मां के आश्रम में ही रहेगी. बीएफ पिक्चर मद्रासी स्टेप मदर सन सेक्स कहानी में पढ़ें कि मुझे पता लगा कि मेरे पापा मेरा माँ को सेक्स का पूरा मजा नहीं पाते.

एक दिन उसने कहा- बेबी मुझे अब तुम्हारा लंड चाहिए, कब तक नकली लंड से काम चलाऊं? मेरे घर वाले न जाने कब जाएंगे.

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अब सलवार को जिस्म से अलग करके मेरा अगला टार्गेट शबाना की रेशमी बालों वाली चूत थी. एक दिन गर्मी की छुट्टी में मैं घूमने के लिए अपने भैया भाभी के घर दिल्ली चला गया. कुछ देर बाद भाभी को चुदाई में मजा आने लगा और वो कमर उछाल उछाल कर मेरा साथ देने लगीं.

क्या मस्त गीली और चिकनी चूत थी उसकी, जैसे बस मेरे लिए तैयार की गई हो. अब वो दोनों सिर्फ अपने अंडरवियर में थे और मैं दुल्हन बनकर पूरे मेकअप के साथ सलवार सूट पहने चुन्नी सर पर लेकर बैठी थी. बहुत आनाकानी करने के बाद उसने लंड चूसना शुरू किया।चूसते चूसते वापस उसकी चूत में खुजली होने लगी और वो अपनी चूत को सहलाने लगी।क्या हुआ? मन नहीं भरा क्या?” मैंने पूछा.

उस दिन मेरे बॉस दूसरे शहर में मरीज़ देखने गए थे तो सभी मरीजों की ज़िम्मेदारी मेरे और मेरे साथ के स्टाफ पर थी. मुझे अपनी जवानी में इतने दिनों के बाद ऐसा सुख पहली बार अनुभव हो रहा था. आपको मेरी Xxx गाँव पोर्न स्टोरी कैसी लगी, प्लीज़ मेल और कमेंट्स से बताएं.

उनका सामान रख कर मैं जाने लगा तो आंटी बोलीं- रुको, मुझे तुमसे कुछ काम है. शेखर बहुत मस्त दिखता था इसलिए मेरी नजर बार बार उसकी तरफ उठ जाती थी.

जैसे मैं झड़ते समय थोड़ा अकड़ सा गया था और मुझे उत्तेजना में होश ही नहीं रहा था तो मेरा सारा माल मैंने उनकी चूत में ही डाल दिया था.

मैं रोकने का प्रयास कर रही थी फिर भी जैसे तैसे शेखर ने अपना सुपारा मेरे मुंह में पेल दिया.

शबाना पर क्लिप का काफी असर हो चुका था, सो वो दांतों से होंठ काटती हुई बोली- बिना अहसान उतारे?मैं समझ गया कि लाइन एकदम क्लियर है, सो मैंने आगे बढ़कर हाथ को ऐसे पकड़ा कि शबाना के बूब्स को हाथ टच कर जाए. मोहल्ले के सभी लड़के उसको पटाने के कोई न कोई बहाना ढूंढा करते हैं।वो मेरी चचेरी बहन है तो मेरा उसके घर आना जाना लगा रहता है. पापा सरपंच जी के यहां गए थे और मम्मी तो दो दिन से मामा के यहां गई हुई थीं.

भैया भी मेरी दोनों चूचियों को मसल मसल कर चूस रहे थे और मेरी वासना की आग को और ज्यादा भड़का रहे थे. रिश्तों में चुदाई की कहानियां पढ़कर मैं पहले भी अपनी चाची की चुदाई की कहानियां लिख चुका हूं, जो आप सबने बहुत पसंद की थीं. उस दिन चाची ने बड़ा कसा हुआ सूट पहना हुआ था जिसमें से उनकी मादक गांड बड़ी मस्त लग रही थी.

मैंने कोमल से कहा- ये लो चाभी, आज से ये घर तुम्हारा हुआ कोमल, तुम इसकी मालकिन हो, अब खोलो गेट को.

एक जगह 9:30 बजे जाना था, उधर गया और वहीं से 10:30 बजे का काम निपटाया. अगले स्टॉपेज पर मुझे उतरना था तो मैं उतर गया और उससे मेरी कोई बात न हो पाई. पर जब नाड़ा नहीं खुला तो कुछ तक यूं ही सलवार के ऊपर से भाभी की फुद्दी के मजे लिए और उठ कर सलवार के ऊपर से ही उनकी फुद्दी को किस भी किया.

दो से उसी गोटी को आगे चलाया ताकि वो महफूज़ हो सके, उसी समय अचानक छह-छह-एक और उसकी हरी गोटी घर जाते हुए दिखी. कुछ देर ऐसे ही मजा लेने के बाद मैंने उन्हें बेड पर लिटा दिया और मैं उनके ऊपर चढ़ गया. साक्षी मेरी छाती से उठी मगर वो मेरे लंड को गांड में घुसाए हुए ही मेरे ऊपर बैठ गयी.

मैं माँ की चूत का सारा माल पी गया और उनकी चूत को चाट कर साफ कर दिया.

एक जगह 9:30 बजे जाना था, उधर गया और वहीं से 10:30 बजे का काम निपटाया. मैं दीदी को चोद रहा था, तभी खिड़की से बाजू वाली आंटी ने हमें देख लिया.

बीएफ पिक्चर मद्रासी लेकिन इस चक्कर में जलालुद्दीन साहब का लण्ड मेरे मुंह से बाहर आ गया था. इतने में मेस का टाइम हो गया तो मैंने सोचा क्यों ना आज ब्रा पैंटी पहन कर ही चला जाए.

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मैंने कहा कि ठीक है, लेकिन कितने बजे आना है … और तुम्हारी नयी शॉप मुझे नहीं पता है.

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पहले मैंने उसे होंठों पर, गले पर, उसके दोनों बूब्स को, फिर उसके पेट और उसकी नाभि पर किस किया. अब वो पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी और उनके शरीर का हर एक अंग साफ साफ़ नज़र आ रहा था।न्यूड आंटी की झांटों के बाल भी साफ़ साफ़ नज़र आ रहे थे।उन्होंने ट्रिम कर रखा था और उनके चूतड़ों का रंग गुलाबी था. कुछ देर बाद बस में लाईट जली, तो मैंने देखा कि मीना भी चुदाई की आवाज से‌ उठ गई थीं.

फिर मॉम अपनी कमर पर हाथ रख कर एकदम नंगी खड़ी होकर बोलीं- ले देख ले … क्या देखना है. मैंने उनसे पूछा- तो क्या फिर आप सेक्स भी नहीं करती?उन्होंने मुझे बताया- हां … 6 महीने में एक या दो बार ये आते हैं, तभी हो पाता है. आपका शहर कितना भी सुरक्षित हो, पर रात में सुनसान रास्तों पर जब आप अकेले होते हो तो मन में संदेह के और डर के विचार तो आते ही हैं.

हम दोनों थक कर 30-35 मिनट तक ऐसे ही लेटे रहे और अब समय 12:30 का हो चुका था.

मैंने बिना एक पल की देर किए अपनी उंगली उसकी गांड के छेद में डाल दी. थोड़ी देर बाद मैंने अपना लंड उसकी चूत से निकाला और उसके मुँह में डाल दिया. बातों बातों में मैंने उसकी कमर के पीछे से हाथ फिराया, तो उसके बदन में सिहरन दौड़ गई और वो मेरी तरफ देख कर मुस्कुराने लगी.

वाह क्या मजा था, चाची के गुलाबी होंठों की छुअन से मेरे अन्दर करंट दौड़ने लगा था. उसने मेरी टांगें हवा में उठा दीं और मेरी गांड के छेद पर अपना लंड टिका दिया. मैं अपने हाथ से उसके एक चूतड़ को पकड़कर चड्डी के ऊपर से ही दबाने लगा.

मेरी एक फंतासी ये भी थी कि मैं लेटा रहूँ और कोई लड़की अपनी चूत मेरे मुँह पर रख कर चूत चटाए. मेरे होंठ चूसते चूसते जीजू ने अपना एक हाथ मेरे दूध पर रखा और मसलने लगे.

मुझे लगा कि जलालुद्दीन आखरी बार अपनी नगमा जान से मिलने आएँगे लेकिन वो तो बहुत बेरुखी से वहीं से वापस लौट गए. शेखर बहुत मस्त दिखता था इसलिए मेरी नजर बार बार उसकी तरफ उठ जाती थी. अब मैंने उनका दुपट्टा उनके मम्मों के ऊपर से हटा दिया तो मेरे सामने उनके 36 डी साइज़ के बूब्स पूरे तने हुए थे.

आज वो मंदिर जाने वाली थी तो उसने लाल रंग की साड़ी और उसी रंग का मैचिंग ब्लाउज़ पहना था क्योंकि उस दिन वटपूजा थी.

फिर माधुरी ने कहा- तुम यहीं अन्दर रुको अभी … बाद में जब मैं कहूँ तब निकलना. मैंने बिना कुछ सोचे समझे उनकी चूत पर अपना लंड सेट किया और एक जोरदार झटका मारा. मैं हॉल में रखे सोफे पर धप्प से पसर गया और अपने बैग को सामने की टेबल पर रख दिया.

हम दोनों चौंक गए कि इस टाइम कौन आ गया।मैंने आवाज़ लगाकर के पूछा- कौन है?तो आवाज़ आई- मैं हूँ राजवीर, दरवाजा खोल यार!मैंने अंजलि को बोला- तुम बाथरूम में चली जाओ, मैं इसको देखता हूँ।अंजलि ने अपने कपड़े लिए और बाथरूम में चली गई. उसकी कमर के पीछे मटकते हुए उसके गोल मटोल चूतड़ तो सीने पर बिजली गिरा देते हैं.

फिर अपने दोनों हाथों से लंड को ऊपर नीचे करके तेज तेज मालिश करने लगीं. ये कहकर मैंने सबसे कहा- हम चारों लड़कियां यहीं घोड़ी बनेंगी, जिसका जिसको चोदने का मन हो, वो उस लड़की की चूत या गांड मार सकता है. मैं उनके नंगे बदन को अपने दिमाग की छवि में उतारने लगा और उनको बिना कपड़ों के एक दूसरे में आलिंगन पाते हुए सोचकर अपने लंड को सहलाने लगा।खैर थोड़ी देर बाद सब लोग जागने लगे और अपने अपने काम में व्यस्त हो गए.

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मेरी एक आदत है कि मैं छुट्टी के पहले दिन की शाम और अगले दिन जब मेरी छुट्टी रहती है, तब दोपहर को ड्रिंक जरूर करता हूं.

उसका नाम कोमल था, जो मुझे उसके किसी से फ़ोन पर बात करने के दौरान मालूम चला था. वो दूसरे मम्मे का निप्पल अपने हाथों की उंगली से मसलने लगा जिससे मैं उसका सर अपने सीने से दबाने लगी. साक्षी के मुँह से जोर जोर से आवाजें आने लगीं और उसकी सांसें चढ़ने की आवाजें कमरे को फिर से गर्म करने लगीं.

उसी समय मैंने फिर से एक हल्की सी सीत्कार सुनी ‘आह …’उसके मुँह से ही ये आवाज निकली थी. वो मेरे कान में बोली- मेरी चूत में पूरी उंगलियां पेल डालो और जोर जोर से चोदो मेरी चूत को. सोशल सेक्सीमैंने उनकी चूचियों पर खीर डाल कर चूसी और उन्होंने भी मेरा लंड सॉस में डुबा कर चूसा.

शनिवार को मैंने खाना बनाया, व्हिस्की के साथ चखने के लिए चिकन टिक्का बनाया. शायद कुछ लोगों को नजर मेरे तम्बू पर पड़ गई थी इसीलिए वो सब मुझ पर हंस रहे थे.

सोनी, मैं और नीना ने पुणे से किंग साइज पलंग, गद्दा और फर्नीचर ख़रीदा. जब मैंने हाथ को कुछ ऊपर उठाया तो मेरी उंगलियों में कुछ नरम सा महसूस हुआ. उसकी स्पीड बढ़ती जा रही थी और पूरी मस्ती में गांड को उचका उचका कर वो चुद रहा था.

अब माधुरी ने उठ कर अपने बैग से टिश्यू पेपर निकाला और मेरे मुँह को साफ कर दिया, साथ ही साथ अपने मुँह को भी उसी से पौंछ लिया. तब रवि उठकर बाथरूम में चला गया और बाथरूम से आने के बाद वो तैयार हुआ और चला गया. इतने में उन्होंने मुझे किचन से ग्लास और पानी लाने के लिए कहा जिससे मुझे समझते देर नहीं लगी कि ये लोग आज मेरे साथ क्या करने वाले हैं.

मैं बस अपनी आंखें बंद करके साक्षी की जुबान को अपने लंड पर चलता हुआ महसूस कर रहा था.

विधवा हूँ, अगर मेरे बारे में ऊलजुलूल खबर फ़ैल गई तो हर कोई मेरी सवारी के लिए लंड उठाए घूमेगा. मेरा मोटा सुपारा चूत में सट्ट से घुस गया और मैं बिना कुछ सोचे जोर जोर से पेलने लगा.

अब चाची ने और चुदाई करने से मना कर दिया पर लंड को शांत करना भी जरूरी था. अंतर्वासना के सभी पाठक पाठिकाओं को संजना कपूर का अभिनंदन है।मेरा नाम संजना मेरी उम्र 26 मेरी शादी 6 महीने पहले हो चुकी थी और मेरा फिगर 34C 32 34 हो चुका था।मेरा रंग गोरा था और मेरी आंखें हल्की भूरी भूरी थी।मैं चार बहनों में दूसरे नंबर पर हूँ. थोड़ी देर ऐसे ही मैं उसकी गांड के ऊपर चढ़ा रहा और अपना लंड उसकी गांड में पेलता रहा; Xxx एस सेक्स का मजा लेता रहा.

कुछ पल बाद भैया खड़ा हो गया और उसने अपना लोवर और चड्डी एक साथ निकाल कर दूर फेंक दिया. मैंने कहा- या तो कुश्ती दिखाओ जिससे मेरा डर निकल जाए नहीं तो रिश्ता तोड़वा दो, मुझे नहीं करना निकाह. आप सभी ने मेरी पिछली सेक्स कहानीशादी में मिली अनछुई चूतके चारों भागों को पसन्द किया, इसके लिए मैं आपका बहुत आभारी हूँ.

बीएफ पिक्चर मद्रासी मगर मुझे मालूम था कि इसकीगांड फट जाएगीतो मैंने उसे आखिरी दिन गांड मारने का कहा और उससे लंड चुसवाने लगा. फिर थोड़ी देर बाद भाभी मेरा फिर से साथ देने लगीं और अपनी गांड उछाल उछाल कर मुझे उत्तेजित करने लगीं.

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मैं- शश्श … इतने अंधेरे में कोई कुछ नहीं देख पाएगा, तुम बस एंजॉय करो. मुझे नई लड़कियों से ज्यादा भाभी और आंटी के साथ सेक्स में ज्यादा मजा आता है. चूंकि आंटी दुखी दिखने लगी थीं तो मैं उनको वापस हंसाने की कोशिश करने लगा.

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मैंने भी लाइफ में पहली बार अपने लंड के लिए ब्लोजॉब का स्पर्श लिया था, मेरी तो आह निकल गई.

अब मैं जा रहा हूँ और आप चुदाई शो का आनंद लीजिये।प्रिय पाठको, आपको मेरी वाइफ चीटिंग सेक्स कहानी अवश्य रुचिकर लग रही होगी. कोमल अपने हाथ बेड को पकड़े हुई थी और उसकी एड़ियां बेड के गद्दे पर थीं.

उसने कुकर को चूल्हे पर रखा था और जब तक वह 3 या 4 बार सीटी नहीं बजाता, उसे कुछ नहीं करना था. मेरे वालिद सोच रहे थे कि मैं उनसे इतने दिन बाद मिली हूँ इसलिए रो रही हूँ लेकिन मेरा दिल ही जानता था कि मैं अपने सरताज, अपनी मुहब्बत अपने प्यार जलालुद्दीन के लिए रो रही थी. ड्राइवर के मुंह से दारु का भबका मेरी साँसों में समा गया और मुझे ऐसा लगा मानो मुझे उलटी हो जाएगी.

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करीब दस मिनट तक गांड का छेद चाटने के बाद भाभी ने मुझे उठाया और किस करना आरम्भ कर दिया. मॉम फ्रेंड सेक्स कहानी में पढ़ें कि मेरी मम्मी की एक सहेली बारिश में भीगी हुई मेरे घर आयी. उन लोगों ने ही मुझे उठाया, साफ़ किया और कपड़े पहना कर टेक्सी की पिछली सीट पर बैठा दिया.

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मुझे पता है कि तुम्हें उसकी बहुत याद आ रही है लेकिन यह सब क्या?उसने अपनी आंखें नीचे झुका लीं और उसकी आंखों में आंसू आ गए. किस साधन से आओगे, बस से या ट्रेन से?मैं बोला- आप बताओ किस से आऊं?जीजा जी ने कहा कि तुम शताब्दी बस से जयपुर आ जाओ. जैसे ही मैंने ज़्यादा ज़ोर लगा कर लंड घुसेड़ा, तो मेरा लंड का टोपा उसकी गांड के छेद में घुस गया.

बीवी में सेक्स की इच्छा मेरे से बहुत ज्यादा है, जो मैं पूरी नहीं कर पा रहा हूँ. वैसे ही मैं कुछ मिनट तक लगा रहा और लंड को धीरे धीरे आगे पीछे करते हुए चूत में जगह बना रहा था.

फिर उसने मेरे माथे को चूमा और मुझे दोबारा से अपने आप से अलग कर दिया.

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मैं तुम्हें जल्दी ही पूरे दिन के लिए बुलाऊंगी और अपनी गांड तोहफे में दूंगी.

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मेरे उछलने पर मेरे मम्मे भी उछलते थे, मैं पूरा ऊपर उठ कर धप्प से लण्ड पर बैठ जाती थी तो जलालुद्दीन साहब को भी बहुत मजा आता था. सोनी और मैंने तापोश को अपनी शादी और बीवी से कैसे अलग हुए, वो सब बताया. अपनी चूत में पूरा लंड लेते ही साक्षी की मादक कराहें निकलने लगी थीं ‘आह राजा इस्स्स…’कुछ ही पलों में साक्षी की चूत से रस छूटने लगा था, जिससे अब मुझे फच फच की आवाज आ रही थी.

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वो लगातार अपनी गांड को हिला कर मेरे हाथ को उसकी मंजिल तक पहुंचाने की कोशिश कर रही थी. फिर मैं उसके पेट के नीचे सरकते सरकते अपने मोर्चा सीधा उसकी लेगिंग्स पर ले आया. मैंने नीचे आकर उनकी फुद्दी पर हल्का सा किस किया और अपना लंड उनकी चूत में घुसाने लगा.

उसका घर मेरे घर से ज्यादा दूर नहीं है, 2 मिनट की दूरी पर है, हम एक ही परिवार के हैं, सिर्फ घर अलग अलग है.

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जैसे ही मैं साक्षी की चूत में नीचे से अपने लंड को पेलता तो साक्षी के मुँह से कामुक आह निकल जाती ‘आह आआह. दोस्तो, जैसे कि मैंने आपको बताया था कि मैं पूना में हिंजेवाड़ी में एक मार्केटिंग कंपनी जॉब करता हूँ. इतना कहते हुए मैंने उसके कंधे पर हाथ रखा और टॉप को कंधे से थोड़ा गिरा कर उसकी ब्रा को छूते हुए गिनती गिनने लगा.

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इस बार चाची ने कुछ नहीं कहा, वो सो सी गई थीं शायद, या उन्हें भी मजा आने लगा था. इस समय मेरी चुदाई का घमासान खेल चल रहा था और मेरे शरीर का अंग अंग चोदा जा रहा था लेकिन फिर भी कोई हार मानने को तैयार नहीं था. सच में क्या मलाई सी चूत थी उनकी … एकदम कच्ची कली की तरह, गुलाबी रंगत वाली चूत थी और चूत के ऊपर छोटे छोटे काले बाल उनकी शोभा बढ़ा रहे थे.

उसने कहा- तुम भी तो मुझे ऐसी नजर से देखते हो?मैंने कहा- नहीं, वो तो मैं बता रहा था कि तुम कैसी लगती हो. मैंने बिना उस लड़की को देखे बिना बोल दिया कि हां मैं पटा लूंगा और उसे चोद भी दूंगा.

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चूंकि मेरी उनसे जान पहचान अच्छी थी, तो मैं बस में उनके साथ ही बैठ गया और वो भी मुझे देख कर ख़ुश हो गईं. मम्मी ने कड़क आवाज में बोला- सच सच बताओ?मैंने कहा- मैं तो बस किचन में पानी पीने जा रहा था. मैं बोली- मंजू, अब मैं अपने पति के पास जा रही हूं क्योंकि पांच बजे वह उठ जाते हैं.

मैंने लगातार तेल टपकाते हुए उसकी गांड में एक के बाद दो और फिर तीन उंगलियां चलाना शुरू कर दीं. जब मैं थक जाता तो अपने जिस्म का वजन उसकी गांड पर डाल कर रुक जाता जिससे मेरा लंड पूरी तरह से उसकी गांड में सीधा घुस जाता. तभी मैंने अपना लंड जो तम्बू बना खड़ा था, निशा की टांगों के बीच में लगा दिया.

छोटे लड़कों को कई बार देखा था और यह जानती थी कि उनके पास एक छोटी सी लुल्ली होती है लेकिन इधर तो बड़ी सी बन्दूक थी.

बीएफ पिक्चर मद्रासी: मैं- जी, बहुत ज्यादा, मेरी उसी फ्रेंड के साथ एक्सपीरियंस शेयर भी करता हूं. वो सोच रही थी कि मैं उसकी चूत ही चोदूंगा, पर मैं आज उसके साथ बट्ट सेक्स करने की फिराक में भी था.

मैंने तुरन्त उन्हें अन्दर आने को कहा और कमरे से अपनी तौलिया लाकर दी. मैंने उसे पीठ के बल करने के लिए उसे फिर से घुमाया और लंड को अपने हाथ में पकड़कर उसकी चूत के पास ले गया, लेकिन डाला नहीं. मेरे लगातार लगते झटकों पर वो बस कराह रही थी ‘आह … आह … आह …’कुछ पल बाद उसका शरीर अकड़ने लगा, उसने मुझे अपने ऊपर दबा लिया.

चूत पर जैम लग जाने के बाद मैंने कोमल की टांगों को अपने कंधों पर रख लिया और उसकी चूत पर अपना मुँह लगाने लगा.

मैंने पहले से ही स्टोर रूम में अदीबा की चुदाई की व्यवस्था कर रखी थी. मैं आगे भी अपनी कहानियां लाती रहूंगी जिसमें मैं अपने आगे के अनुभव आपके साथ साझा करुँगी. मैंने नाटक शुरू किया ही था कि इतने में भाभी मेरे करीब सरक आई और मुझसे चिपक गई.